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Ram Sa Peer Baba: राजस्थान के प्रसिद्ध राम सा पीर बाबा की परीक्षा लेने मक्का मदीना से आए थे पीर, जानिए रुणिचा मेले से जुड़े चमत्कार

मक्का से आए पीरों ने बाबा के चमत्कार से प्रभावित होकर उन्हें ‘पीरों के पीर’ की उपाधि दी थी।
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Ram Sa Peer Baba: राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित रुणिचा धाम (रामदेवरा) में बाबा रामदेवजी का प्रसिद्ध भादवा मेला शुरू हो गया है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वितीया (बाबे की बीज) से शुरू होकर यह मेला एकादशी तक चलेगा। इस दौरान राजस्थान सहित गुजरात, मध्य प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा (पदयात्रा) करके बाबा की समाधि के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

अजमलजी की तपस्या और भगवान द्वारकाधीश का अवतार

लगभग 675 साल पहले संवत् 1409 में राजस्थान की धरती पर राम सा पीर बाबा का अवतरण हुआ था। उनके पिता अजमल निसंतान थे और समाज के तानों से परेशान होकर उन्होंने द्वारकाधीश की कठिन आराधना की थी। लोक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अजमलजी के घर पुत्र रूप में जन्म लिया, जिनका नाम रामदेव रखा गया। बचपन से ही उन्होंने कई अद्भुत चमत्कार दिखाने शुरू कर दिए थे।

जब मक्का से पीर बाबा की परीक्षा लेने पहुंचे

बाबा रामदेवजी की ख्याति दूर-दूर तक फैल चुकी थी। उनकी परीक्षा लेने के लिए मक्का मदीना से पांच पीर रूणिचा गांव आए। उन्होंने शर्त रखी कि वे उसी बर्तन में भोजन करेंगे जो वे मक्का में भूल आए हैं। बाबा ने चमत्कार दिखाते हुए पलभर में वह पात्र मक्का से लाकर उन्हें दे दिया। इससे प्रभावित होकर पीरों ने स्वीकार किया कि वे “पीरों के भी पीर” (राम सा पीर) हैं।

बाबा के चमत्कारों (परचे) से जुड़ी प्रसिद्ध कथाएं

लोक मान्यताओं में बाबा रामदेवजी के चमत्कारों को ‘परचा’ कहा जाता है। बचपन में उन्होंने पोकरण के आतंककारी भैरव राक्षस का वध किया था। इसके अलावा, उन्होंने अपनी बहन के मृत भांजे को जीवित किया, झूठ बोलने वाले एक व्यापारी की मिश्री को नमक में बदल दिया और डूबते हुए जहाजों को सुरक्षित किनारे लगाया। उनके इन चमत्कारों का गुणगान आज भी भक्त करते हैं।

मेले के सांस्कृतिक आकर्षण और तेरह ताली नृत्य

मेले के सांस्कृतिक आकर्षण और तेरह ताली नृत्यरुणिचा मेले में धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजस्थानी संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिलती है। मेले में कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला प्रसिद्ध ‘तेरह ताली नृत्य’ देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है। इस पावन अवसर पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग समान रूप से ध्वजा चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं।

छत्तीसगढ़ में भी अनेक मंदिरों में मचती है धूम

राजस्थानी परंपरा को मानने वाले हिंदू, मुस्लिम, जैन, माहेश्वरी, अग्रवाल, पालीवाल, राजस्थानी ब्राम्हण सहित विविध जाति, संप्रदाय के लाखों श्रद्धालु छत्तीसगढ़ में निवास करते हैं। छत्तीसगढ़ में भी राम सा पीर बाबा मेला महोत्सव की धूम मचती है। अनेक प्रसिद्ध मंदिरों में राजधानी रायपुर के सत्ती बाजार स्थित राम सा पीर मंदिर, फाफाडीह, गुढ़ियारी, पचपेड़ी नाका के समीप स्थित मंदिरों में इन दिनों भादवा मेला महोत्सव की धूम मची हुई है। इसके अलावा राजनांदगांव, दुर्ग, धमतरी, मुंगेली, नारायणपुर सहित अनेक शहरों में श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे हैं। प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा जम्मा जागरण की प्रस्तुति से भक्तिभव जगाया जा रहा है।

  • राम सा पीर बाबा का प्रसिद्ध मेला प्रतिवर्ष राजस्थान के जैसलमेर जिले के रुणिचा धाम (रामदेवरा) में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक आयोजित होता है।
  • मक्का से आए पीरों ने बाबा के चमत्कार से प्रभावित होकर उन्हें ‘पीरों के पीर’ यानी ‘राम सा पीर’ की उपाधि दी थी।
  • रुणिचा मेले का मुख्य सांस्कृतिक आकर्षण कामड़ जाति की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला प्रसिद्ध ‘तेरह ताली नृत्य’ है।
  • बाबा रामदेवजी ने पोकरण क्षेत्र में आतंक मचाने वाले ‘भैरव’ नामक राक्षस का वध किया था।
  • बाबा रामदेवजी के पिता का नाम अजमलजी था।
Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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