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छत्तीसगढ़ में मुफ़्त मिलेगी बिजली? CM विष्णु देव साय ने बताया 2030 तक का ‘मास्टर प्लान’

Chhattisgarh CM Vishnu Deo Sai at India Renewable Energy Summit 2026
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Chhattisgarh Green Energy : छत्तीसगढ़ में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े विस्तार की तैयारी है।
  • राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश की हरित ऊर्जा उत्पादन क्षमता मौजूदा 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य तय किया है।
  • इसके साथ ही बिजली की कुल मांग में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की योजना है।
  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 में यह जानकारी दी।

Chhattisgarh Green Energy: छत्तीसगढ़ में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े विस्तार की तैयारी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश की हरित ऊर्जा उत्पादन क्षमता मौजूदा 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही बिजली की कुल मांग में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की योजना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों में प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में करीब 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो से पांच नवंबर तक आयोजित चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया और देश-विदेश के निवेशकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ में ऊर्जा परियोजनाएं लगाने के लिए आमंत्रित किया।

23,923 मेगावाट की परियोजनाओं में 1.33 लाख करोड़ का निवेश

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्रदेश में 23,923 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। वहीं, ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार पर करीब 3.27 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाने की परिकल्पना है।

भारत ने वर्ष 2030 तक गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में योगदान देगा। फिलहाल प्रदेश में कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 28 हजार मेगावाट से अधिक है। बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ताप विद्युत के साथ सौर, जल विद्युत, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का संतुलित विकास करने पर जोर दे रही है।

12,300 मेगावाट की 10 पंप स्टोरेज परियोजनाएं होंगी विकसित

बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में 12,300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाएं चिह्नित की गई हैं। इनमें करीब 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। इससे बिजली के भंडारण और जरूरत के समय उसकी उपलब्धता में मदद मिलेगी। राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना के साथ 40 मेगावाट या 120 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी भंडारण प्रणाली पहले से संचालित है।

141 घरों वाला खैरा गांव पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित

हरित ऊर्जा के क्षेत्र में राजनांदगांव जिले का खैरा गांव भी खास पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रदेश का पहला पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित गांव बन गया है। गांव के सभी 141 घरों की छतों पर दो-दो किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं। इनसे कुल 282 किलोवाट बिजली का उत्पादन होता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 93 घरों को भी सौर ऊर्जा की सुविधा मिली है। ग्रामीणों को इसके लिए कोई खर्च नहीं करना पड़ा।

वहीं, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में करीब 1.26 लाख सौर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों से लगभग 1.94 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 395 मेगावाट क्षमता के संयंत्र लगाने की योजना भी है।

ग्रीन हाइड्रोजन और बायोगैस पर भी निवेश की तैयारी

छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, गोबर और दूसरे जैविक संसाधनों से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनाल और ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 80 टन क्षमता के आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए करीब 800 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इसके अलावा निजी निवेशकों की ओर से करीब 6 हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर प्रक्रिया चल रही है।

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में भी निवेश की परिकल्पना

प्रदेश की दीर्घकालीन ऊर्जा योजना में परमाणु बिजली उत्पादन को भी शामिल किया गया है। करीब 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित विभिन्न परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। सरकार का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा के साथ औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है। इन परियोजनाओं के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

भारत मंडपम में निवेशकों से मिले मुख्यमंत्री साय

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन किया। उन्होंने निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा अधोसंरचना पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने नई परियोजनाओं के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी जताई।

दो से पांच नवंबर तक चल रहे इस वैश्विक सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इनमें 40 से ज्यादा मंत्री, नीति निर्माता और निवेशक हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित नौ देश एवं समूह कंट्री पार्टनर हैं। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ समेत 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी ऊर्जा उत्पादन क्षमता और निवेश की संभावनाएं प्रस्तुत कीं।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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