Mann Ki Baat 12 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के 12 साल पूरे होने पर इसे ‘तीर्थ यात्रा’ बताया। उन्होंने कहा कि इस मंच के जरिए उन्हें देशभर के आम लोगों के परिश्रम, साहस, समर्पण और सेवा भावना को समझने का अवसर मिला।
इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को फिर से जीवंत करने के लिए ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। साथ ही दिवाली और छठ से पहले स्वच्छता बनाए रखने तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की।
12 साल के सफर को बताया तीर्थ यात्रा
पीएम मोदी ने याद किया कि ‘मन की बात’ की शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। तब से यह सफर लगातार जारी है। उन्होंने इस यात्रा में साथ देने और मार्गदर्शन करने के लिए देश के सभी श्रोताओं का आभार जताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में सदियों से तीर्थ यात्राओं की परंपरा रही है। उनके लिए ‘मन की बात’ भी देशवासियों के प्रयासों को नमन करने और उनकी उपलब्धियों को सम्मान देने की एक पवित्र यात्रा की तरह है।
दिवाली और छठ से पहले स्वच्छता पर जोर
आगामी त्योहारों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने आसपास और रिहायशी इलाकों में साफ-सफाई बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दिवाली और छठ जैसे पर्व नजदीक हैं और कई जगहों पर सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं। पीएम मोदी ने दिवाली पर स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पाद खरीदने की अपील भी की। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करने पर जोर दिया।
स्थानीय उत्पादों की मांग विदेशों तक बढ़ी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के स्थानीय उत्पादों की मांग विदेशों में भी बढ़ रही है। उन्होंने बिहार के मखाने, कर्नाटक की अरहर दाल और महाराष्ट्र के जनजातीय उत्पादों का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, खादी की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। पीएम मोदी ने भारत की प्रकृति-पूजा की प्राचीन परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखना और जल स्रोतों की देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने छोटे-छोटे प्रयासों को समाज में बड़े बदलाव का आधार बताया।
हेवल नदी को फिर जीवंत करने में ग्रामीणों की भूमिका
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की खास तौर पर सराहना की। उन्होंने इसे प्रकृति के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का उदाहरण बताया। पीएम मोदी के मुताबिक, कुछ समय पहले हेवल नदी का जलस्तर काफी गिर गया था। आसपास के प्राकृतिक जल स्रोत भी सूखने लगे थे। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी को बचाने के लिए अभियान शुरू किया।
वर्षा जल संचयन और वृक्षारोपण से मिली मदद
हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैसे प्रयास किए गए। प्रधानमंत्री ने बताया कि इन कोशिशों से नदी में फिर से जीवन लौटा और दर्जनों प्राकृतिक जल स्रोत भी दोबारा जीवित हो गए। पीएम मोदी ने कहा कि जब समाज किसी अच्छे उद्देश्य के लिए एकजुट होकर काम करता है, तो सकारात्मक बदलाव संभव होता है।
पंजाब की नव-त्रिंजन पहल का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में चल रही नव-त्रिंजन पहल की भी सराहना की। इस पहल के तहत रासायनिक रंगों के बिना प्राकृतिक कपास उगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने स्वच्छता, जल संरक्षण, स्थानीय उत्पादों और सामूहिक भागीदारी को अहम बताया। उनके संदेश का जोर इस बात पर रहा कि आम लोगों के छोटे प्रयास भी प्रकृति और समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।



