नई दिल्ली। दुनिया भर में फैले कोरोना महामारी के भयंकर त्रासदी को लोग अभी तक भूल नहीं पाए हैं। कोरोना महामारी के कारण अब तक लाखों लोगों की जान चली गई है और यह सिलसिला अब भी जारी है। नए स्वरुप में बदलते कोरोना के वेरिएन्ट मंकीपाॅक्स का कहर जारी है। नए वेरिएन्ट के काऱण संक्रमण से बचाव के लिए टीके विकसित करने में लगे विशेषज्ञों के लिए भी चुनौती बन कर सामने आने लगी है। ऐसे में एक और नई आफत के रूप में केरल के वायनाड जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर ने एक और समस्या खड़ी कर दी है।

बता दें कि इससे पहले बरेली जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का पहला मामला सामने आया है। इसके बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पत्र भेजकर अलर्ट जारी करने के लिए कहा है। आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक डॉक्टर के. पी. सिंह ने वीरवार को बताया कि देश के मिजोरम, त्रिपुरा और असम के बाद अब बरेली में भी अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का मामला सामने आया है।

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उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व बरेली जिले के नवाबगंज तहसील के भड़सर डांडिया गांव निवासी पशु पालक अनिल कुमार के सुअर को तेज बुखार आया था और कुछ दिन बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। कुमार ने मृत सुअर का नमूना जांच के लिये आईवीआरआई भेजा था। डॉ.सिंह ने बताया कि आज नमूने की जांच में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया कि इसके बाद आईवीआरआई की तरफ से मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को भी पत्र भेजकर अलर्ट और परामर्श जारी करने के लिए कहा गया है।

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आइवीआरआई की तरफ से गांव में एक टीम भेजने का फैसला लिया गया है, जो अन्य सुअरों में संक्रमण की जांच करेगी। इसके साथ ही पशुपालकों को जानवरों में ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत उन्हें अन्य से अलग करने की सलाह देगी। उन्होंने बताया कि जिस इलाके में संक्रमण की पुष्टि होती है, उसके एक किलोमीटर के दायरे को संक्रमित जोन घोषित कर दिया जाता है। हालांकि, इस संक्रमण से इंसानों को खतरा नहीं है। लेकिन अस्वस्थ सुअर के संपर्क में आने वाले पशुपालकों या कर्मचारियों से संक्रमण दूसरे पशुओं में फैल सकता है।

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