Russia Plague Case: रूस के साइबेरियाई क्षेत्र इरकुत्स्क में 28 वर्षीय लैब टेक्नीशियन दारिया शिपिलोवा की प्लेग से संदिग्ध मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। शेलेखोव स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े इस मामले में महिला के संपर्क में आए करीब 197 लोगों को क्वारंटाइन और चिकित्सा निगरानी में रखा गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इलाके में कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द किए गए हैं और कम से कम पांच अस्पतालों को बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
दारिया शिपिलोवा को 29 सितंबर को गंभीर निमोनिया जैसे लक्षणों के साथ शेलेखोव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन 1 अक्टूबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
टेस्टिंग के दौरान टूटी थी जिंदा बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिपिलोवा ने अस्पताल के मेडिकल स्टाफ को बताया था कि टेस्टिंग के लिए सैंपल लेते समय उनसे गलती से एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। बताया गया कि उस टेस्ट ट्यूब में जिंदा बैक्टीरिया मौजूद थे। इसी घटना के दौरान उनके संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मामले को लेकर सामने आई जानकारी में इसे अभी संदिग्ध संक्रमण के तौर पर बताया गया है।
197 लोग क्वारंटाइन, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी
शिपिलोवा के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उन्हें निगरानी में रखा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 197 लोग क्वारंटाइन में हैं। अधिकारियों की ओर से संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर कोबजेव ने इलाके में एक बेहद खतरनाक संक्रमण के संदिग्ध मामले की जानकारी दी और लोगों से शांत रहने की अपील की। 2 अक्टूबर को उन्होंने बताया कि संक्रमण की रोकथाम से जुड़े कदमों की समीक्षा के लिए उपभोक्ता सुरक्षा निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनाडजोर के प्रमुख के साथ बैठक हुई। एजेंसी की ओर से संक्रमण नियंत्रण के जरूरी उपाय लागू किए जा रहे हैं। पड़ोसी बुर्यातिया क्षेत्र के गवर्नर अलेक्सी त्स्यदेनोव ने भी महिला की मौत संभवतः प्लेग से होने की बात कही। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके क्षेत्र में प्लेग का कोई प्रकोप नहीं है।
क्यों खतरनाक है न्यूमोनिक प्लेग?
न्यूमोनिक प्लेग प्लेग का वह रूप है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसकी गंभीरता इसलिए ज्यादा मानी जाती है क्योंकि यह सांस से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है। संक्रमण के शुरुआती चरण में अगर सही समय पर एंटीबायोटिक उपचार नहीं मिलता, तो यह जानलेवा हो सकता है। यही वजह है कि संदिग्ध मामले सामने आने के बाद करीबी संपर्कों की पहचान कर उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक पहचाने गए करीबी संपर्कों में बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं और उनके प्रयोगशाला परीक्षण भी नेगेटिव बताए गए हैं।
अमेरिका भी मामले पर रख रहा नजर
इरकुत्स्क में प्लेग की संदिग्ध मौत के मामले पर अमेरिका भी नजर रख रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, वॉशिंगटन इस मामले को लेकर रोग नियंत्रण केंद्र यानी CDC और अन्य एजेंसियों के संपर्क में है। अमेरिका ने रूस से मामले को लेकर सही और जल्द जानकारी साझा करने की अपील की है। पूर्व सीआईए अधिकारी डैन हॉफमैन के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया तंत्र भी मामले से जुड़ी जानकारी जुटा रहा है। मॉस्को स्थित अमेरिकी दूतावास अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए रूसी अधिकारियों और क्षेत्रीय सहयोगियों के संपर्क में रह सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि न्यूमोनिक प्लेग का शुरुआती चरण में एंटीबायोटिक्स से इलाज संभव है। CDC ने लक्षण सामने आने पर तुरंत उपचार शुरू करने की सलाह दी है।



