सोमवार, 5 अक्तूबर 2026 सोम, 5 अक्तू॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
• Bijapur: छात्रावासों में बच्चियों की सुरक्षा पर आदिवासी समाज सख्त, तबादला नहीं FIR की मांग • Balod: फर्जी मेडिकल कैंप लगाकर ग्रामीणों को बनाया गया बेवकूफ, पोस्टर में कांग्रेस विधायक की लगा दी फोटो, डॉक्टर समेत 4 गिरफ्तार • Chhattisgarh: सीबीआई ने दिव्यांग कल्याण घोटाले की जांच पूरी की, कितने करोड़ का निकला करप्शन ? • Himalayan Heights Raipur Dispute: हिमालय हाइट्स में 5 फ्लैट तोड़कर कोयला कारोबारी ने बनाया आफिस, CGHB में शिकायत के बाद देने लगा धमकी..दम है तो रोककर दिखाओ, जानें क्या है मामला • CM Vishnu Deo Sai Singapore Visit: नवा रायपुर में बनेगा सिंगापुर जैसा बॉटनिकल गार्डन, SBF के डिनर में दिया छत्तीसगढ़ में निवेश का न्योता, जानें क्या बात हुई
TRP Crime News

Bilaspur: आत्महत्या के मामले में हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- साक्ष्यों को टुकड़ों में नहीं पूरा देखो, जानें क्या है मामला…

High Court’s significant observation on suicide: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की आत्महत्या से जुड़े एक मामले में बड़ी और अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी महिला को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाए और ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी जाएं कि उसे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा […]

wife sucide hc verdict
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

High Court’s significant observation on suicide: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की आत्महत्या से जुड़े एक मामले में बड़ी और अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी महिला को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाए और ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी जाएं कि उसे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नजर न आए, तो यह स्थिति भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 / IPC धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के दायरे में आएगी।

यह मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। दरअसल रश्मि प्रकाश ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उनकी मौत के बाद उनके भाई आशीष नाथ ने पति डॉ. संजय प्रकाश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि पति लगातार पत्नी के साथ हिंसा और प्रताड़ना करता था और उसी के कारण वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हुई।

बच्चों के बयान से खुला प्रताड़ना का राज

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतका के बेटे रोहित, बेटी तनिष्का और अन्य गवाहों के बयान दर्ज हुए। बच्चों ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता के क्लीनिक में काम करने वाली एक नर्स के साथ उनके पिता के अवैध संबंध थे। जब मां इसका विरोध करती थी तो पिता उसके साथ मारपीट करता था।

बच्चों ने यह भी बताया कि उनकी मां को पानी में नींद की गोलियां मिलाकर देने की बात भी सामने आई थी। घटना से एक दिन पहले भी उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी। गवाहों ने बताया कि डॉ. संजय अपनी पत्नी को तलाक देने और नर्स से शादी करने की धमकी देता था।

हाईकोर्ट ने कहा – साक्ष्यों को टुकड़ों में नहीं, पूरा देखो

हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में साक्ष्यों को अलग-अलग करके देखने के बजाय पूरे घटनाक्रम और परिस्थितियों को एक साथ रखकर देखना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि लगातार प्रताड़ना के कारण यदि किसी व्यक्ति को आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प दिखाई नहीं देता, तो ऐसी परिस्थितियां दुष्प्रेरण के आरोप के आकलन में सबसे अहम होती हैं।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निचली अदालत ने गवाहों के बयानों का अलग-अलग मूल्यांकन किया था, जबकि सभी सबूतों को एक साथ देखने पर पूरी तस्वीर साफ होती है।

निचली अदालत का क्या था फैसला?

इस मामले में निचली अदालत ने 28 जून 2016 को डॉ. संजय प्रकाश को धारा 498-ए (दहेज प्रताड़ना) के तहत दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना सुनाया था। लेकिन धारा 306 आत्महत्या के दुष्प्रेरण के आरोप से बरी कर दिया था।

इसी फैसले के खिलाफ मृतका के भाई आशीष नाथ ने हाईकोर्ट में अपील की थी, वहीं डॉ. संजय ने भी 498-ए की सजा को चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में लगातार प्रताड़ना को दुष्प्रेरण के दायरे में मानते हुए गंभीर टिप्पणी की है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. हाईकोर्ट ने आत्महत्या के मामले में क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से ऐसी परिस्थिति बनाना कि महिला को आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता न दिखे, तो यह धारा 306 के तहत दुष्प्रेरण के दायरे में आएगा।

Q2. पूरा मामला क्या है?
बिलासपुर सिविल लाइन की रश्मि प्रकाश ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी, भाई ने पति डॉ. संजय प्रकाश पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था, बच्चों ने पिता के नर्स से संबंध और मारपीट की बात कही।

Q3. निचली अदालत ने क्या सजा दी थी?
28 जून 2016 को 498-ए में 3 साल की सजा और 10 हजार जुर्माना, लेकिन 306 से बरी कर दिया था।

Q4. हाईकोर्ट ने किस बात पर जोर दिया?
सभी साक्ष्यों का अलग-अलग नहीं बल्कि समग्र मूल्यांकन करने पर जोर दिया और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

विज्ञापन