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बच्चों में क्यों बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा? रायपुर के डॉक्टरों ने फैमिलियल कोलेस्ट्रॉल हाइपर को लेकर दी चेतावनी

Heart Attack in Children
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Heart Attack in Children: दिल्ली के मयूर विहार के एक स्कूल में तीसरी कक्षा की 9 साल की बच्ची की अचानक मौत हो गई।
  • बच्ची स्कूल में चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़ी थी।
  • स्कूल में लगे CCTV कैमरों में यह घटना कैद हो गई।
  • स्कूल प्रशासन के अनुसार, बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

Heart Attack in Children: दिल्ली के मयूर विहार के एक स्कूल में तीसरी कक्षा की 9 साल की बच्ची की अचानक मौत हो गई। बच्ची स्कूल में चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़ी थी। स्कूल में लगे CCTV कैमरों में यह घटना कैद हो गई। स्कूल प्रशासन के अनुसार, बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

डॉक्टर्स ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है। हालांकि, मौत की असल वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पता चल पाएगा। इस घटना के बाद एक सवाल उठ रहा है, क्या इतनी कम उम्र में भी हार्ट अटैक आ सकता है?

बच्चों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को समझना जरूरी

रायपुर के मेकाहारा के कार्डियो वैस्कुलर सर्जन डॉ. केके साहू के अनुसार, बच्चों में होने वाली दिल की समस्याएं बड़ों से अलग हो सकती हैं। कम उम्र में दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं की वजह अक्सर जन्मजात बीमारियां हो सकती हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल अचानक खून पंप करना बंद कर देता है। ऐसे में समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है। बच्चों के दिल की स्थिति जानने के लिए ECG जांच मददगार हो सकती है। इससे दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी यानी विद्युत गतिविधियों का पता चलता है।डॉक्टर के अनुसार, दिल की हर धड़कन के पीछे एक व्यवस्थित इलेक्ट्रिकल सिस्टम काम करता है। यही सिस्टम तय करता है कि दिल के अलग-अलग हिस्से कब और किस क्रम में सिकुड़ेंगे। इस विद्युत प्रणाली में मौजूद कुछ विशेष कोशिकाएं अपने आप विद्युत संकेत (Electrical Impulses) पैदा करती हैं, जिनकी मदद से दिल की धड़कन नियंत्रित होती है।

क्या कम उम्र में आ सकता है हार्ट अटैक?

आमतौर पर हार्ट अटैक को बड़ी उम्र के लोगों से जोड़कर देखा जाता है। बच्चों में भी दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन कम उम्र में सामान्य हार्ट अटैक असामान्य है। मेकाहारा के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, फैमिलियर कोलेस्ट्रॉल हाइपर (Familial Hypercholesterolemia) के मामले बढ़े हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से जन्मजात विकारों (Genetic/Hereditary factors) की वजह से होती है, जो माता-पिता से बच्चों में फैलती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जहां विदेशों में 750 में से 1 व्यक्ति इस अनुवांशिक बीमारी की चपेट में आता था, वहीं भारत में 150 में से 1 व्यक्ति तक इस बीमारी से पीड़ित है। जो कि, भारत में पांच गुना ज्यादा है। विदेशों में 40 से 45 साल के बीच स्क्रीनिंग होती है। उसके उल्ट भारत में 30 साल की उम्र से स्क्रीनिंग हो रहा है। बच्चों में हार्ट अटैक का एक और कारण बच्चों के शरीर में वसा का जमना, जिसे चर्बी भी कहते हैं। इसलिए 7 साल की उम्र से ही बच्चों की कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग जांच कराई जानी चाहिए, ताकि समय रहते इसका पता चल सके। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद बच्चों की जीवनशैली में बदलाव, शारीरिक गतिविधियों और खेलकूद में कमी के साथ ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर बढ़ती निर्भरता से भी कोलेस्ट्रॉल का जोखिम बढ़ा है। डॉक्टर ने बच्चों को नियमित रूप से खेलकूद और आउटडोर गतिविधियों में शामिल करने की सलाह दी है। इससे उनकी शारीरिक सक्रियता बनी रहती है।

भारत में भी बच्चों को आ चुका है हार्ट अटैक, सामने आए कई मामले

महाराष्ट्र के सोलापुर की अवनी नाकाटे को खेलते समय सीने में तेज दर्द हुआ। जांच में उसकी दिल की धड़कने असामान्य और कोलेस्ट्रॉल का स्तर काफी बढ़ा हुआ था। मुंबई के अस्पताल में उसकी बाईपास सर्जरी की गई। डॉक्टर्स ने इसके पीछे आनुवंशिक कारण बताया था। इसके अलावा 14 साल के बच्चे को हार्ट अटैक आया था। चंडीगढ़ पीजीआई ने बच्चे का मामला मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया था। उसे हार्ट अटैक आया था और जांच में दिल की मुख्य धमनी में अंदरूनी दरार (Coronary Artery Dissection) मिली थी। मेडिकल जर्नल में 10 साल की बच्ची को हार्ट अटैक था। उसकी दिल की मुख्य धमनी में खून का थक्का जम गया था। डॉक्टर्स ने खून में होमोसिस्टीन की अधिकता बताया था। ऐसे मामले बताते हैं कि बच्चों में हार्ट अटैक संभव है, हालांकि यह बेहद दुर्लभ है।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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