Price Rise During Festival Season: हर साल दीपावली का पावन पर्व देश भर में उमंग और उल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस बार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की खुशियों का रंग फीका कर दिया है। त्योहारी सीजन के बीच रसोई में उपयोग होने वाली बुनियादी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इस बार का त्योहार मनाना बेहद कठिन हो गया है।
शक्कर, खाद्य तेल, प्याज और अन्य जरूरी खाद्य सामग्रियों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम गृहणियों के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है। इसी बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर करारा हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि आखिर इन हालात में आम आदमी शांति से त्योहार कैसे मनाए?
शक्कर और खाद्य तेलों के दामों में भारी उछाल से जनता परेशान
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में शक्कर की कीमत में 40 से 50 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, खाने के तेलों के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं, जिससे हर घर का मासिक बजट गड़बड़ा गया है।
रसोई में रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली दालों के भाव भी दोगुने हो चुके हैं। इसके साथ ही लहसुन, आलू, प्याज, टमाटर और अन्य हरी सब्जियों के दाम इस कदर बढ़ गए हैं कि आम आदमी की थाली से पौष्टिक चीजें गायब होने लगी हैं। दूध, दही, पनीर, आटा, मैदा, सूजी और दलहन-तिलहन जैसी तमाम दैनिक उपभोग की वस्तुएं महंगी हो चुकी हैं।

गैस सिलेंडर और ईंधन के बढ़ते दामों ने तोड़ी मध्यम वर्ग की कमर
कांग्रेस नेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में महंगाई लगातार बेलगाम हुई है। वर्ष 2014 में जो घरेलू गैस सिलेंडर लगभग 410 रुपए में मिलता था, आज उसकी कीमत 1,000 रुपए के पार पहुंच चुकी है, वह भी समय पर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
इसी तरह पेट्रोल और डीजल के दाम भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। पेट्रोल के दाम 70 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 108 रुपए के पार हो गए हैं, जबकि डीजल के दाम 55 रुपए से बढ़कर 104 रुपए के करीब पहुंच चुके हैं। ईंधन के महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ी है, जिसका सीधा असर हर वस्तु की खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है।
आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बनाने संघर्ष कर रहा मध्यम वर्ग
आज की स्थिति यह है कि मध्यमवर्गीय परिवार अपनी सीमित आय और बढ़ते खर्च के बीच तालमेल बिठाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। गरीब परिवारों के सामने तो हर दिन दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
गृहिणियों को अपने घर की रसोई का बजट संभालने के लिए जरूरी खाद्य सामग्रियों में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। बच्चों की अन्य जरूरतों और त्योहार की तैयारियों के लिए पैसे बचाना तो दूर, अब मूलभूत जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के महंगे होने से बढ़ी जनता की मुश्किलें
केवल रसोई का सामान ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं और दवाइयां भी आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। अस्पतालों में इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
एक तरफ बेरोजगारी का संकट और घटती वास्तविक आमदनी लोगों को परेशान कर रही है, तो दूसरी तरफ दिन-प्रतिदिन बढ़ती महंगाई ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। समाज का हर वर्ग इस समय आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
सरकार की नीयत और नीति पर उठे गंभीर सवाल
कांग्रेस पार्टी ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा है कि आखिर आम जनता अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए कब तक इस तरह समझौता करती रहेगी? चुनाव के समय लुभावने वादे करने वाली सरकार आज महंगाई पर नियंत्रण करने के सवाल पर पूरी तरह मौन क्यों है?
क्या सरकार की जिम्मेदारी केवल चुनावी वादे करना भर है, या फिर जनता को बेलगाम महंगाई से राहत दिलाना भी उसका दायित्व है? विपक्ष ने आरोप लगाया है कि बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए वर्तमान सरकार के पास न तो कोई स्पष्ट नीति है और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति बची है।



