Spain Housing Crisis: स्पेन में 87 साल की वृद्धा मारिकारेमेन अबासकल को घर से बेदखली मामले ने सरकार ही पलट दी है। स्पेन में अब समय से 8 महीने पहले ही चुनाव होंगे। तय समय से पहले यहां 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है।
दरअसल, 70 साल पुराने घर से बेदखल किए जाने का मामला स्पेन में देशव्यापी आवास संकट का प्रतीक बन गया। महंगे किराए और बेदखली के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। सरकार ने किराएदारों को राहत देने के लिए संसद में दो आपातकालीन आवास प्रस्ताव पेश किए, लेकिन 2 अक्टूबर को दोनों खारिज हो गए। इसके बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने 5 अक्टूबर को संसद भंग करने और तय समय से करीब आठ महीने पहले 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया।
जानिए क्या है पूरा मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत 23 सितंबर को हुई। मैड्रिड में 87 साल की मारिकारेमेन अबासकल को उस अपार्टमेंट से निकाल दिया गया, जहां वह 1956 से रह रही थीं। यानी करीब सात दशक से वही घर उनका ठिकाना था। बेदखली की तस्वीरें सामने आने के बाद मामला तेजी से पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
500 से 2,650 यूरो तक पहुंचा किराया
अबासकल के परिवार ने 1956 में यह घर किराए पर लिया था। बाद में किराए का पुराना अनुबंध उनके नाम हो गया। 2018 में संपत्ति निवेश कंपनी Urbagestión के पास पहुंची। इसके बाद किराए को लेकर विवाद शुरू हुआ। कंपनी ने पुराने करीब 500 यूरो के किराए को बढ़ाकर 2,650 यूरो करने की मांग की। बाद में इसे घटाकर 1,650 यूरो किया गया। लेकिन अबासकल की मासिक पेंशन करीब 1,350 यूरो थी। यानी प्रस्तावित किराया उनकी पूरी मासिक पेंशन से भी ज्यादा था। मामला अदालत तक पहुंचा। तीन बार बेदखली की कोशिशें रुकने के बाद 23 सितंबर को चौथी कोशिश में अबासकल को घर से निकाल दिया गया।
एक महिला का मामला बना पूरे देश का मुद्दा
बेदखली के बाद मैड्रिड में लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और किराएदारों के अधिकारों को मजबूत करने की मांग की। अबासकल का मामला धीरे-धीरे स्पेन के व्यापक आवास संकट से जुड़ गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बढ़ते किराए और सीमित किफायती आवास के कारण आम लोगों के लिए घर का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। मैड्रिड के अलावा दूसरे शहरों में भी आवास संकट को लेकर प्रदर्शन हुए।
सरकार ने संसद में लाए दो आपातकालीन प्रस्ताव
बढ़ते दबाव के बीच सांचेज सरकार ने 29 सितंबर को दो रॉयल डिक्री-लॉ मंजूर किए। इनका मकसद कमजोर किराएदारों को राहत देना और किराए के घरों की उपलब्धता बढ़ाना था। पहले प्रस्ताव में कमजोर किराएदारों की बेदखली से सुरक्षा को 2030 तक बढ़ाने, किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ाने और सट्टेबाजी पर रोक लगाने जैसे प्रावधान थे। सरकार ने कम आय वाले परिवारों के लिए टैक्स राहत और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए ब्याज-मुक्त वित्तीय व्यवस्था जैसे उपाय भी प्रस्तावित किए।
दूसरे प्रस्ताव में मुख्य आवास के किराए के अनुबंधों को अधिक स्थिर बनाने के लिए स्वचालित नवीनीकरण की व्यवस्था का प्रस्ताव था। इसका मकसद किराएदारों को अनुबंध खत्म होते ही घर खाली करने के दबाव से राहत देना था।
संसद में दोनों प्रस्ताव हुए खारिज
सांचेज सरकार के पास संसद में पूर्ण बहुमत नहीं है। इसलिए उसे हर बड़े विधायी फैसले के लिए दूसरी पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ती है। 2 अक्टूबर को दोनों आवास प्रस्ताव संसद में समर्थन हासिल नहीं कर सके। Junts, PP और Vox ने दोनों प्रस्तावों के खिलाफ मतदान किया। इस हार के बाद सरकार के सामने संसद में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की चुनौती और बढ़ गई। विरोधी दलों की आपत्ति मुख्य रूप से इस बात पर थी कि केवल किराए और बेदखली पर नियम कड़े करने से आवास संकट का समाधान नहीं होगा। उनका जोर नए घरों के निर्माण और आवास की आपूर्ति बढ़ाने पर रहा।
सांचेज ने क्यों बुलाया समय से पहले चुनाव?
आवास प्रस्तावों की हार के बाद सांचेज ने 5 अक्टूबर को आम चुनाव की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि सरकार को आगे के सुधारों के लिए संसद में व्यापक समर्थन की जरूरत है। चुनाव 29 नवंबर 2026 को होगा। इस तरह अब स्पेन का आवास संकट सीधे चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक 87 साल की महिला की बेदखली से शुरू हुआ विवाद संसद में कानूनों की हार तक पहुंचा और इसके बाद समय से पहले चुनाव की घोषणा हो गई।
स्पेन में आवास संकट कितना बड़ा है?
स्पेन की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक किफायती घरों की कमी है। बैंक ऑफ स्पेन के मुताबिक, देश में सार्वजनिक आवास का स्टॉक मुख्य आवासों का सिर्फ करीब 1.5 प्रतिशत है। यह यूरोपीय और OECD देशों के करीब 7 प्रतिशत के औसत से काफी कम है। यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के मुताबिक भी स्पेन में सामाजिक आवास करीब 1.5 से 1.7 प्रतिशत घरों तक सीमित है। इसका मतलब है कि कम और मध्यम आय वाले परिवारों का बड़ा हिस्सा निजी किराए के बाजार पर निर्भर है।



