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Rajni Bector success story: बंटवारा. संघर्ष और फिर क्रेमिका, भारत आकर बनाई 7000 करोड़ की कंपनी, पढ़ें पद्म श्री रजनी बेक्टर की कहानी

Rajni Bector, founder of Cremica and English Oven.
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Rajni Bector success story: रजनी बेक्टर जिन्होंने बंटवारे का दर्द झेला, पर अपने सपनों से समझौता नहीं कर पाई। बंटवारे के बाद रजनी का परिवार पाकिस्तान के कराची से भारत आया। फिर लुधियाना के कारोबारी परिवार में उनकी शादी हुई। लेकिन, उनकी चाह थी कि, वे खुद का कारोबार शुरू करें। इसके लिए उन्होंने पंजाब के PAU से बेकिंग का कोर्स किया और अपनी कुकिंग स्किल पर काम किया।

फिर उन्होंने 300 रुपए से अपने बेकरी के कारोबार को शुरू किया। क्रेमिका कंपनी का वैल्यूएशन आज 7000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। कंपनी 60 से ज्यादा देशों में फैल चुकी है। वहीं, क्रेमिका का सलाना टर्नओवर 1,600 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है।

पढ़ाई के बाद बेकिंग कोर्स से निखारी स्किल

कराची में जन्मी रजनी बेक्टर की शादी लुधियाना के एक कारोबारी परिवार में हुई थी। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। जब उनके बच्चे बड़े होकर बोर्डिंग स्कूल चले गए, तब उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) से बेकिंग का कोर्स किया और अपनी कुकिंग स्किल को निखारने पर ध्यान दिया।

300 रुपये का ओवन और शुरुआती संघर्ष

घर पर बनी रेसिपीज की आस-पड़ोस और दोस्तों के बीच तारीफ होने लगी। इस सराहना से प्रेरित होकर रजनी ने केवल 300 रुपये से छोटा बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने 300 रुपये में एक ओवन खरीदा और घर में आइसक्रीम बनानी शुरू कर दी। हालांकि, शुरुआत में बिक्री तो हुई, लेकिन कोई मुनाफा नहीं मिल पा रहा था।

पति से मिले 20 हजार और जन्मा ‘क्रेमिका’ नाम

बिजनेस में मुनाफे की कमी को देखते हुए साल 1978 में उनके पति धर्मवीर ने उन्हें 20,000 रुपये की आर्थिक मदद दी। इसके बाद उन्होंने अपने ब्रांड का नाम ‘क्रेमिका’ चुना, क्योंकि यह सुनने में क्रीम यानी क्रीम से बने उत्पाद जैसा लगता था। इसके बाद से रजनी को आइसक्रीम कारोबार में मुनाफा होना शुरू हो गया।

5 हजार से 50 हजार ब्रेड प्रतिदिन का सफर

रजनी बेक्टर यहीं नहीं रुकीं। आइसक्रीम के बाद उन्होंने ब्रेड, बिस्किट और सॉस बनाना भी शुरू किया। साल 1985 में उन्होंने पंजाब में एक ब्रेड बनाने की यूनिट स्थापित की। शुरुआत में रोजाना करीब 5,000 ब्रेड तैयार होती थीं, जो वक्त के साथ बढ़कर लगभग 50,000 ब्रेड प्रतिदिन हो गईं। इस कदम ने उन्हें छोटे स्तर के काम से निकालकर बड़े खाद्य कारोबार की ओर बढ़ा दिया।

इंग्लिश ओवन ब्रांड और ग्लोबल पहचान

कंपनी ने आगे चलकर ब्रेड और प्रीमियम बेकरी प्रॉडक्ट्स के लिए ‘इंग्लिश ओवन’ नाम से नया ब्रांड शुरू किया, जबकि बिस्किट और अन्य खाद्य उत्पाद ‘क्रेमिका’ नाम से बेचे जाने लगे। आज यह कंपनी दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में अपनी पहुंच बना चुकी है।

पद्म श्री सम्मान और पीएम मोदी से मुलाकात

व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने रजनी बेक्टर को साल 2021 में ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया। सम्मान मिलने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने उनकी बनाई रेसिपीज का स्वाद चखने की इच्छा जताई थी।

5 FAQs:

रजनी बेक्टर कौन हैं?

रजनी बेक्टर ‘क्रेमिका’ और ‘इंग्लिश ओवन’ ब्रांड्स की संस्थापक हैं, जिन्हें 2021 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

क्रेमिका ब्रांड की शुरुआत कितने रुपये से हुई थी?

इसकी शुरुआत 300 रुपये के ओवन से हुई थी, जिसके बाद 1978 में उनके पति ने 20,000 रुपये का निवेश किया था।

क्रेमिका कंपनी का सालाना टर्नओवर और वैल्यूएशन कितना है?

कंपनी का सालाना टर्नओवर 1,600 करोड़ रुपये से अधिक है और कुल वैल्यूएशन लगभग 7,000 करोड़ रुपये है।

क्रेमिका की ब्रेड यूनिट कब शुरू हुई थी?

पंजाब में पहली ब्रेड यूनिट 1985 में शुरू हुई थी, जहां शुरुआती उत्पादन 5,000 ब्रेड प्रतिदिन था।

रजनी बेक्टर को पद्म श्री सम्मान कब मिला?

उन्हें साल 2021 में व्यापार और उद्योग क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री मिला।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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