शनिवार, 3 अक्तूबर 2026 शनि, 3 अक्तू॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
पब्लिक इंटरेस्ट

ट्रेन के ट्रैक किनारे क्यों लगा होता है W/L बोर्ड? हॉर्न बजाने से क्या है कनेक्शन

Indian Railway W/L Board Meaning: ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए पटरी के किनारे आपको पीले रंग का एक छोटा-सा बोर्ड कई बार दिखा होगा। उस पर बड़े अक्षरों में W/L लिखा रहता है। कुछ जगहों पर ‘सी/फा’ भी लिखा नजर आता है। हो सकता है आपने इसे कई बार देखा हो, लेकिन शायद […]

Yellow W/L board beside railway track near a level crossing
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Indian Railway W/L Board Meaning: ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए पटरी के किनारे आपको पीले रंग का एक छोटा-सा बोर्ड कई बार दिखा होगा। उस पर बड़े अक्षरों में W/L लिखा रहता है। कुछ जगहों पर ‘सी/फा’ भी लिखा नजर आता है। हो सकता है आपने इसे कई बार देखा हो, लेकिन शायद कभी गौर नहीं किया कि ट्रेन वहां पहुंचते ही हॉर्न क्यों बजाती है। 

दरअसल, रेलवे ट्रैक के किनारे लगा यह बोर्ड लोको पायलट के लिए एक जरूरी संकेत है। इसे देखते ही उसे पता चल जाता है कि आगे लेवल क्रॉसिंग आने वाली है और वहां हॉर्न देना है।

W/L का मतलब आखिर क्या है?

रेलवे में W/L यानी Whistle for Level Crossing। सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब है- आगे रेलवे क्रॉसिंग है, हॉर्न बजाएं। यही वजह है कि W/L बोर्ड नजर आते ही ट्रेन का हॉर्न सुनाई देने लगता है। हिंदी में इसी संकेत को कई जगह ‘सी/फा’ लिखकर बताया जाता है। इसका मतलब भी यही है कि आगे फाटक या क्रॉसिंग है और ट्रेन को सीटी देनी है। यानी अगली बार ट्रेन में बैठे-बैठे अचानक हॉर्न सुनाई दे और उसी समय आपको ट्रैक के किनारे W/L बोर्ड दिख जाए, तो दोनों के बीच का कनेक्शन समझ जाइए।

क्रॉसिंग के पास हॉर्न की जरूरत क्यों पड़ती है?

हर रेलवे क्रॉसिंग पर सड़क से आने वाले व्यक्ति को दूर से ट्रेन दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। कई जगह पेड़, मकान, मोड़ या दूसरी रुकावटें ट्रैक का रास्ता ढक देती हैं। ऐसे में ट्रेन की आवाज लोगों को पहले ही सावधान कर देती है। क्रॉसिंग के आसपास मौजूद लोग समझ जाते हैं कि ट्रेन आने वाली है और उन्हें ट्रैक से दूर रहना है। यही कारण है कि रेलवे में हॉर्न सिर्फ आवाज निकालने की चीज नहीं है। कई जगह यह सुरक्षा चेतावनी का काम करता है।

हर जगह क्यों नहीं दिखता W/L बोर्ड?

W/L बोर्ड खास तौर पर उन लेवल क्रॉसिंग के पास लगाया जाता है, जहां इसकी जरूरत होती है। रेलवे के नियमों के मुताबिक यह अनमैंड लेवल क्रॉसिंग के पास लगाया जाता है। ऐसी क्रॉसिंग पर फाटक संभालने के लिए कर्मचारी मौजूद नहीं होता। कुछ मैनड क्रॉसिंग पर भी ऐसा बोर्ड लगाया जाता है। खासकर उन जगहों पर, जहां क्रॉसिंग से रेलवे ट्रैक का रास्ता साफ नजर नहीं आता। इसलिए ट्रैक के किनारे दिखने वाला W/L बोर्ड लोको पायलट को पहले से बता देता है कि आगे अतिरिक्त सावधानी बरतने वाली जगह है।

पीला बोर्ड ही क्यों लगाया जाता है?

W/L बोर्ड को देखकर एक और बात ध्यान खींचती है। इसका रंग आमतौर पर पीला होता है और अक्षर काले होते हैं। इसका सीधा कारण है दूर से आसानी से दिखाई देना। पीले और काले रंग का यह संयोजन लोको पायलट को बोर्ड जल्दी पहचानने में मदद करता है। बोर्ड का आकार, रंग और उसे लगाने की व्यवस्था भी रेलवे के नियमों के तहत तय होती है।

कहीं सिर्फ ‘W’ लिखा बोर्ड भी दिखे तो?

ट्रैक के किनारे अगर सिर्फ W लिखा बोर्ड नजर आए तो उसे भी नजरअंदाज न करें। यह सामान्य तौर पर Whistle यानी हॉर्न या सीटी देने का संकेत होता है। ऐसे बोर्ड उन स्थानों के पास लगाए जा सकते हैं, जहां मोड़, कटिंग या किसी दूसरी रुकावट की वजह से आगे का ट्रैक साफ दिखाई नहीं देता। यानी दोनों बोर्ड का मकसद लोको पायलट को हॉर्न के लिए सतर्क करना है। फर्क इतना है कि W/L खास तौर पर लेवल क्रॉसिंग का संकेत देता है।

अगली बार ट्रेन में यह गलती मत कीजिएगा

अब जब भी ट्रेन से सफर करें तो खिड़की के बाहर दिखाई देने वाले इन छोटे-छोटे बोर्ड पर एक नजर जरूर डालिएगा। पीले रंग का W/L या ‘सी/फा’ बोर्ड दिखे और कुछ ही देर में ट्रेन का हॉर्न सुनाई दे, तो समझ जाइए कि इसके पीछे रेलवे का तय सुरक्षा संकेत काम कर रहा है। रेलवे ट्रैक के किनारे लगा यह छोटा-सा बोर्ड देखने में भले ही मामूली लगे, लेकिन लोको पायलट के लिए इसका मतलब बेहद साफ है… आगे क्रॉसिंग है, सावधान रहिए और हॉर्न दीजिए।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

विज्ञापन