Action against striking Patwaris: एक तरफ धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो गई है, दूसरी तरफ वो पटवारी हड़ताल पर हैं, जिनके बिना एक दाना धान भी खरीदी केंद्र तक नहीं पहुंच सकता। 13 अक्टूबर से शुरू हुई ये हड़ताल अब सरकार और पटवारियों के बीच सीधी टक्कर में बदल गई है।
सरकार ने पहले समझाने की कोशिश की, अब सख्ती पर उतर आई है। प्रदेशभर में 150 से ज्यादा पटवारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, और 1000 से ज्यादा को ब्रेक इन सर्विस का नोटिस थमा दिया गया है। मतलब साफ है – काम पर नहीं लौटे तो नौकरी पर ब्रेक लगेगा।
पटवारियों के हड़ताल पर जाने से सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ रही है। डिजिटल क्रॉप सर्वे रुका है, गिरदावरी नहीं हो रही, एग्रीस्टैक और किसान अभिलेख सत्यापन अटका है। नामांतरण-बंटवारा भी ठप है।
सर्वे के बिना धान नहीं बेच पाएंगे किसान
सबसे बड़ा संकट ये है कि जिन किसानों के खेतों का सर्वे नहीं हुआ, वो समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पाएंगे। धान खेत में खड़ा है, खरीदी शुरू होने वाली है, लेकिन कागजों में वो फसल है ही नहीं।
पटवारियों को जारी नोटिस में क्या लिखा है?
सरकार ने बिलासपुर संभाग के 259 और सरगुजा संभाग के 819 सहित 1000 से ज्यादा पटवारियों को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है – तय समय में काम पर लौटो और स्पष्टीकरण दो, वरना अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान माना जाएगा और एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
पटवारी क्यों नहीं मान रहे?
पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप का स्टैंड साफ है – पीवी ऐप की खामियां दूर करो, वेतन विसंगति खत्म करो, आरआई पद पर प्रमोशन दो, तब ही हड़ताल खत्म होगी।
आखिर पीवी ऐप में दिक्कत क्या है?
यही इस पूरे विवाद की जड़ है। पीवी ऐप यानी फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप। खेत में जाकर फसल का भौतिक सत्यापन करने के लिए इसे अनिवार्य किया गया है।
पटवारियों का आरोप है –
– गांवों और खेतों में नेटवर्क ही नहीं मिलता, ऐप चलता ही नहीं
– सर्वर बार-बार डाउन हो जाता है, डेटा अपलोड में घंटों लग जाते हैं
– पॉलीगॉन मैपिंग जैसा मुश्किल काम बिना ट्रेनिंग के थोप दिया गया
– पुराना भुइयां प्लेटफॉर्म बंद कर अचानक नया ऐप ला दिया गया
– ऊपर से डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक, किसान पंजीयन, स्वामित्व योजना का बोझ अलग
पटवारियों का कहना है, काम से भाग नहीं रहे, लेकिन खराब ऐप से 100% सत्यापन का दबाव मानसिक तनाव बढ़ा रहा है।
कर्मचारी फेडरेशन ने क्या कहा?
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने सरकार की सख्ती पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उनकी मांग है – पटवारियों पर ट्रांसफर, नोटिस और सस्पेंशन की कार्रवाई रोककर बातचीत से समाधान निकाला जाए। पीवी ऐप की तकनीकी समस्या दूर की जाए, वेतन विसंगति खत्म की जाए, प्रमोशन दिया जाए और फिलहाल पीवी ऐप को स्थगित किया जाए।
फिलहाल एक तरफ सरकार का एक्शन है, दूसरी तरफ पटवारियों का अड़ना। बीच में फंसा है किसान, जिसकी धान खरीदी दांव पर है।
FAQ: पटवारियों की हड़ताल
Q1. पटवारी हड़ताल कब से चल रही है?
13 अक्टूबर से प्रदेशभर के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
Q2. कितने पटवारियों को सस्पेंड किया गया?
150 से ज्यादा पटवारियों को निलंबित किया गया है।
Q3. ब्रेक इन सर्विस का नोटिस किसे मिला?
बिलासपुर के 259 और सरगुजा के 819 सहित 1000 से ज्यादा पटवारियों को नोटिस मिला है।
Q4. पटवारियों की मुख्य मांग क्या है?
पीवी ऐप की खामियां दूर करना, वेतन विसंगति खत्म करना और आरआई पद पर पदोन्नति।
Q5. पीवी ऐप में क्या दिक्कत है?
सर्वर डाउन, नेटवर्क की समस्या, बिना ट्रेनिंग पॉलीगॉन मैपिंग और डेटा अपलोड में देरी।
Q6. हड़ताल से किसानों को क्या नुकसान है?
डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी रुकने से कई किसान समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पाएंगे।



