PM AWAS SCAM: कोरबा जिले के सांसद आदर्श ग्राम पंचायत तिलकेजा में पीएम आवास योजना में हुए घोटाले की जांच पूरी हो चुकी है और जल्द ही इस मामले में कार्रवाई होने जा रही है। टीआरपी न्यूज के प्रिंट एडिशन ‘द रूरल पोस्ट’ में हमने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद राज्य स्तर पर आवास योजना हो रहे घोटाले की ओर सबकी नजर गड़ गई है। आइए जानते हैं, क्या है यह मामला।

अपात्रों को बना दिया था पात्र 

देशभर में जरूरतमंदों को एक अदद मकान उपलब्ध कराने के लिए पीएम आवास योजना चलाई जा रही है। दरअसल इस योजना के क्रियान्वयन के लिए किसी भी पंचायत की ग्राम सभा में आवेदनों का अवलोकन करते हुए पात्र और अपात्रों की सूची तैयार की जाती है। कोरबा जिले के कोरबा जनपद पंचायत के आदर्श ग्राम पंचायत तिलकेजा में विशेष ग्राम सभा की बैठक 18 जुलाई 2024 को आयोजित की गई थी। इस मौके पर कार्यवाही पंजी प्रारूप 4 में जांच के बाद कुल 214 हितग्राहियों की सूची का वाचन किया गया, जिसमें शासकीय नौकरी, पक्का मकान, अन्यत्र निवास या पूर्व में आवास लाभ लेने के कारण दर्जनों हितग्राहियों को अपात्र घोषित कर दर्ज किया गया था।

अपात्रों में मृतक भी  शामिल

लगभग दो साल बाद ग्राम पंचायत के सरपंच एवं संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा सांठ-गांठ कर दिनांक 14.04.2026 को नई कार्यवाही पंजी तैयार की गई। इस कथित बैठक में दिनांक 18.07.2024 को आधिकारिक रूप से अपात्र घोषित किए गए हितग्राहियों को नियमों को दरकिनार कर पात्र के रूप में दर्ज कर लिया गया, जबकि ऐसा नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों की संख्या 48 बताई जा रही है।

ग्राम पंचायत तिलकेजा में संगठित रूप से किए गए इस भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के हौसले इतने बुलंद थे कि इन्होंने 48 अपात्रों को पात्र बना दिया, जबकि इनमें 11 हितग्राही स्वर्गवासी हो चुके हैं। मजे की बात यह है कि दो साल पहले इन्हें मृत होने के चलते ही अपात्र की सूची में डाला गया था, यह सब कुछ जानते हुए भी फिर से इन्हें पात्र बनाना इनकी नीयत को दर्शाता है।

पैसे निकालने का भी किया जुगाड़

पीएम आवास योजना के तहत हितग्राहियों को ही मकान का निर्माण करना होता है। इसके तहत जनपद पंचायत के जरिये तीन किश्तों में फंड हितग्राही के खाते में ट्रांसफर किया जाता है। सवाल यह उठता है कि अगर हितग्राही की मौत हो जाती है तो उसके नाम पर जारी फंड आखिर किसके खाते में जाएगा। अमूमन इसे संबंधित हितग्राही के नॉमिनी के खाते में भेजा जाता है। चूंकि गलत नीयत से मृतकों को भी पात्र बना दिया गया था, इसलिए प्रथम किश्त की राशि 40 हजार रुपये भेजने के लिए दूसरों के खाते का इस्तेमाल किया गया। चूंकि पूरा तंत्र इसमें शामिल था, इसलिए जनपद पंचायत से ही गलत खातों में रुपये भेजे गए।

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‘सोनी’ का पैसा ‘टंडन’ के खाते में

टीआरपी न्यूज के पास उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करें तो पीएम आवास के मृत हितग्राहियों के पैसे उनके नॉमिनी या परिजनों के खाते में नहीं, बल्कि किसी अन्य के खाते में भेजे गए। तिलकेजा निवासी राम मनोहर सोनी पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर के प्रतिनिधि रहे हैं। उनकी मां स्व. उर्मिला बाई का नाम भी पात्रों में जोड़ दिया गया, जबकि उनकी मौत 2020 में हो गई थी। टीआरपी न्यूज से बात करते हुए राम मनोहर सोनी ने बताया कि उन्होंने जब इसका पता लगाया तो मालूम हुआ कि उनकी मां के नाम की राशि किसी उमेंद बाई टंडन के खाते में ट्रांसफर की गई है।

इसी तरह स्व. जीराबाई गोंड़ के देवर देवसिंह ने बताया कि उनकी भाभी को मृत हुए 10 वर्ष बीत चुके हैं, जबकि उनका नाम पात्रों की सूची में है और उनके नाम की राशि जीराबाई निर्मलकर के खाते में ट्रांसफर की गई है। ऐसा ही सभी 11 मृत हितग्राहियों के साथ किया गया है, जिनके सरनेम देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है। मसलन, स्व. बहोरन निर्मलकर की राशि राजकुमार बंजारे के खाते में, स्व. लक्ष्मण प्रसाद कैवर्त्य की राशि देवनारायण टंडन के खाते में, स्व. रामबाई उरांव की राशि हेमलता जायसवाल के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है।

ग्रामसभा से लेकर जनपद पंचायत की भूमिका संदिग्ध

पीएम आवास योजना का लाभ मूलतः गरीबों को दिया जाता है और इसके लिए पंचायतों में आवेदन जमा किए जाते हैं। जिसके बाद सभी की सूची तैयार कर ग्रामसभा के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। बता दें कि ग्रामसभा में सरपंच-सचिव के अलावा अध्यक्ष की भूमिका में वरिष्ठ ग्रामीण और अन्य सदस्य होते हैं। तिलकेजा की ग्राम सभा में महिला सरपंच तेरस देवमूरत कंवर, सचिव नविता दूबे, ग्रामसभा अध्यक्ष अनुसुइया कंवर एवं अन्य लोग शामिल हैं। आलम यह है कि सरपंच तेरस देवमूरत कंवर का पति पंचायत का सारा कामकाज देखता है। देवमूरत ने इस मामले में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया, वहीं ग्राम सभा अध्यक्ष अनुसूइया कंवर का कहना है कि सभा के सारे रजिस्टर सरपंच का पति अपने पास रखता है, जिस ग्राम सभा में आवास योजना की सूची स्वीकृत हुई, उस बैठक में वो थी ही नहीं और प्रस्ताव पर उसके हस्ताक्षर ही नहीं हैं।

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पीएम आवास योजना के हितग्राहियों की विधिवत स्वीकृति और फंड भेजने का काम कोरबा जनपद पंचायत कार्यालय से किया गया। इस योजना की निगरानी के लिए ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और आवास मित्र होते हैं, वहीं फंड ट्रांसफर करने का काम कार्यालय का कंप्यूटर ऑपरेटर करता है। मृतकों के नाम के रुपये जिनके खातों में ट्रांसफर किए गए, उनके नाम देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे कोई और हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों ने पैसे ट्रांसफर किए, जिससे उनकी भूमिका भी संदिग्ध हो जाती है। बता दें कि तिलकेजा में पदस्थ सचिव नविता दूबे पूर्व में भी अनियमितता के चलते निलंबित हो चुकी है। वहीं इस मामले में तिलकेजा के रहने वाले एक जनपद सदस्य का नाम भी आ रहा है, जिसके 3 रिश्तेदारों का नाम अपात्र से पात्र की सूची में डाला गया है।

जांच पूरी, अब कार्रवाई की बारी

सांसद आदर्श ग्राम पंचायत तिलकेजा में हुए आवास घोटाले की पूर्व जनपद सदस्य शकुंतला केवर्त और RTI कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। जिसके बाद जिला पंचायत कोरबा के सीईओ आईएएस प्रतीक जैन ने जिला स्तरीय जांच टीम गठित की। प्रतीक जैन ने टीआरपी न्यूज से हुई बातचीत में बताया कि जांच रिपोर्ट मिल चुकी है और वे जल्द ही इस मामले में कार्रवाई का आदेश जारी करेंगे।

और भी पंचायतों में हुए हैं ऐसे ही घोटाले

जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने बताया कि तिलकेजा में सर्वाधिक 48 अपात्रों को पात्र बनाकर घोटाला किया गया, इनमें लगभग दर्जन भर मृत हितग्राही भी शामिल हैं। तिलकेजा के अलावा अन्य कई गांवों में भी दर्जन भर भी अधिक अपात्रों को आवास स्वीकृत किए गए हैं। इन मामलों में भी जल्द कार्रवाई होगी।

शातिराना तरीके से किया घोटाला

ग्राम पंचायत तिलकेजा में पीएम आवास में फर्जीवाड़ा करने वालों ने जो तरीका अपनाया उसे जान कर जांच टीम का भी माथा घूम गया। मामले की जांच के दौरान पता चला कि मृतकों के अलावा अन्य कई अपात्र हितग्राहियों को बताए बिना ही उनके नाम जोड़े गए। यहां तक तो ठीक है, इन तथाकथित हितग्राहियों के स्थान पर जिन ग्रामीणों का नाम उनके खातों में भुगतान के लिए जोड़ा गया उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। यह भी पता चला है कि ऐसे लोग गांव में नहीं बल्कि आसपास के इलाकों में रहते हैं। इनकी पूरी जानकारी एकत्र कर इनके खातों में पहली किस्त भेजी गई।

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त्रुटि बताकर रुपए मांगे गए 

जांच में कुछ हितग्राही और खाताधारक मिले, जिनके बयान लिए गए। खाताधारकों ने बताया कि खाते में रुपए आने के बाद उनके पास आकर कहा गया कि गलती से उनके खाते में रुपए चले गए हैं, उन्हें वापस कीजिए। पता चला है कि ऐसा तरीका अपनाकर कुछ लोगों से रुपए झटक लिए गए हैं। 

दस्तावेज गायब, जांच में सहयोग नहीं कर रहे जिम्मेदार

अफसर ने बताया कि पीएम आवास योजना की जिनके ऊपर जिम्मेदारी है वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। वहीं पंचायत से अपात्रों को पात्र बनाने और उनसे संबंधित दस्तावेज भी गायब कर दिए गए हैं। इससे जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। 

ब्लॉक कोऑर्डिनेटर हुआ भूमिगत

ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पीएम आवास योजना की महत्वपूर्ण कड़ी होता है, पता चला है कि उसने तुम के समक्ष अपना बयान रखा और फिर नदारद हो गया है। फिलहाल उसका कुछ भी पता नहीं चल रहा है।

जल्द ही जारी होंगे आदेश

इस मामले में सीईओ प्रतीक जैन ने बताया कि प्राथमिक जांच रिपोर्ट आ चुकी है और दोषियों पर जल्द ही कार्रवाई होगी। इसके अलावा मामले की गहनता से जांच के बाद संबंधितों के खिलाफ पुलिस में भी एफआईआर दर्ज कराया जाएगा।

बहरहाल इस बड़े घोटाले में जल्द ही कार्रवाई होगी। माना जा रहा है कि सबसे पहले पीएम आवास योजना के ब्लॉक कॉर्डिनेटर के साथ ही सरपंच सचिव पर गाज गिरेगी, जिसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।

FAQ: पीएम आवास घोटाला

सवाल: घोटाला कहां हुआ?

कोरबा जनपद पंचायत की सांसद आदर्श ग्राम पंचायत तिलकेजा में।

सवाल: कितने अपात्रों को पात्र बनाया गया?

48 अपात्रों को, जिसमें 11 मृत हितग्राही भी शामिल हैं।

सवाल: पैसे कहां गए?

मृतकों के नाम की 40 हजार की पहली किश्त दूसरों के खातों में ट्रांसफर की गई। जैसे उर्मिला सोनी का पैसा उमेंद टंडन के खाते में।

सवाल: जांच की स्थिति क्या है?

जिला पंचायत CEO प्रतीक जैन के अनुसार जांच रिपोर्ट आ चुकी है, जल्द कार्रवाई और FIR होगी।