नई दिल्ली। कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की तमाम कवायद, तमाम नेताओं की मान-मनौव्वल कुछ भी काम नहीं आया। आखिरकार राहुल गांधी ने एआईसीसी का अध्यक्ष पद छोड़ दिया। इसके बाद अब उम्मीद लगाई जा रही है कि मोतीलाल वोरा(Motilal Vora) को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष(intrim President) बनाया जा सकता है। मोतीलाल वोरा इस वक्त 90 वर्ष के हैं। कभी पत्रकार और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके मोतीलाल वोरा कांग्रेस परिवार के विश्वासपात्र व्यक्तियों में गिने जाते हैं। कभी राजीव गांधी, पीवी नरसिंम्हा राव के बाद वे सोनिया गांधी के उतने ही विश्वासपात्र हैं। ऐसे में सियासी गलियारों के जानकार उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अब मोतीलाल वोरा को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाया जाएगा।
कांग्रेस नहीं लेती किसी का भी एहसान:
अखिल भारतीय कांग्रेस की यह शुरू से ही नीति रही है कि वो किसी का भी एहसान नहीं लेती। अंत तक व्यक्ति को किसी न किसी सम्मानित पद पर बैठाकर उसके एहसानों का हिसाब-किताब कर देती है। इसके एक नहीं तमाम उदाहरण हैं। हाल का उदाहरण प्रणब मुखर्जी का रहा। उन्होंने लंबे अरसे तक पार्टी की सेवा की। तो जाते-जाते उनको राष्टÑपति बनवा दिया। ऐसा ही हाल कुछ पीवी नरसिम्हाराव और मनमोहन सिंह के साथ भी रहा।
बन चुके थे मुख्यमंत्री और मांग रहे थे मिनिस्टर का पद:
मोतीलाल वोरा का वो किस्सा भी काफी रोचक है जब उनको राजीव गांधी ने मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया था और वे अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह से खुद को मंत्री बनवाने के लिए सिफारिश में लगे हुए थे। दरअसल 9 मार्च, 1985. अर्जुन सिंह ने अपने नेतृत्व में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद दोबारा मुख्यमंत्री-पद की शपथ ली। 10 मार्च. अर्जुन मंत्रिमंडल की सूची कांग्रेस हाईकमान से मंजूर करवाने के लिए दिल्ली गए। पर प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें पंजाब का गवर्नर बनने का आदेश दिया। जाते-जाते ये जरूर कहा कि अपनी पसंद के मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का नाम बता दो उसके बाद 14 मार्च को पंजाब चले जाओ।

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अर्जुन सिंह को जब पता चला कि वो पंजाब के राज्यपाल बन गए हैं, तो उन्होंने तुरंत ही अपने बेटे अजय सिंह को फोन किया और मोतीलाल वोरा को दिल्ली लेकर आने को कहा।
अर्जुन सिंह कमरे से बाहर निकले और जिस जहाज से आए थे, उसको तुरंत भोपाल वापस भेजा। बेटे अजय सिंह को फोन किया, तुरंत वोरा को दिल्ली लाने के आदेश दिए। इसी विमान में मोतीलाल वोरा अजय से खुद को कैबिनेट मंत्री का पद दिलाने की सिफारिश कर रहे थे। पर उन्हें क्या पता था कि वो यहां मंत्री पद के लिए लगे हैं, वहां दिल्ली में मुख्यमंत्री का पद उनका इंतजार कर रहा है। एयरपोर्ट से वोरा सीधे मध्यप्रदेश भवन पहुंचे। वहां अर्जुन सिंह, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह उनका इंतजार कर रहे थे। खाना- खाने के बाद चारों फिर रवाना हुए पालम हवाई अड्डे। वहां राजीव गांधी रूस की यात्रा पर जाने को तैयार बैठे थे। राजीव ने वोरा को पास बुलाया. और बोले कि आप अब मुख्यमंत्री हैं। मोतीलाल वोरा अर्जुन सिंह के भी काफी विश्वासपात्र थे।
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