PM Awas Yojana Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चल रही सियासी बहस अब सीधे आमने-सामने पहुंच गई है। रायपुर प्रेस क्लब में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक ही मंच पर प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर खुली बहस कर रहे हैं।
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की चुनौती स्वीकार की थी, जिसके बाद आज यह ओपन डिबेट आयोजित की गई। बहस का लाइव प्रसारण किया जा रहा है।
विजय शर्मा ने गिनाए आवास निर्माण और खर्च के आंकड़े
डिबेट में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आमने-सामने बैठकर चर्चा करना अच्छी परंपरा है। इससे स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी। विजय शर्मा ने कहा कि कुल निर्मित आवासों में 11 लाख 75 हजार आवास पूरे हो चुके हैं। विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि पांच वित्तीय वर्षों में लक्ष्य के मुकाबले निर्माण के आंकड़े बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से पूछे थे, न कि किसी एक वित्तीय वर्ष के आंकड़े। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के पांच साल में वित्तीय स्वीकृति 3,900 करोड़ रुपये की थी। इसके मुकाबले मौजूदा सरकार के कार्यकाल में तीन साल में 16 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। पिछली सरकार के दौरान 3 लाख आवास पूर्ण होने की बात भी उन्होंने कही। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी 3 लाख नए आवास की स्वीकृति मिली है। विजय शर्मा ने पिछली सरकार के दौरान 3.87 लाख आवास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार ने 6.48 लाख आवास दिए थे, लेकिन इन्हें स्वीकार नहीं किया गया।
7.81 लाख आवास का भी मुद्दा उठा
विजय शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पत्र आया था कि 7.81 लाख PWL आवास पूरे होने चाहिए। उन्होंने नरेंद्र तोमर और गिरिराज सिंह की ओर से लिखे गए पत्रों का भी उल्लेख किया। विजय शर्मा के मुताबिक, इन 7.81 लाख आवासों में से 81 हजार आवास बनाए गए और शेष करीब 7 लाख आवास बच गए। उन्होंने कहा कि इन्हें दूसरी योजना में ट्रांसफर करने के लिए रखा गया था और स्वीकार नहीं करने की वजह से मामला अटक गया। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बाद में टीएस सिंहदेव ने इस्तीफा दे दिया। विजय शर्मा ने यह भी कहा कि 2022-23 में पोर्टल एक बार बंद हुआ था। उनके मुताबिक, 7.81 लाख आवास को लेकर मना किए जाने के बाद पुनः स्वीकृति के समय पोर्टल खोला गया था।
भूपेश बघेल ने 2011 की जनगणना और स्वीकृत आवासों का हिसाब रखा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बहस में कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना वर्ष 2014 में शुरू हुई थी और इसका आधार 2011 की जनगणना है। उन्होंने 18 लाख आवास और आवास प्लस का भी जिक्र किया। भूपेश बघेल ने कहा कि वर्ष 2016-17 में रमन सिंह सरकार के समय 2 लाख 32 हजार आवास स्वीकृत हुए थे। इनमें 2 लाख 29 हजार आवास बन गए। उन्होंने 2 लाख 6,372 स्वीकृत आवासों के पूरा होने का भी उल्लेख किया। भूपेश बघेल ने कहा कि 2022-23 में केंद्र सरकार ने पोर्टल बंद कर दिया था। उनके मुताबिक, करीब 30 हजार करोड़ रुपये बचा था और राज्य सरकार ने लोन लेकर पैसा जुटाया तथा केंद्र से भी राशि मांगी, लेकिन पैसा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पोर्टल बंद होने के कारण पैसा जा ही नहीं रहा था।
पहली कैबिनेट से अब तक स्वीकृतियों का जिक्र
भूपेश बघेल ने कहा कि 14 दिसंबर 2023 को पहली कैबिनेट में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जरिए हुई नई स्वीकृतियों का भी जिक्र किया। भूपेश बघेल के मुताबिक, 10 जनवरी 2025 को 3 लाख नए आवास स्वीकृत हुए। इसके बाद 13 मई 2025 को अंबिकापुर में 3 लाख 700 आवास फिर स्वीकृत किए गए। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2026 को शिवराज सिंह चौहान ने 3.65 लाख आवास स्वीकृत किए। भूपेश बघेल ने कहा कि इस तरह 28 लाख नए आवास हो गए और पहले के 18 लाख को मिलाकर कुल स्वीकृति 46 लाख तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में कुल परिवारों की संख्या के हिसाब से यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है।
भूपेश बोले- स्वीकृति के हिसाब से सभी को मकान मिल गया
भूपेश बघेल ने कहा कि नल-जल योजना के हिसाब से छत्तीसगढ़ में 50 लाख परिवार हैं। उनके मुताबिक, आवासों की स्वीकृति को देखें तो सभी को मकान मिल गया। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में 18 लाख आवास स्वीकृत हुए थे। इसमें 2011 की जनगणना के आधार पर 18 लाख आवास और 8 लाख आवास प्लस का जिक्र किया गया। भूपेश बघेल ने कहा कि रमन सिंह के समय और उनकी सरकार के समय मिलाकर 18 लाख आवास स्वीकृत हुए थे। इसके बाद उनकी सरकार की पहली कैबिनेट में भी 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए और बाद में शिवराज सिंह चौहान की ओर से नई स्वीकृतियां दी गईं।
पोर्टल और आवासों की स्वीकृति पर दोनों नेताओं में टकराव
PM आवास योजना को लेकर बहस में सबसे ज्यादा टकराव आवासों की स्वीकृति, पोर्टल बंद होने और निर्माण के आंकड़ों को लेकर दिखाई दिया। विजय शर्मा ने जहां केंद्र से मिले आवासों को स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया, वहीं भूपेश बघेल ने पोर्टल बंद होने और केंद्र से राशि नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। दोनों नेताओं ने अपने-अपने कार्यकाल और केंद्र से मिली स्वीकृतियों के आंकड़े सामने रखे। अब इस बहस में आगे दोनों नेता एक-दूसरे के आंकड़ों और दावों पर क्या जवाब देते हैं, यह देखना अहम होगा।
प्रेस क्लब में बढ़ाई गई सुरक्षा
ओपन डिबेट को देखते हुए रायपुर प्रेस क्लब परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। पुलिस बल की तैनाती की गई है। दोनों नेताओं के समर्थकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भी पुलिस अलर्ट है। यह बहस इसलिए भी खास है क्योंकि छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहली बार सरकार में जिम्मेदार पद पर बैठे नेता और पूर्व मुख्यमंत्री किसी एक मुद्दे पर सार्वजनिक मंच पर सीधे आमने-सामने हैं।



