रायपुर। रायपुर तहसील कार्यालय के भीतर बीती रात कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धरना दे दिया और जमकर हंगामा किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि तहसील के कर्मचारियों ने एक साथ 5 सौ एसआईआर फार्म भाजपा के नेताओं को उपलब्ध करा दिया है। हंगामे के बाद पुलिस वहां पहुंची। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता प्रशासन और पुलिस तथा भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। आखिरकार सभी को यहां से उठाकर हिरासत में लिया गया और सेंट्रल जेल पहुंचाया गया। यहां इनसे मिलने के लिए पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज भी पहुंचे।

यह प्रदर्शन शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन की अगुवाई में हुआ, जहां कांग्रेस कार्यकर्ता तहसील कार्यालय में धरने पर बैठ गए। इस दौरान तहसीलदार ने सफाई दी कि किसी को अतिरिक्त फार्म नहीं दिया गया है। बावजूद इसके वो नहीं माने। बाद में रात 10 बजे पुलिस वहां पहुंची, और हंगामा कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इन सभी को सेंट्रल जेल पहुंचाया गया।

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पुलिस से जमकर हुई झड़प

प्रदर्शन के दौरान जब प्रशासन और पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हटाने की कोशिश की तो दोनों पक्षों के बीच झूमा-झपटी शुरू हो गई। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और हालात तनावपूर्ण हो गए। काफी देर तक समझाइश देने के बावजूद जब कांग्रेस कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को उठाकर दफ्तर से बाहर निकालना शुरू किया और सभी को हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शन करने वालों में श्रीकुमार मेनन के अलावा पप्पू बंजारे, पंकज शर्मा, युवा कांग्रेस अध्यक्ष आकाश शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। इन सभी से मिलने के लिए प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज भी पहुंचे और और गिरफ्तार नेताओं से मुलाकात कर इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया।

बैज ने सरकार पर साधा निशाना

रात करीब 10 बजे PCC अध्यक्ष दीपक बैज खुद सेंट्रल जेल पहुंचे और गिरफ्तार नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि SIR की आड़ में गरीब, आदिवासी, ग्रामीण और कमजोर वर्ग के मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश की जा रही है। दीपक बैज ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा कि कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी।

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सैकड़ों फॉर्म एक साथ स्वीकार करने पर उठा बड़ा सवाल

कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा की ओर से लाए गए करीब 400 दावा-आपत्ति फॉर्म एक साथ स्वीकार कर लिए गए, जबकि नियमों के मुताबिक एक समय में सिर्फ 30 से 50 फॉर्म ही लिए जा सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह खुला प्रशासनिक पक्षपात है और इससे पूरी SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कांग्रेस ने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग

इससे पूर्व कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर SIR में दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की। कांग्रेस ने तर्क दिया कि ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ इलाकों में रहने वाले नागरिकों को दस्तावेज जुटाने और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। यदि समय-सीमा नहीं बढ़ाई गई तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपने वोटिंग अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

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