Vande Bharat Express: बेंगलुरु से गोवा जाने वालों के लिए रेल सफर का नया विकल्प तैयार हो रहा है। रेलवे मंगलुरु सेंट्रल-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को यशवंतपुर जंक्शन तक बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। विस्तार के बाद ट्रेन बेंगलुरु से चलकर मंगलुरु होते हुए गोवा के मडगांव तक जाएगी। इस सफर में करीब 13 घंटे लग सकते हैं।
खास बात यह है कि रास्ते में यात्रियों को पश्चिमी घाट, पहाड़ी इलाकों और तटीय कर्नाटक के नजारे देखने को मिलेंगे। हालांकि ट्रेन सेवा शुरू होने की तारीख और अंतिम टाइम-टेबल अभी तय नहीं हुआ है।
मंगलुरु के रास्ते गोवा जाएगी ट्रेन
रेलवे मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक मौजूदा मंगलुरु सेंट्रल-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को यशवंतपुर जंक्शन तक बढ़ाया जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसी महीने की शुरुआत में सांसद बृजेश चौटा और विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी को लिखे पत्र में इसकी जानकारी दी थी। फिलहाल यह ट्रेन मंगलुरु सेंट्रल और मडगांव के बीच सप्ताह में छह दिन चलती है। गुरुवार को इसकी सेवा नहीं होती। मंगलुरु से मडगांव का एक तरफ का सफर 6 घंटे से थोड़ा कम समय में पूरा होता है।
करीब 13 घंटे में पूरा होगा सफर
यशवंतपुर से मडगांव के बीच वंदे भारत का सफर करीब 13 घंटे का होगा। बेंगलुरु और गोवा के बीच दूरी करीब 700 किलोमीटर के आसपास है। इस रूट पर ट्रेन को कई पहाड़ी और घुमावदार हिस्सों से होकर गुजरना पड़ता है। फिलहाल पारंपरिक ट्रेनों से बेंगलुरु और गोवा के बीच सफर में करीब 15 घंटे लगते हैं। बस से यह यात्रा करीब 12 से 14 घंटे में पूरी हो सकती है। वहीं फ्लाइट से समय काफी कम लगता है। ऐसे में वंदे भारत दिन के समय रेल यात्रा के साथ रास्ते के नजारे देखने का विकल्प देगी।
पश्चिमी घाट का 55 किलोमीटर लंबा घाट सेक्शन
इस रूट का सबसे खास हिस्सा सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड के बीच करीब 55 किलोमीटर का घाट सेक्शन है। ट्रेन यहां पहाड़ियों, हरियाली और घाटियों के बीच से गुजरेगी। इलेक्ट्रिफिकेशन और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के बाद इस सेक्शन पर रेल ऑपरेशन पहले से बेहतर हुआ है। हालांकि पहाड़ी और घुमावदार रास्ते के कारण यहां ट्रेन की रफ्तार मैदानी इलाकों जैसी नहीं रहती। इसका असर बेंगलुरु से गोवा की पूरी यात्रा के समय पर भी पड़ता है।
किन जगहों से होकर गुजरेगी ट्रेन?
यशवंतपुर से चलने के बाद ट्रेन हासन, सकलेशपुर, सुब्रह्मण्य रोड और मंगलुरु क्षेत्र से होते हुए तटीय कर्नाटक की ओर बढ़ेगी। इसके बाद ट्रेन गोवा के मडगांव पहुंचेगी। यात्रा के दौरान रास्ते का दृश्य लगातार बदलता रहेगा। बेंगलुरु के शहरी इलाके के बाद हरियाली बढ़ेगी। फिर पश्चिमी घाट के पहाड़ी हिस्से आएंगे। इसके बाद तटीय कर्नाटक और आखिर में गोवा का इलाका आएगा।
वंदे भारत में मिलेंगी ये सुविधाएं
ट्रेन में चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा मिलती है। एग्जीक्यूटिव क्लास में रोटेट होने वाली सीटें और बड़ी खिड़कियां यात्रियों को बाहर के नजारे देखने में मदद करेंगी। वंदे भारत सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रेनसेट है। इसमें अलग इंजन नहीं होता। ट्रेन के कोचों में ही प्रणोदन की व्यवस्था होती है। इसके चलते पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में सफर के दौरान शोर और झटके कम महसूस हो सकते हैं।
खाने-पीने की भी सुविधा
लंबे सफर को देखते हुए वंदे भारत में यात्रियों के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था रहती है। यात्रा के अलग-अलग हिस्सों में नाश्ता, भोजन और चाय जैसे विकल्प मिलते हैं। ट्रेन में बायो-वैक्यूम टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी हैं। करीब 13 घंटे के सफर में बैठने की सुविधा और ट्रेन की सुविधाएं यात्रियों के अनुभव का हिस्सा रहेंगी।
फ्लाइट, बस और वंदे भारत में क्या अंतर?
अगर प्राथमिकता सबसे कम समय में गोवा पहुंचने की है, तो फ्लाइट का सफर काफी कम समय लेता है। उड़ान का समय करीब डेढ़ घंटे हो सकता है। हालांकि एयरपोर्ट तक पहुंचने, चेक-इन और सुरक्षा जांच में लगने वाला समय अलग होता है। बस से सफर में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं। रात की बस से यात्रा करने पर पहाड़ी और घुमावदार रास्ते कुछ यात्रियों के लिए परेशानी वाले हो सकते हैं। वंदे भारत का विकल्प दिन के समय रेल यात्रा करने का मौका देगा। इस दौरान पश्चिमी घाट और तटीय कर्नाटक के नजारे भी देखे जा सकेंगे।
कितना हो सकता है किराया?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वंदे भारत की चेयर कार का किराया करीब 1,500 से 1,800 रुपये और एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया करीब 2,800 से 3,200 रुपये के आसपास हो सकता है। फ्लाइट का किराया तारीख और बुकिंग के समय के आधार पर करीब 4,500 से 8,000 रुपये या उससे ज्यादा हो सकता है। बस का किराया करीब 1,200 से 2,500 रुपये के बीच रह सकता है। बस और फ्लाइट का किराया यात्रा की तारीख, सीट और बुकिंग के समय के अनुसार बदल सकता है।
किन यात्रियों के लिए सही रहेगा यह सफर?
अगर गोवा पहुंचकर ज्यादा समय बिताना प्राथमिकता है, तो फ्लाइट कम समय लेती है। लेकिन जो यात्री सफर को भी यात्रा का हिस्सा बनाना चाहते हैं, उनके लिए वंदे भारत एक विकल्प हो सकती है। पश्चिमी घाट की हरियाली, पहाड़ों और घाटियों के नजारे इस यात्रा को अलग अनुभव दे सकते हैं। हालांकि यह रात की स्लीपर ट्रेन नहीं है। करीब 13 घंटे का सफर बैठकर करना होगा। इसलिए यात्रा की योजना बनाते समय इस बात को ध्यान में रखना होगा।
खिड़की वाली सीट का रहेगा अलग अनुभव
जो यात्री रास्ते के नजारे देखना चाहते हैं, उनके लिए खिड़की वाली सीट उपयोगी रहेगी। खासकर घाट सेक्शन में पहाड़ और हरियाली इस सफर का खास हिस्सा हो सकते हैं। पहाड़ी और सुरंग वाले हिस्सों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो सकता है। लंबी यात्रा के लिए जरूरी सामग्री पहले से डाउनलोड करना उपयोगी रहेगा। करीब 13 घंटे के सफर में बीच-बीच में सीट से उठकर थोड़ा चलना भी आरामदायक रहेगा।
ट्रेन को मिलेगा नया नंबर और नाम
बेंगलुरु और गोवा के बीच वंदे भारत चलाने का प्रस्ताव इस साल फरवरी में सामने आया था। दक्षिण पश्चिम रेलवे, कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड और दक्षिण रेलवे की ओर से इसे लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया था। प्रस्ताव के मुताबिक ट्रेन यशवंतपुर से सुबह 6:05 बजे रवाना होकर शाम 7:15 बजे मडगांव पहुंच सकती है। शुरुआती प्रस्ताव में ट्रेन को मंगलुरु सेंट्रल स्टेशन पर लाए बिना बायपास करने की बात थी। अब योजना में बदलाव किया गया है और विस्तारित सेवा को मंगलुरु सेंट्रल से होकर चलाने की तैयारी है। सितंबर में बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर 16 कोच वाली वंदे भारत रेक के साथ दो ट्रायल रन भी किए गए थे। इन परीक्षणों में ट्रेन ने यह दूरी 7 घंटे से कम समय में पूरी की थी। विस्तार के बाद ट्रेन नए नंबरों के साथ चलेगी। दोनों दिशाओं के लिए 26655 और 26656 नंबर तय किए गए हैं। ये मौजूदा 20646 और 20645 नंबर से अलग होंगे। ट्रेन का नाम भी बदलकर यशवंतपुर-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस किया जाएगा। फिलहाल सेवा शुरू होने की तारीख और अंतिम टाइम-टेबल तय नहीं हुआ है। ट्रेन के स्टॉपेज की संख्या भी अंतिम यात्रा समय को प्रभावित करेगी।



