ai-jobs-solution: बीजिंग। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विस्तार दुनिया भर में तेजी से हो रहा है। चीन में इसका असर अब रोजगार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ड्राइवरलेस टैक्सी से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक कई क्षेत्रों में AI इंसानों की जगह ले रहा है। इससे लाखों कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट गहराने लगा है और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
ड्राइवरलेस टैक्सी से प्रभावित हुई आमदनी
चीन के वुहान शहर में वर्ष 2022 से टेक कंपनी बाइडू की AI आधारित Apollo Go ड्राइवरलेस टैक्सियां चल रही हैं। 45 वर्षीय टैक्सी चालक याओ शिननोंग का कहना है कि रोबोटैक्सी सेवा शुरू होने के बाद उनकी आय करीब 40 प्रतिशत तक घट गई। उनका कहना है कि कुछ महीने पहले तकनीकी खराबी के कारण जब ड्राइवरलेस टैक्सियां बंद हुईं, तब यात्रियों ने सामान्य टैक्सियों का रुख किया और उनकी कमाई में कुछ समय के लिए सुधार देखने को मिला।
फिल्म इंडस्ट्री में भी AI की बढ़ती दखल
AI का असर केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बीजिंग के सिनेमैटोग्राफर तियान जेमिन का कहना है कि करीब 20 वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के बाद अब उन्हें पहले जैसी परियोजनाएं नहीं मिल रही हैं। उनके अनुसार, AI अब इतने वास्तविक डिजिटल कलाकार और वीडियो तैयार कर रहा है कि कई प्रोडक्शन हाउस इंसानी कर्मचारियों की जगह AI आधारित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उनकी फ्रीलांस आय वर्ष 2019 की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत रह गई है।
रोजगार बाजार पर बढ़ा दबाव
चीन में पहले से ही रोजगार का दबाव बढ़ा हुआ है। रियल एस्टेट और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आई मंदी के बाद बड़ी संख्या में लोग गिग और फ्लेक्सिबल रोजगार की ओर बढ़े हैं। एक थिंक टैंक के अनुसार, वर्ष 2026 तक चीन में लगभग 32 करोड़ लोग लचीले रोजगार में होंगे, जो देश के कुल कार्यबल का करीब 44 प्रतिशत होगा। ऐसे में AI का तेजी से बढ़ता उपयोग इन लोगों के लिए नई चुनौती बन गया है।
टैक्सी चालकों का विरोध प्रदर्शन
वुहान में वर्ष 2024 के दौरान ड्राइवरलेस टैक्सियों के विरोध में टैक्सी चालकों ने प्रदर्शन भी किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नई तकनीक गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की रोजी-रोटी छीन रही है। हालांकि, इस विरोध से जुड़ी कई खबरों को बाद में हटा दिया गया था।
सरकार भी मान रही चुनौती
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग AI को देश के विकास और तकनीकी प्रगति का अहम साधन मानते हैं। इसके बावजूद अब चीन सरकार भी स्वीकार कर रही है कि AI रोजगार के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। सरकारी अखबार वर्कर्स डेली ने हाल ही में लिखा कि AI के दौर में रोजगार संबंधी नियमों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि रोजगार पर AI के प्रभाव को कम करने के लिए नई नीतियां बनाई जाएंगी।
बदलने वालों के लिए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI कई पारंपरिक नौकरियों का स्वरूप बदल सकता है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि जो लोग समय रहते AI के साथ काम करना सीखेंगे और नए कौशल विकसित करेंगे, उनके लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। फिलहाल चीन के लाखों कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AI आने वाले समय में इंसानों की नौकरियां खा जाएगा या फिर नई संभावनाओं के रास्ते भी खोलेगा।


