Navratri 2026 Vrat Rules: इस साल शारदीय नवरात्रि व्रत का आरंभ 11 अक्टूबर 2026 से हो रहा है. माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए यह 9 दिन मां दुर्गा की साधना के लिए सबसे अहम माने जाते हैं. देवी भागवत पुराण में नवरात्रि उपवास करने वालों के लिए खान-पान, आचरण और शयन से जुड़े विशेष नियम बताए गए हैं.
ज्योतिषविद् और पंडित राकेश झा के अनुसार, नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का सही तरीके से पालन करना बेहद जरूरी है.
व्रत शुरू करने से पहले संकल्प और खान-पान के नियम
नवरात्रि व्रत की शुरुआत मां दुर्गा का ध्यान करते हुए व्रत के संकल्प के साथ करनी चाहिए. नियमों के अनुसार नवरात्रि के 9 दिनों तक केवल एक समय ही भोजन या फलाहार किया जाता है. कई श्रद्धालु केवल फल खाकर ही यह उपवास रखते हैं. व्रत के दौरान कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, समा के चावल, फल, मेवे, दूध, दही, शकरकंद और आलू का सेवन किया जा सकता है.
किन चीजों के सेवन पर है पूरी तरह पाबंदी?
व्रत के दौरान खान-पान में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना होता है. नवरात्रि उपवास के समय दाल, चावल, गेहूं, प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन और शराब आदि का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है. इसके अलावा व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को भोजन पूरी तरह सात्विक ही ग्रहण करना चाहिए.
बाल, नाखून काटने और दिन में सोने से बचें
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के पावन दिनों में व्रत रखने वाले लोगों को बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए. इसके साथ ही किसी भी व्रत में दिन के समय सोने की सख्त मनाही होती है. व्रत के दौरान व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और मन में किसी के प्रति क्रोध या मनमुटाव लाने से बचना चाहिए. व्रत में झूठ बोलने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है.
दोनों समय पूजन और दुर्गा सप्तशती का पाठ
नवरात्रि के पावन दिनों में हर रोज सुबह और शाम दोनों समय पूरे विधि-विधान के साथ माता रानी का पूजन करना चाहिए और उन्हें भोग लगाना चाहिए. इन 9 दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. श्रद्धा और भक्ति के साथ नियमों का पालन करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.



