Black currency racket busted: राजधानी रायपुर पुलिस की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट ने अंतर्राज्यीय ब्लैक करेंसी गिरोह का बड़ा पर्दाफाश किया है। टीम ने पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में करोड़ों की ठगी करते रंगे हाथों 7 अंतर्राज्यीय ठगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह से मौके पर ही 4 करोड़ से अधिक कैश, 17 मोबाइल, नोट के आकार के काले पेपर और केमिकल प्लेट्स जब्त हुए हैं।

इस गिरोह ने रायपुर के एक व्यक्ति से 1.13 करोड़ की ठगी की थी, जिसकी रिपोर्ट थाना तेलीबांधा में BNS की धारा 318(4), 61(2) के तहत दर्ज है। रायपुर पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस ने इस गिरोह का खुलासा किया।

कौन हैं सरगना? योगी, कैप्टन और बड़े सर

Wash & Wash नामक इस अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 07 अंतर्राज्यीय ठग गिरफ्तार किए गए हैं। यह गिरोह देशभर में अरबों रूपयों की ठगी कर चुका है। इनसे लगभग 04 करोड़ से अधिक नगदी रकम जप्त की गई है। इन लोगों ने रायपुर में एक व्यक्ति को अपना शिकार बनाते हुये 1.13 करोड़ रूपये की ठगी की  थी।

गिरोह का मुख्य सरगना  ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी तथा मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर है। इन्हें पुणे के खण्डाला स्थित रिसॉर्ट में करोड़ों रुपये की ठगी करते रंगे हाथों पकड़ा गया। यह गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय होकर देशभर में 100 से अधिक लोगों से अरबों रुपये की ठगी कर चुका है।

पूर्व में पकड़े गए सदस्यों से खुला राज

क्राइम ब्रांच ने थाना तेलीबांधा में धारा 318(4), 61(2) बीएनएस के प्रकरण में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा प्रकरण में पूर्व में (1) कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय पति शुभम पाण्डेय, उम्र 24 वर्ष निवासी राजरहाट गोपालपुर थाना न्यू टाउन हथियारा इसानपल्ली कोलकाता (2) दीपिका पॉलीवाल पिता उमाशंकर पालीवाल उम्र 24 वर्ष निवासी आनंद विहार मॉली कॉलोनी उदयपुर राजस्थान को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के कब्जे से प्रकरण से संबंधित 03 मोबाइल फोन, नगदी रकम 26,000/- रूपये तथा एटीएम कार्ड एवं आधार कार्ड, कुल कीमती लगभग 70,000/- रूपये जप्त कर उनके विरूद्ध अग्रिम कार्यवाही की गई थी।

उपायुक्त स्मृतिक राजनाला ने बताया कि इनसे पूछताछ की गई। साथ ही आरोपियों के कब्जे से जप्त मोबाइल फोन एवं उनमें उपलब्ध डिजिटल सामग्री का तकनीकी परीक्षण एवं विश्लेषण किया गया। साईबर टीम द्वारा मोबाइल फोन में प्राप्त चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों का सूक्ष्मता से विश्लेषण कर आरोपियों के आपसी संपर्क एवं प्रकरण में उनकी भूमिंका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित करते हुये आरोपियों की जानकारी प्राप्त कर आरोपियों को पुणे में लोकेट किया गया। संयुक्त टीम को तत्काल पुणे रवाना किया गया। 

छापे के दौरान किसी और को बना रहे थे शिकार 

टीम द्वारा लगभग एक सप्ताह तक कैम्प कर आरोपियों की गतिविधियों एवं संभावित ठिकानों पर निगरानी रखते हुए प्राप्त इनपुट के आधार पर पुणे के खण्डाला स्थित एक रिसॉर्ट में आरोपियों को चिन्हित कर रेड कार्यवाही की गई। रेड के दौरान 07 आरोपी मौके पर मिले, जो वाराणसी निवासी एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर अपने पास बुलाए थे। पीड़ित अपने साथ करोड़ों रुपये लेकर रिसॉर्ट पहुंचा था और रकम दोगुनी करने के लालच में आरोपियों को सौंप चुका था। पुलिस टीम द्वारा आरोपियों को पीड़ित से रकम प्राप्त कर ठगी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।

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सभी 07 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग 04 करोड़ से अधिक नगदी रकम, मोबाईल फोन 17 नग, नोट के आकार का काला पेपर, कांच के प्लेट्स, अन्य सामग्री तथा दस्तावेज जप्त कर आरोपियों को पुणे से ट्रांजिट रिमाण्ड पर रायपुर लाकर कार्यवाही किया गया। 

आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनके द्वारा छत्तीसगढ़, नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं शहरों में इसी प्रकार की ठगी की घटनाओं को अंजाम देना बताया गया है।

आरोपी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ “कैप्टन” उर्फ “शेट्टी” उर्फ ‘‘रेड्डी‘‘ पूर्व में भी इसी प्रकार की ठगी की घटनाओं को अंजाम देने के मामले में मुम्बई से जेल निरुद्ध रह चुका है। इसी प्रकार आरोपी मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ “बड़े सर” भी ठगी के प्रकरणों में मुम्बई एवं वाराणसी से जेल निरुद्ध रह चुका है।

प्रकरण में संलिप्त अन्य आरोपी फरार है, जिनकी पतासाजी कर गिरफ्तार करने के प्रयास किये जा रहे है। 

गिरोह में अलग–अलग भूमिकाएं तय

आरोपी ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी एवं मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर गिरोह के मुखिया है। आरोपी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव गिरोह में “कैप्टन” की भूमिका निभाता है, जबकि आरोपी मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ “बड़े सर” के रूप में कार्य करता है। गिरोह के अन्य सदस्यों की भी अलग-अलग भूमिकाएं निर्धारित हैं तथा प्रत्येक आरोपी अपनी भूमिका के अनुसार कार्य करता है। पूछताछ एवं जांच में सामने आया कि उक्त आरोपीगण वर्ष 2005 से लगातार लोगों को झांसे में लेकर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 100 से अधिक लोगों से अरबों रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है। 

खुद को डी कंपनी का बताता था गिरोह

गिरोह द्वारा ऐसे लोगों को निशाना बनाया जाता था, जिन्हें कम समय में अधिक रकम प्राप्त करने अथवा अपनी रकम दोगुनी करने का लालच दिया जाता था। आरोपियों द्वारा स्वयं को “डी ग्रुप कंपनी (दाऊद ग्रुप)” से जुड़ा बताकर पीड़ितों पर प्रभाव बनाने का प्रयास किया जाता था। गिरोह के सदस्यों को उनकी भूमिका के अनुसार “कैप्टन”, “बड़े सर” आदि नामों से संबोधित किया जाता था तथा ठगी से प्राप्त रकम का आपस में प्रतिशत के आधार पर बंटवारा किया जाता था। पीड़ितों को प्रभावित करने के लिए आरोपी स्वयं को बड़े नेताओं एवं फिल्मी कलाकारों के साथ फोटो दिखाते थे। गिरोह के मुख्य भूमिका निभाने वाले आरोपी अपने साथ निजी गनमैन भी रखते थे, जिससे पीड़ितों पर प्रभाव एवं दबाव बनाया जा सके। 

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बड़े होटलों में बुलाया जाता था लोगों को 

आरोपियों द्वारा पीड़ितों को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, आगरा, राजस्थान, गुजरात एवं नागपुर आदि शहरों के अलग-अलग 5 स्टार होटलों में बुलाया जाता था। वहां स्वयं को प्रभावशाली एवं सक्षम व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत कर पीड़ितों का विश्वास हासिल किया जाता और उनसे बड़ी रकम ली जाती थी। इसके बाद केमिकल के माध्यम से नोटों को दोगुना करने का झांसा देकर ठगी की जाती थी। पीड़ितों को रकम दोगुनी होने का विश्वास दिलाकर उनसे बड़ी राशि प्राप्त की जाती और बाद में आरोपी योजनाबद्ध तरीके से रकम लेकर फरार हो जाते अथवा पीड़ितों को गुमराह कर ठगी की राशि हड़प लेते थे।

पुलिस ने बताया वारदात का तरीका

पुलिस केडी मुताबिक आरोपियों द्वारा सुनियोजित षड्यंत्र के तहत स्वयं को प्रभावशाली व्यक्तियों एवं विदेशी निवेशकों से जुड़ा हुआ बताकर प्रार्थी का विश्वास अर्जित किया जाता है। इसके पश्चात कंपनी के लिए बड़े निवेश एवं फंड स्वीकृत कराने का झांसा देते हुए बड़े अधिकारियों से बैठक, फाइल प्रोसेसिंग, सुरक्षा स्वीकृति, विदेशी परीक्षण, हाई-पावर केमिकल एवं अन्य तकनीकी औपचारिकताओं का हवाला दिया जाता है। प्रार्थी का विश्वास बनाए रखने के लिए आरोपियों द्वारा उसे विभिन्न स्थानों पर बुलाकर नकली केमिकल एवं विशेष रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाता है तथा यह झूठा दावा किया जाता था कि काले रंग से ढके नोटों को विशेष केमिकल एवं विदेशी तकनीक की सहायता से असली भारतीय मुद्रा में परिवर्तित किया जा सकता है। आरोपियों द्वारा पहले से तैयार असली नोटों का उपयोग कर नकली रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाता है। 

वॉश-वॉश (Wash & Wash) Black currency Scam पद्धति का उपयोग करते हुए विशेष केमिकल, विदेशी तकनीक एवं काले नोटों को असली नोटों में परिवर्तित करने का झूठा प्रदर्शन कर लोगों का विश्वास जीता जाता है, जिससे प्रार्थी उनकी बातों पर विश्वास कर ले। इसके पश्चात आरोपियों द्वारा कभी विदेशी केमिकल मंगाने, कभी हाई-पावर केमिकल खरीदने, कभी विदेशी परीक्षण, कभी वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति, तो कभी फंड रिलीज एवं अन्य आवश्यक औपचारिकताओं का बहाना बनाकर विभिन्न किश्तों में लगातार धनराशि ऐंठी जाती है।

गिरफ्तार आरोपी

01. ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी पिता रामआश्रय श्रीवास्तव उम्र 46 साल निवासी सेक्टर 51 समस्तपुर गुड़गांव हरियाणा। हाल पता – फ्लैट नंबर बी/205 सीडी हाईट्स नालासोपारा थाना नालासोपारा मुम्बई। 

02. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी पिता सत्यप्रकाश श्रीवास्तव उम्र 52 वर्ष निवासी पाण्डेयपुर लालपुर थाना वाराणसी उत्तरप्रदेश।

03. मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर पिता स्व. एस एस लाल श्रीवास्तव उम्र 55 वर्ष निवासी एस एच 8/54 बी 9 शिवपुर थाना शिवपुर जिला वाराणसी उत्तरप्रदेश।

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04. विवेक सिंह पिता स्व. शिवरतन सिंह उम्र 48 साल निवासी लहौरा वीर जगत गंज थाना चेतगंज जिला वाराणसी उत्तरप्रदेश।

05. शुभम पांडेय पिता महेंद्र पांडेय उम्र 37 साल निवासी चंदवत थाना चंदवत जिला जौनपुर उत्तरप्रदेश। हाल पता – ए विंग फ्लैट नंबर 411 रॉयल पॉम अपार्टमेंट थाना गोरेगांव गोरेगांव ईस्ट मुम्बई।

06. योगेन्द्र चौहान पिता स्व. रामानंद चौहान उम्र 48 साल निवासी ग्राम सेनापुर पोस्ट बडनपुर थाना केराकत जिला जौनपुर उत्तरप्रदेश।

07. बालमुकुंद दीक्षित पिता वेदप्रकाश दीक्षित उम्र 40 साल निवासी ग्राम खटारा पोस्ट भौंरा थाना केराकत जिला जौनपुर उत्तरप्रदेश।

कैसे फंसे? रायपुर से पुणे तक पीछा

पूर्व में पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल से मिले चैट, नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट्स के एनालिसिस से इनकी पुणे में लोकेशन मिली।

DCP स्मृतिक राजनाला के निर्देशन में टीम ने एक सप्ताह तक पुणे में कैंप कर खंडाला रिसॉर्ट पर रेड की। वहां आरोपी वाराणसी के एक व्यापारी को नोट डबल करने का झांसा देकर बुलाए थे। पीड़ित करोड़ों लेकर पहुंचा और ठगों को पैसे सौंप चुका था, तभी रंगे हाथों दबोचा गया। सभी को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है।

क्या है Black Currency / Wash-Wash ट्रिक?

दरअसल ठग काले रंग के नोट के आकार के कागजों को केमिकल से धोकर असली नोट बनाने का नाटक करते हैं। सामने थोड़े असली नोट धोकर विश्वास जीतते हैं, फिर पूरी रकम लेकर काले कागज थमा देते हैं। पुलिस ने बताया गिरोह छत्तीसगढ़, नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली* समेत कई राज्यों में सक्रिय था। अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

FAQ: ब्लैक करेंसी गिरोह गिरफ्तार

सवाल 1. ब्लैक करेंसी गिरोह के कितने ठग गिरफ्तार हुए और कहाँ से?

कुल 7 ठग गिरफ्तार हुए हैं। रायपुर क्राइम ब्रांच ने इन्हें पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में रेड कर रंगे हाथों पकड़ा।

सवाल 2. इनसे कितनी रकम जब्त हुई?

आरोपियों के पास से 4 करोड़ से अधिक नगदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले पेपर, कांच की प्लेट्स और केमिकल जब्त किया गया है।

सवाल 3. गिरोह का सरगना कौन है और क्या नाम से ठगी करता था?

सरगना ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी और मनोज श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर हैं। ये नोट डबल करने का झांसा देते थे।

सवाल 4. रायपुर में इस गिरोह ने कितनी ठगी की थी?

गिरोह ने रायपुर में एक व्यक्ति से 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की थी, जिसकी FIR थाना तेलीबांधा में BNS 318(4), 61(2) के तहत दर्ज है।

सवाल 5. ये गिरोह कब से सक्रिय था?

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह 2005 से सक्रिय है और देशभर में 100 से अधिक लोगों से अरबों रुपये की ठगी कर चुका है। इसके 2 सदस्य पहले मुंबई और वाराणसी में जेल जा चुके हैं।