धरमजयगढ़। केंद्र सरकार की वीबी-जी राम जी योजना से ग्रामीणों को मजदूरी तो मिलने लगी है मगर इससे जुड़े रोजगार सहायक और अन्य लोगों ने मनरेगा के फर्जी मस्टर रोल की तरह इसमें भी फर्जी लोगों को मजदूर बनाकर सेटिंग करने का तरीका निकाल लिया है। इस तरह के फर्जीवाड़े का खुलासा भी होने लगा है।
जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत पत्थलगांवखुर्द में वीबी-जी राम जी के तहत आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्य को लेकर डिजिटल हाजिरी और जमीनी हकीकत के बीच कथित अंतर ने पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह के समय कुछ लोगों को रोजगार सहायक द्वारा कार्यस्थल पर लाया जाता है। वहां कुछ देर के बाद वे वापस अपने घर लौट जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह प्रक्रिया लगातार देखी जा रही है, जबकि निर्माण स्थल पर कोई भी कार्य होता दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो मामला बेहद गंभीर है।
सुबह आंगनबाड़ी पहुंचकर लौट जाते हैं ग्रामीण
दरअसल यहां वीबी-जी राम जी के तहत श्रमिक की उपस्थिति दर्शाने के लिए कार्यस्थल पर उसका फेस स्कैन किया जा रहा है और उसकी डिजिटल हाजिरी दर्ज की जा रही है। महज डिजिटल प्रक्रिया नहीं, बल्कि वास्तविक कार्य से जुड़ी होनी चाहिए। ऐसे में कार्यस्थल पर कुछ मिनटों के लिए उपस्थिति दर्ज कराने के बाद श्रमिकों के वापस लौटने की बात सवाल खड़े करती है कि आखिर फेस स्कैन किस काम की पुष्टि कर रहा है—वास्तविक श्रम की या केवल कार्यस्थल पर उपस्थिति की?
क्या है ग्रामीणों की शिकायत?
ग्रामीण बताते हैं कि आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कार्य जून के बाद से बंद है और बारिश के मौसम में उन्होंने यहां पर काम होते हुए कभी भी नहीं देखा। आंगनबाड़ी के आसपास के लोगों का माथा तब ठनका जब उन्होंने यहां के रोजगार सहायक को कुछ दिनों से अपने 4-5 रिश्तेदारों के साथ नियमित रूप से आते हुए देखा। इस दौरान रोजगार सहायक इनकी तस्वीरें खींचते हुए नजर आता। आखिरकार लोगों को यह समझ आया कि आंगनबाड़ी में काम होना दर्शाते हुए इन सभी की डिजिटल हाजिरी भरी जा रही है। इस तरह यहां काम नहीं होते हुए भी होना दर्शाया जा रहा है।
काम को लेकर ग्रामीण उठा रहे सवाल
ग्रामीण इस पूरे मामले में सवाल उठा रहे हैं कि यदि संबंधित तिथियों में मस्टर रोल पर श्रमिक उपस्थित हैं, तो उनके द्वारा किए गए कार्य का भौतिक प्रमाण, कार्य की मात्रा और तकनीकी माप भी मौके पर दिखाई देना चाहिए, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक कार्यस्थल पर ऐसा कोई नियमित श्रम दिखाई नहीं देता। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को केवल ऑनलाइन उपस्थिति देखकर संतुष्ट होने के बजाय फेस ऑथेंटिकेशन रिकॉर्ड, मस्टर रोल, जियो-टैग तस्वीरों, माप पुस्तिका और वास्तविक कार्यस्थल का आपसी मिलान करना चाहिए।
फोटोग्राफी के बाद लौट जाते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का दावा है कि सुबह फोटो और फेस स्कैन के बाद लोगों का वापस लौट जाना लगातार देखा जा रहा है। यदि ऐसा है तो यह पता लगाना जरूरी है कि जिन श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज हुई, उन्होंने संबंधित दिन कितने समय तक और कौन-सा वास्तविक कार्य किया। लेकिन सिर्फ डिजिटल रिकॉर्ड में मौजूदगी दर्ज हो जाना यह प्रमाणित नहीं करता कि निर्धारित मजदूरी के अनुरूप वास्तविक श्रम भी हुआ। यही कारण है कि इस मामले में डिजिटल हाजिरी और भौतिक कार्य निष्पादन का सत्यापन सबसे महत्वपूर्ण है।

0 इस तरह हर रोज ऑनलाइन मस्टररोल में हाजिरी दर्शा रहा है रोजगार सहायक
ऑनलाइन देखी जा सकती है हाजिरी
सरकार ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत वास्तविक मजदूरों को लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह के प्रावधान किए हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। कोई भी शासकीय निर्माण कार्य अगर वीबी-जी राम जी के तहत पंजीकृत मजदूरों से कराया जा रहा है तो उनकी हर रोज फेस स्कैन और फोटोग्राफी के जरिए ऑनलाइन हाजिरी लगाई जाती है। इसे कोई भी संबंधित वेबसाईट पर जाकर देख सकता है। इतनी पारदर्शिता होने के बाद भी पंचायत के लोग फर्जी मस्टर तैयार करने में सफल हो रहे हैं। हालांकि इसमें गांव से लेकर जनपद पंचायत तक पूरे तंत्र की मिलीभगत होती है, इसलिए इस तरह की गड़बड़ी कभी सामने नहीं आती।
शिकायत के बाद अलर्ट हुआ रोजगार सहायक
ग्राम पंचायत पत्थलगांवखुर्द में हो रहे इस फर्जीवाड़े की जानकारी मजदूरों के जरिए मीडिया तक पहुंच गई है और रोजगार सहायक को जैसे ही इसके बारे में पता चला वह सतर्क हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक आज वह अपने रिश्तेदारों को लेकर कार्यस्थल पर नहीं पहुंचा है।
बहरहाल मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए संबंधित अवधि के प्रत्येक मस्टर रोल की जांच, फेस स्कैन का रिकॉर्ड, श्रमिकों की उपस्थिति, कार्यस्थल की जियो-टैग तस्वीरें, तकनीकी माप तथा मजदूरी भुगतान का मिलान किया जाना चाहिए। वहीं साथ ही मस्टर रोल में दर्ज श्रमिकों से अलग-अलग पूछताछ कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उन्होंने वास्तव में संबंधित तिथियों में कार्य किया था या केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कार्यस्थल तक पहुंचे थे। वैसे भी निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन की काई लगी दीवारें बता रही हैं कि यहां महीनों से की भी काम नहीं हुआ है, लेकिन पंचायत से जुड़े कर्मचारी, जन प्रतिनिधि और अफसर लीपापोती करने में कितने माहिर होते हैं यह तो सभी को पता है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी रिकॉर्ड की जांच तक सीमित रहते हैं या कार्यस्थल पर पहुंचकर हाजिरी और हकीकत के बीच का सच भी सामने लाते हैं।



