रायपुर/सारंगढ़/कोरबा। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में जिलों के हिसाब से अलग-अलग नियम चल रहे हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 3 साल से गैरहाजिर प्रधान पाठक को बर्खास्त कर दिया गया, वहीं कोरबा में 11 साल से गायब रहे भृत्य को DEO ने खुद ज्वाइनिंग दे दी।
एक ही तरह के मामलों में पूरी तरह उलट कार्रवाई से विभाग के अफसरों का मनमाना रवैया और नियमों की अनदेखी साफ दिख रही है।
मामला 1: सारंगढ़-बिलाईगढ़ – 3 साल गायब प्रधान पाठक बर्खास्त
शासकीय प्राथमिक शाला बेंदरापारा के प्रधान पाठक आत्माराम चौहान को लगातार तीन वर्षों तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के मामले में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
यह कार्रवाई कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के निर्देशन और लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर के निर्देशों के तहत की गई। जिला शिक्षा अधिकारी जे.आर. डहरिया द्वारा कराई गई विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि हुई।
नोटिस के बाद भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित प्रधान पाठक बिना अनुमति लंबे समय से अनुपस्थित थे, जिससे स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद भी उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद नियमानुसार उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। DEO ने कहा है कि शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर आगे भी कठोर कार्रवाई होगी।
मामला 2: कोरबा – 11 साल गायब भृत्य को DEO ने दी ज्वाइनिंग
दूसरा मामला कोरबा जिले का है जहां सालों से लापता रहे एक कर्मचारी को ज्वाइनिंग दे दी गई। अब इस मामले की शिकायत डीपीआई से की गई है
11 साल तक बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहे भृत्य रायसिंह को कोरबा जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) तामेश्वर उपाध्याय के आदेश पर दोबारा कार्यभार ग्रहण कराने का मामला विवादों में आ गया है। दरअसल, तीन वर्ष से अधिक समय तक लगातार अनुपस्थित रहने वाले शासकीय कर्मचारी को दोबारा सेवा में लेने का अधिकार डीईओ को नहीं है।
DEO ने क्या किया ?
नियम के मुताबिक राज्यपाल के आदेश से ही दोबारा सेवा में रखा जा सकता है, लेकिन कोरबा डीईओ ने स्वयं आदेश जारी कर कर्मचारी को जॉइन करा दिया। मामले की शिकायत डीपीआई, शिक्षा विभाग पहुंची है। इसमें वित्त विभाग के स्थायी वित्त निर्देशों का उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुदुरमाल में पदस्थ भृत्य रायसिंह जगत 22 नवंबर 2014 से बिना सूचना के अनुपस्थित थे। करीब 11 वर्ष बाद उन्होंने 3 सितंबर 2025 को कार्यभार ग्रहण करने के लिए आवेदन दिया। अनुपस्थित रहने का कारण स्वास्थ्य बताया गया था। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 26 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर उन्हें पुनः कर्तव्य पर उपस्थित होने की अनुमति दे दी।
प्रभारियों के भरोसे शिक्षा विभाग
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग के अधिकांश जिले प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं। आरोप है कि नोटों के बल पर सीनियर और पात्र लोगो से कुर्सी हथियाने वाले ये अफसर ऊटपटांग फैसले ले रहे हैं। सारंगढ़ में 3 साल की गैरहाजिरी पर बर्खास्तगी और कोरबा में 11 साल की गैरहाजिरी पर ज्वाइनिंग। एक ही नियम के दो अलग मतलब से शिक्षकों और कर्मचारियों में नाराजगी है।
बता दें कि हाल ही में बिलासपुर जिले में जूनियर को डीईओ बनाए जाने के खिलाफ सीनियर ने हाई कोर्ट की शरण ली और आखिरकार कोर्ट के आदेश से नए नवेले डीईओ को हटाना पड़ गया। कोरबा सहित अन्य अधिकांश जिलों में भी सीनियर होने के बावजूद जूनियरों को डीईओ की कुर्सी पर बैठा दिया गया है, जो मनमाने तरीके से नियम विरुद्ध जाकर फैसले कर रहे हैं।
FAQ: शिक्षा विभाग के दो अलग फैसले
सवाल 1. सारंगढ़ में किसे बर्खास्त किया गया ?
प्राथमिक शाला बेंदरापारा के प्रधान पाठक आत्माराम चौहान को 3 साल बिना अनुमति गायब रहने पर बर्खास्त किया गया।
सवाल 2. कोरबा में क्या हुआ ?
भृत्य रायसिंह जगत जो 2014 से गायब थे, उन्हें 11 साल बाद DEO तामेश्वर उपाध्याय ने खुद ज्वाइन करा दिया।
सवाल 3. नियम क्या कहता है ?
3 साल से ज्यादा अनुपस्थित कर्मचारी को DEO ज्वाइन नहीं करा सकता। इसके लिए राज्यपाल की मंजूरी जरूरी है।
सवाल 4. अब आगे क्या होगा ?
कोरबा मामले की शिकायत DPI को भेजी गई है। नियम विरुद्ध ज्वाइनिंग पर विभागीय जांच हो सकती है।
सवाल 5. विभाग का रुख क्या है ?
DEO सारंगढ़ ने सख्ती की बात कही है। विभाग ने कहा है कि लापरवाही पर कार्रवाई जारी रहेगी।


