टीआरपी डेस्क। पश्चिम बंगाल में अब सुबह-सवेरे या देर रात बजने वाले लाउडस्पीकरों के शोर से जनता को राहत मिलने वाली है। मुख्यमंत्री सुवेंदु ने एक अहम बैठक में पुलिस को साफ कर दिया है कि शोर चाहे मंदिर से हो या मस्जिद से, तय सीमा से बाहर आवाज नहीं जानी चाहिए। खास बात यह है कि सीएम ने इसके लिए लाठी उठाने के बजाय हाथ जोड़ने और बातचीत का रास्ता अपनाने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि हर किसी को अपनी आस्था और धर्म को मानने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दूसरे की नींद खराब हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे धार्मिक स्थलों के संचालकों से मिलें और उन्हें समझाएं कि माइक की आवाज परिसर के अंदर ही रहे। सीएम ने बैठक में कहा, छात्रों की पढ़ाई और बुजुर्गों की सेहत का ख्याल रखना जरूरी है। रोजाना का शोर लोगों को परेशान करता है।

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त्योहारों पर मिलेगी छूट

सरकार ने साफ किया है कि यह नियम आम दिनों के लिए है। जब दुर्गा पूजा, ईद या किसी और समुदाय का कोई बड़ा त्योहार आएगा, तो प्रशासन का नजरिया अलग होगा। उन विशेष मौकों पर नियमों में ढील दी जाएगी। लेकिन रोज-रोज होने वाले तेज प्रसारण पर अब कड़ी निगरानी रखी जाएगी। पुलिस को हिदायत दी गई है कि किसी भी कीमत पर तनाव या टकराव की स्थिति पैदा न हो।

पुलिस का नया सॉफ्ट एक्शन प्लान

बंगाल पुलिस अब इस मुद्दे पर कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए काम करेगी। सूत्रों के मुताबिक इलाके के थानेदार मंदिर-मस्जिद की कमेटियों के साथ मीटिंग करेंगे। साउंड लिमिट चेक करने वाले मीटरों का इस्तेमाल किया जाएगा। जबरदस्ती या बल प्रयोग पर पूरी तरह से रोक रहेगी। शिकायत मिलने पर पुलिस पहले समझाइश देगी, फिर भी न मानने पर ही नियम के तहत कार्यवाही होगी।

क्यों पड़ी इस आदेश की जरूरत?

दरअसल, कोलकाता समेत बंगाल के कई बड़े शहरों और कस्बों से लगातार शिकायतें आ रही थीं। लोग सुबह की नींद और रात के सुकून को लेकर परेशान थे। ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सरकार ने यह बीच का रास्ता निकाला है। मुख्यमंत्री का मानना है कि आपसी सहयोग से ही इस संवेदनशील मुद्दे का हल निकाला जा सकता है।

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