Rishi Panchami Saptarishi Puja
Worship of Seven Sages on Rishi Panchami

Rishi Panchami 2026: भाद्रपद शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला ऋषि पंचमी पर्व भारतीय धार्मिक परंपरा में ऋषि-मुनियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सप्तऋषियों का पूजन करने से जीवन में हुए जाने-अनजाने दोषों के लिए क्षमा मांगने और आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर मिलता है। महिलाओं के लिए इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।

ऋषि पंचमी के दिन वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भरद्वाज का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इन सात ऋषियों को वैदिक ज्ञान, तपस्या और आध्यात्मिक परंपरा के प्रमुख स्तंभ के रूप में देखा गया है। इनके पूजन के जरिए श्रद्धालु ज्ञान, सदाचार और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की कामना करते हैं।

ऋषियों के शाप से बदल गया जीवन
एक कथा के अनुसार, जब ऋषि भोजन करने पहुंचे तो उन्हें भोजन तैयार करने के दौरान हुई धार्मिक अशुद्धि का पता चल गया। इससे नाराज होकर उन्होंने दंपती को अगले जन्म में पशु योनि में जन्म लेने का शाप दिया। मान्यता के अनुसार, बाद में दोनों अपने पुत्र के घर बैल और कुतिया के रूप में रहने लगे और अपने पिछले कर्मों के कारणों से मुक्ति पाने का उपाय खोजा।

सप्तऋषियों की पूजा से मिली मुक्ति
कथा में बताया गया है कि पुत्र ने ऋषियों से माता-पिता की मुक्ति का उपाय पूछा। तब उसे ऋषि पंचमी के दिन व्रत रखने और सप्तऋषियों की विधि-विधान से पूजा करने का मार्ग बताया गया। पुत्र ने अपनी पत्नी के साथ यह व्रत किया और मान्यता के अनुसार उसके पुण्य के प्रभाव से माता-पिता को पशु योनि से मुक्ति मिली और उन्हें मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ।

सुमति की कथा भी बताती है व्रत का महत्व
ऋषि पंचमी से जुड़ी एक अन्य प्रचलित कथा में विदर्भ के राजा और ब्राह्मण परिवार का उल्लेख मिलता है। ब्राह्मण सुधर्मा की पुत्री सुमति का विवाह कम उम्र में ही विधवा होने के बाद साध्वी जीवन में हो गया। एक समय उसे गंभीर शारीरिक पीड़ा हुई, जिसके कारण उसकी मां उसे एक संत के पास लेकर गई।

पूर्व जन्म के कर्म से जोड़ी गई पीड़ा
कथा के अनुसार, संत ने ध्यान के माध्यम से सुमति की परेशानी का कारण बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व जन्म में रजस्वला अवस्था के दौरान अज्ञानवश रसोई में कार्य करने के कारण उसे धार्मिक दोष का सामना करना पड़ा। इसके समाधान के लिए संत ने ऋषि पंचमी का व्रत करने और सप्तऋषियों की पूजा करने का उपाय बताया।

व्रत और पूजा को माना गया मुक्ति का माध्यम
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऋषि पंचमी के दिन स्नान, व्रत, संयम और सप्तऋषियों के पूजन का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु इस दिन ऋषियों से क्षमा और आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं। मान्यता यह भी है कि विधि-विधान से व्रत करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने दोष दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक आध्यात्मिक भाव मजबूत होता है।

कौन हैं सप्तऋषि?
धार्मिक ग्रंथों में अलग-अलग कालखंडों के अनुसार सप्तऋषियों के अलग-अलग समूहों का उल्लेख मिलता है। ऋषि पंचमी की प्रचलित परंपरा में वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भरद्वाज को सप्तऋषि माना जाता है। इन्हें वैदिक ज्ञान, तप, साधना और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के महत्वपूर्ण वाहक के रूप में सम्मान दिया जाता है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।