जगदलपुर। मानसून में बस्तर के शिक्षकों का समर्पण और सरकारी व्यवस्था की खामी दोनों एक साथ सामने आ गई। कोयलीबेड़ा विकासखंड में 24 शिक्षक रोजाना उफनती कोटरी नदी को छोटी डोंगी के सहारे पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं। न पुल है, न लाइफ जैकेट।
और इसी जोखिम भरे सफर के बीच उन पर VSK ऐप में ऑनलाइन हाजिरी का दबाव भी है। एक शिक्षक का वायरल वीडियो अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। PCC चीफ दीपक बैज ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेर लिया है।

क्या है वायरल वीडियो में ?
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में शिक्षक डोंगी में बैठकर उफनती नदी पार कर रहे हैं। एक शिक्षक कहते सुनाई दे रहे हैं,
“देख लो यार… अब बताओ VSK ऐप में अटेंडेंस कैसे लगाएं? हमारी परेशानी भी समझो।”
दूसरे शिक्षक की आवाज आती है “बहुत बाढ़ है सर… डर लग रहा है।”
इस 30 सेकंड के वीडियो ने बस्तर के दुर्गम इलाकों में शिक्षा की हकीकत सबके सामने रख दी।

0 टीचर को खुद ही चलाना पड़ता है नाव का चप्पू
रोज 2 घंटे पहले निकलते हैं, 3 बार साधन बदलते हैं
प्राथमिक शाला कोपिनगुंडा के सहायक शिक्षक इमरान खान बताते हैं कि उनका सफर किसी परीक्षा से कम नहीं।
1. पहले 3-4 किमी बाइक से नदी तक
2. फिर डोंगी से नदी पार
3. दूसरी ओर 3-4 किमी पैदल चलकर फिर बाइक
4. अंत में 2-3 किमी स्कूल
मिडिल स्कूल कंदाड़ी के शिक्षक राजेश खरे कहते हैं, “बरसात में ये भरोसा नहीं रहता कि शाम को घर सुरक्षित लौट पाएंगे या नहीं।”
प्राथमिक शाला बांगो कोडिया की शिक्षिका श्यामा ठाकुर ने कहा, “4 महीने पूरा इलाका कट जाता है। पुल बनने तक लाइफ जैकेट और सुरक्षित नाव की व्यवस्था की जाए।”
बस्तर के 200 स्कूल मानसून में कट जाते हैं
छत्तीसगढ़ में मानसून पूरे शबाब पर है। नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर, सुकमा में करीब 200 स्कूल ऐसे हैं जहां बारिश में पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट जाता है और मोबाइल नेटवर्क भी गायब हो जाता है।
इसी वजह से VSK ऐप में समय पर ऑनलाइन हाजिरी नहीं लग पाती और शिक्षकों को वेतन कटने का डर सताता रहता है।
शिक्षा विभाग का क्या कहना है
वीडियो वायरल होने के बाद बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक एच.आर. सोम ने कहा कि मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जाएगी। दुर्गम क्षेत्रों में ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर व्यावहारिक समाधान तलाशा जाएगा।
दीपक बैज ने सरकार पर बोला हमला
इस वीडियो को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज* ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
“डबल इंजन के दावों की हकीकत देखिए! शिक्षक जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकार को सिर्फ ऑनलाइन अटेंडेंस की चिंता है। पहले व्यवस्था दीजिए, फिर जवाबदेही मांगिए।”
शिक्षकों की 3 बड़ी मांगें
1. पुल का निर्माण: कोटरी नदी पर पक्का पुल बने ताकि जान का खतरा न रहे
2. सुरक्षा उपकरण: लाइफ जैकेट और सुरक्षित नाव की व्यवस्था हो
3. ऑनलाइन हाजिरी में छूट: नेटवर्क न होने वाले इलाकों में वैकल्पिक हाजिरी सिस्टम
FAQ: बस्तर शिक्षक डोंगी वाला मामला
सवाल 1. कहां के शिक्षक डोंगी से नदी पार कर रहे हैं ?
कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड के 24 शिक्षक कोटरी नदी को डोंगी से पार कर अबूझमाड़ क्षेत्र के स्कूलों में जाते हैं।
सवाल 2. ऑनलाइन हाजिरी की क्या समस्या है ?
दुर्गम इलाकों में नेटवर्क नहीं मिलता। इसलिए VSK ऐप में समय पर अटेंडेंस नहीं लग पाती। शिक्षकों को वेतन कटने का डर है।
सवाल 3. दीपक बैज ने क्या कहा ?
उन्होंने कहा सरकार को पहले *पुल, नेटवर्क, सुरक्षा* जैसी व्यवस्था देनी चाहिए, फिर ऑनलाइन हाजिरी की जवाबदेही तय करनी चाहिए।
सवाल 4. कितने स्कूल प्रभावित हैं ?
बस्तर संभाग के 4 जिलों में करीब 200 स्कूल ऐसे हैं जहां बरसात में पहुंचना मुश्किल होता है।


