BJP Leader Allegations: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिससे सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि भाजपा के अपने ही एक सक्रिय नेता ने सरकार की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इस खुलासे के बाद से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को पूरी तरह से घेरना शुरू कर दिया है।
नरहरपुर जनपद सदस्य के खुलासे से खुली ‘ट्रांसफर उद्योग’ की पोल
मामले के केंद्र में नरहरपुर जनपद पंचायत सदस्य भोपेश नेताम का बयान है, जिन्होंने खुलकर पार्टी और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी शिक्षिका मां के ट्रांसफर को रुकवाने के लिए उन्हें डेढ़ लाख रुपये देने पड़े। उनका यह भी दावा है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का फोन आने के बावजूद उनका काम बिना पैसों के नहीं हुआ। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि अब खुद भाजपा के अपने ही जनप्रतिनिधि इस कथित वसूली तंत्र की पोल खोल रहे हैं।
पवन साय और रामू रोहरा पर लगे गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक आरोप
विवाद केवल ट्रांसफर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम भी घसीटे गए हैं। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने बयान देते हुए कहा कि भोपेश नेताम ने भाजपा संगठन मंत्री पवन साय और रामू रोहरा पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों में गंगरेल बांध के टेंडर को कथित रूप से फोन कर निरस्त करवाने, पैसों के दम पर जनपद पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी को प्रभावित करने और लेनदेन के जरिए अध्यक्ष बनाने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
संगठन के शीर्ष नेताओं के हस्तक्षेप के बाद भी काम न होने का दावा
इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा संगठन की आंतरिक व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नेताम का यह दावा कि प्रदेश अध्यक्ष के फोन के बाद भी अधिकारियों ने उनकी बात नहीं मानी और पैसे लेने पड़े, यह साबित करता है कि प्रशासनिक तंत्र में किस तरह के समानांतर खेल चल रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब पार्टी के ही प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशों की अनदेखी हो रही है, तो आम जनता और सामान्य कार्यकर्ताओं की सुधि लेने वाला वहां कोई नहीं है।
पार्टी के भीतर बढ़ रहा है कार्यकर्ताओं और नेताओं का असंतोष
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही ट्रांसफर, पोस्टिंग, टेंडर और सप्लाई जैसे हर क्षेत्र में पैसे के खेल की शिकायतें सामने आ रही हैं। वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित रूप से काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उपेक्षित किया जा रहा है और उनके काम रोके जा रहे हैं। कांकेर समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भाजपा नेताओं के इस्तीफे और खुलकर सामने आ रही नाराजगी इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों पर चुप्पी साधे बैठी है सरकार
कांग्रेस पार्टी ने इस प्रकरण को लेकर भाजपा सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं और तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार एक तरफ ‘सुशासन’ के बड़े-बड़े विज्ञापन और दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने ही नेता सरकार के भीतर चल रहे कथित वसूली तंत्र और भ्रष्टाचार की कलई खोल रहे हैं। जनता और कार्यकर्ताओं के बीच उठ रहे इन सवालों का जवाब देने से फिलहाल सत्ता पक्ष बचता नजर आ रहा है, जिससे विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का पूरा मौका मिल गया है।
निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था की उठ रही पुरजोर मांग
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ की सियासत में आने वाले दिनों में यह मुद्दा काफी तूल पकड़ने वाला है। विपक्षी दल कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इन गंभीर आरोपों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो पार्टी इसे लेकर सड़क से लेकर सदन तक जोरदार आंदोलन करेगी। देखना यह होगा कि भाजपा संगठन और शासन स्तर से इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और वे अपने ही नेता के बباवल को किस प्रकार संभालते हैं।



