अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। अंबिकापुर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की 1.32 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि में हेराफेरी और बंदरबांट के मामले में 9 अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा फर्जीवाड़ा ग्राम पंचायत केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय में हुए तीन प्रमुख निर्माण कार्यों से जुड़ा है। इन विकास कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इन कार्यों में से 1 अगस्त 2023 को मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन बिल्डर्स एंड कॉन्ट्रेक्टर को आरटीजीएस के माध्यम से 48 लाख 36 हजार 544 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया था। इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था।
जांच प्रतिवेदन पर सवाल
इस मामले की शिकायत मिलने पर सरगुजा कलेक्टर ने चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया था। आरोप है कि जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा पूरी तरह उजागर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने आरोपियों को बचाने की कोशिश की और मामले को दबाने के लिए एक मनमाना जांच प्रतिवेदन तैयार कर दिया।
हालांकि, अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों को सही और प्रमाणित पाया। कोर्ट ने आईपीसी की गंभीर धाराओं (धारा 34, 120बी, 201, 409, 420, 467, 468 और 471) के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।
इन पर होगी एफआईआर
अदालत ने जिन 9 लोगों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं उनमें सुरेश्वर नाथ तिवारी (तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ) विवेक प्रताप सिंह राठौर (उप अभियंता)उपेंद्र सिंह सेंगर (तत्कालीन प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी एवं वर्तमान उप अभियंता) शैलेंद्र मिश्र (तत्कालीन लिपिक) राम प्रकाश यादव (तत्कालीन पंचायत सचिव) इम्तान सिंह (तत्कालीन सरपंच) सुयश अग्रवाल (व्यवसायी)अरविंद कुमार अग्रवाल (व्यवसायी) और संबंधित निर्माण एजेंसी संचालक के नाम शामिल हैं।



