UCC in UP Before 2027 Election: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले भाजपा और NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के बयान के बाद अब इसकी सबसे ज्यादा चर्चा बिहार और उत्तर प्रदेश में हो रही है। बिहार में JDU के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने साफ कहा है कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा।
वहीं बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने इसे पूरी तरह खारिज करने के बजाय विचार-विमर्श के बाद फैसला लेने की बात कही है। दूसरी ओर, 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे उत्तर प्रदेश में भी अमित शाह के बयान के बाद UCC को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे और अमित शाह से संभावित मुलाकात को लेकर भी इस मुद्दे पर चर्चा की अटकलें तेज हुई हैं। हालांकि, यूपी में UCC लागू करने को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
अमित शाह के एक बयान से क्यों बदल गया सियासी फोकस?
अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में कहा कि भाजपा-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में UCC लागू किया जा चुका है और बाकी NDA शासित राज्यों में भी इसे लागू करने का भरोसा है। इस बयान के बाद बहस सिर्फ 2029 की समयसीमा तक सीमित नहीं रही। अब सवाल यह है कि जिन राज्यों में अगले एक-दो साल में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां UCC को लेकर सरकारें कितनी तेजी दिखाती हैं। यही वजह है कि बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पर भी नजर टिक गई है।
बिहार में NDA के भीतर ही अलग-अलग सुर
बिहार में UCC को लेकर JDU ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। JDU के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा है कि बिहार में UCC किसी भी कीमत पर लागू नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संसद में UCC से जुड़े किसी विधेयक का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि बिहार में इसे लागू करने पर JDU सहमत है। यानी केंद्र में NDA के साथ सहयोग और राज्य में UCC पर अलग रुख बिहार की गठबंधन राजनीति में यह अंतर अब खुलकर सामने आ गया है। वहीं बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने इस मुद्दे पर पूरी तरह दरवाजा बंद नहीं किया। उन्होंने विचार-विमर्श के बाद फैसला लेने की बात कही है। इससे बिहार NDA के भीतर UCC पर अलग-अलग राय की तस्वीर और साफ हो गई है।
21 NDA राज्यों में UCC का लक्ष्य, कई राज्यों में प्रक्रिया शुरू
अमित शाह के मुताबिक 2029 से पहले सभी 21 BJP-NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य है। फिलहाल उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां UCC पूरी तरह लागू हो चुका है। गुजरात और असम में UCC कानून की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। मध्य प्रदेश में भी कैबिनेट स्तर पर इसे मंजूरी मिल चुकी है। इन राज्यों में राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना की प्रक्रिया का इंतजार है। वहीं महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने UCC के लिए ड्राफ्ट तैयार करने को लेकर कमेटियां गठित की हैं। इससे साफ है कि सभी 21 राज्यों में UCC की स्थिति एक जैसी नहीं है। कहीं कानून लागू हो चुका है, कहीं विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और कहीं अभी ड्राफ्टिंग का चरण है।
अब नजर उत्तर प्रदेश पर, 2027 चुनाव से पहले क्या होगा?
अमित शाह के बयान के बाद उत्तर प्रदेश सबसे अहम राज्यों में शामिल हो गया है। वजह साफ है। यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य भाजपा-NDA के 21 राज्यों में शामिल है। ताजा रिपोर्टों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे और अमित शाह से हुई मुलाकात को लेकर UCC पर चर्चा की अटकलें सामने आई हैं। हालांकि, इस संभावित मुलाकात में UCC पर बातचीत होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश में UCC को लेकर एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। राज्य विधि आयोग के पास इस तरह के कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जरूरी ढांचा और विशेषज्ञता मौजूद होने की बात कही गई है। लेकिन अभी आयोग को ड्राफ्ट तैयार करने का औपचारिक निर्देश नहीं मिला है। यानी फिलहाल यूपी में UCC लागू होने की तारीख तय नहीं है। लेकिन अमित शाह के 2029 वाले बयान के बाद इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा जरूर तेज हो गई है।
भाजपा के लिए यूपी में UCC कितना अहम?
UCC भाजपा के प्रमुख वैचारिक मुद्दों में शामिल रहा है। राम मंदिर और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पार्टी के एजेंडे में UCC भी लंबे समय से प्रमुख मुद्दा रहा है। यूपी भाजपा के प्रवक्ता ने भी कहा है कि पार्टी UCC के लिए प्रतिबद्ध है और अमित शाह के बयान के बाद राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढ़ेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिलहाल इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि क्या यूपी सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले UCC को लेकर कोई ठोस कदम उठाएगी या प्रक्रिया को चुनाव के बाद तक आगे बढ़ाया जाएगा।
बिहार में विरोध, यूपी में बढ़ी चर्चा, NDA की असली परीक्षा
अमित शाह के बयान ने NDA के भीतर UCC को लेकर अलग-अलग राजनीतिक स्थितियों को सामने ला दिया है। बिहार में JDU के श्याम रजक ने साफ विरोध किया है। संतोष सुमन ने विचार-विमर्श की बात कही है। वहीं उत्तर प्रदेश में अभी आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि अमित शाह ने समयसीमा 2029 से पहले की रखी है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में UCC पर कोई कदम उठता है या नहीं, इस पर अब राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी। फिलहाल इतना तय है कि UCC अब केवल भाजपा के राष्ट्रीय एजेंडे का मुद्दा नहीं रह गया है। यह NDA के अलग-अलग सहयोगी दलों की राजनीतिक प्राथमिकताओं और आने वाले विधानसभा चुनावों के बीच भी एक बड़ा सवाल बन चुका है।



