हाईकोर्ट भवन के सामने न्याय का हथौड़ा और सरकारी भर्ती परीक्षा रद्द होने की खबर का दृश्यांकन
हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 के परिणाम निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी के रिटायरमेंट के एक साल पहले या फिर बाद में गलत तरीके से इंक्रीमेंट और अधिक वेतन भुगतान का हवाला देकर वसूली नहीं कर सकते। कोर्ट ने संभागीय संयुक्त संचालक, कोष-लेखा एवं पेंशन द्वारा जारी रिकवरी आदेश को रद्द करते हुए वसूल की गई राशि याचिकाकर्ता कर्मचारी को लौटाने का आदेश दिया है।

जानें, क्या है मामला…

रतन बहादुर दूसरी बटालियन, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, सकरी में आरक्षक (कॉस्टेबल) ट्रेड के पद पर पदस्थ थे। 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया। सेवानिवृत्ति के डेढ़ महीने बाद संभागीय संयुक्त संचालक, कोष-लेखा एवं पेंशन, बिलासपुर ने उनकी सेवाकाल के दौरान गलत तरीके से वेतनवृद्धि जोड़कर अधिक वेतन भुगतान किये जाने का हवाला देते हुए रिकवरी आदेश जारी कर दिया।

संभागीय संयुक्त संचालक, कोष-लेखा एवं पेंशन द्वारा जारी रिकवरी आदेश को चुनौती देते हुए रतन बहादुर ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं ऋषभदेव साहू के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर की। रिट याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने सिंगल बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट ऑफ पंजाब विरूद्ध रफीक मसीह (2015), थॉमस डेनियल विरूद्ध स्टेट ऑफ केरला (2022), जोगेश्वर साहू विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया (2025) एवं भगवान शुक्ला विरूद्ध यूनियन ऑफ इंडिया के मामलों में दिए गए फैसले का हवाला दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों की सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा है, किसी भी शासकीय अधिकारी, कर्मचारी के सेवानिवृति के एक साल पहले या सेवानिवृति के बाद संबंधित शासकीय अधिकारी, कर्मचारी को पूर्व के सेवाकाल के दौरान गलत तरीके से वेतनवृद्धि तय करने और अधिक वेतन का भुगतान करने का हवाला देकर सेवानिवृति देयक से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है, इस तरह की वसूली तृतीय श्रेणी कर्मचारी से भी नहीं की जा सकती।

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अफसर ने की सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने कोर्ट को बताया, याचिकाकर्ता कांस्टेबल ट्रेड के पद पर पदस्थ थे, यह तृतीय श्रेणी का पद है। याचिकाकर्ता के रिटायरमेंट के डेढ़ महीने बाद रिकवरी नोटिस जारी किया है, संभागीय संयुक्त संचालक, कोष-लेखा एवं पेंशन ने रिकवरी नोटिस जारी कर, सीधेतौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवहेलना किया है। इस मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने संभागीय संयुक्त संचालक, कोष-लेखा एवं पेंशन द्वारा जारी रिकवरी आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है, याचिकाकर्ता से वसूली की गई राशि तत्काल याचिकाकर्ता को लौटाएं।