0 रायपुर में केवल लाखे नगर में ही अस्थाई पटाखा मार्केट स्वीकृत
0 सेटिंग करके अवैध पटाखा दुकान चला रहे हैं व्यावसायी
रायपुर। दीपावली के त्योहार के मौके पटाखों का करोड़ों का व्यापार होता है। ऐसे में बड़ी संख्या में व्यावसायी शहरों के अस्थाई पटाखा मार्केट में दुकान खोलने के लिए हर वर्ष अस्थाई लाइसेंस प्रशासन से लेते हैं। प्रशासन द्वारा इनके लिए एक स्थान निर्धारित कर दिया जाता है जहां कारोबारी अस्थाई दुकानें बनाकर पटाखे बेचते हैं लेकिन इन्हें सबसे ज्यादा नुकसान उन कारोबारियों से होता है जो बिना अनुमति के कहीं भी पटाखे बेच रहे हैं। पुलिस और जिम्मेदार अमले की इस पर नजर होने के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जिससे साफ नजर आता है कि सब कुछ सेटिंग से चल रहा है।
गली मोहल्लों में धड़ल्ले से बिक रहा पटाखा
राजधानी ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी दीपावली से पखवाड़े भर पहले से बच्चे और युवा गली मोहल्लों में पटाखे फोड़ते नजर आ रहे हैं। इन्हें आखिर पटाखा कहां से मिल रहा है? इस संबंध में पूछे जाने पर बच्चे बताते हैं कि मुहल्ले की दुकान में ही पटाखा बिक रहा है।
सड़क पर भी खुलेआम लगती है दुकान
हर वर्ष इस तरह की अवैध दुकानों से नुकसान झेल रहे पटाखा व्यावसायी बताते हैं कि राजधानी रायपुर के अनेक स्थानों पर लोग सड़क किनारे पटाखे की दुकान चला रहे हैं, ये सभी बिना लाइसेंस के सेटिंग करके दुकान चला रहे हैं। इनमें से अगर किसी के पास अस्थाई लाइसेंस हो भी तो उन्हें केवल नगर निगम द्वारा निर्धारित अस्थाई पटाखा मार्केट में ही दुकान चलाने का अधिकार होता है। ऐसे कई दुकान शहर भर में नजर आ जाएंगे। बता दें कि प्रशासन ने रायपुर में केवल लाखे नगर में ही अस्थाई पटाखा मार्केट की अनुमति दी है।
बांस और कपड़े की दुकानों पर प्रतिबंध
अब बात पटाखा मार्केट की, जिसके लिए जारी एडवाइजरी में सबसे अहम निर्देश यह है कि पटाखा दुकानों का निर्माण बांस, बल्ली या कपड़े से नहीं किया जाएगा। इनकी जगह दुकानों को अज्वलनशील सामग्री (टिन शेड) से बनाना अनिवार्य होगा। यह बदलाव आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए किया गया है। बांस और कपड़े आग को तुरंत पकड़ लेते हैं, इसलिए दुकानों को केवल टिन शेड से ही तैयार किया जा सकेगा। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाी भी की जाएगी।
बांस-बल्लियों से बन रही दुकानें, दूरी भी पर्याप्त नहीं
राजधानी सहित अन्य शहरों में गाइडलाइन जारी करने के बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। पटाखे की बन रही दुकानों में बांस-बल्लियों का उपयोग किया जा रहा है। दुकानों में पर्याप्त दूरी का भी पालन नहीं किया जा रहा है। पटाखा दुकान बनाने को लेकर नियमों की अनदेखी की जा रही है। पुलिस और जिला प्रशासन की गाइडलाइन का भी कोई असर ग्राउंड पर नजर नहीं आ रहा है।
वहीं इस संबंध में व्यवसायियों का कहना है कि उन्हें गाइडलाइन देर से जारी किया गया जबकि दुकानें पहले से बनानी शुरू कर दी गई थीं। इन कारोबारियों ने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से पटाखा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि शहर के बीच कोई अनहोनी न हो और निर्धारित स्थल पर दुकानें चलाने वाले को कोई नुकसान भी न हो।
ग्रीन पटाखों की बिक्री करें
पुलिस प्रशासन ने यह भी निर्देश दिए कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही ग्रीन पटाखों की बिक्री की जाए। दुकानदारों से आग्रह किया गया है कि वे अपने थाने और पुलिस नियंत्रण कक्ष के संपर्क नंबर सुरक्षित रखें। किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 112 पर तुरंत सूचना दें।
गुणवत्ता वाले पटाखे खरीदें, सुरक्षित स्थान पर जलाएं
एसडीआरएफ ने नागरिकों को भी सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदने और गुणवत्ता वाले, प्रमाणित उत्पादों का चयन करने की सलाह दी गई है। पटाखे हमेशा खुले मैदान, पार्क या बड़े खुले स्थानों पर जलाएं और घर के अंदर, खिड़कियों के पास या बंद जगहों पर कभी न जलाएं। इसके साथ ही पटाखे जलाते समय सूती वस्त्र पहनें, क्योंकि सिंथेटिक कपड़े तुरंत आग पकड़ लेते हैं। ढीले या लटकने वाले कपड़े पहनने से बचें। ज्वलनशील वस्तुओं जैसे सूखी पत्तियां, गैस सिलेंडर या वाहन के पास पटाखों का उपयोग न करें। यदि कोई पटाखा नहीं जलता, तो उसे दोबारा जलाने की कोशिश न करें।



