School Children Spectacles: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य की विष्णु देव साय सरकार पर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार अपने चहेते सप्लायरों को आर्थिक फायदा पहुंचाने के चक्कर में प्रदेश के लाखों सरकारी स्कूल के बच्चों की पढ़ाई और आंखों की सेहत को नजरअंदाज कर रही है।
टेंडर प्रक्रिया में किए गए बदलावों के कारण पूरी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। आधा शिक्षण सत्र बीत जाने के बाद भी जरूरतमंद बच्चों को अब तक चश्मा नहीं मिल पाया है।
टेंडर शर्तों में बदलाव से 5 लाख बच्चों का वितरण अटका
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुफ्त चश्मा उपलब्ध कराने की योजना में गलत नीतियां लागू की गई हैं। सरकार द्वारा टेंडर की शर्तों में बदलाव किए जाने से राज्य के करीब 5 लाख स्कूली बच्चों को मिलने वाला चश्मा वितरण अधर में लटक गया है।

जेम पोर्टल की नई शर्त से स्थानीय व्यापारी बाहर
कांग्रेस प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि सरकार ने इस बार टेंडर की शर्तों को संशोधित कर यह तय कर दिया है कि केवल ‘जेम’ (GeM) पोर्टल पर ‘क्वाड्रेंट-2’ में पंजीकृत कंपनियां ही इस प्रक्रिया में भाग ले सकती हैं। इस एक शर्त के कारण छत्तीसगढ़ के तमाम स्थानीय चश्मा सप्लायर और व्यापारी इस टेंडर प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। स्थानीय व्यवसायियों को दरकिनार किए जाने से प्रदेश के व्यापारिक वर्ग में भी भारी निराशा है।
प्रतिस्पर्धा हुई सीमित, केवल 4 कंपनियां योग्य
टेंडर नियमों में किए गए इस अचानक बदलाव का नतीजा यह हुआ है कि देश भर की दर्जनों विनिर्माण कंपनियों के बजाय केवल चार चश्मा निर्माता कंपनियां ही इस पूरी टेंडर प्रक्रिया में योग्य पाई गई हैं। प्रवक्ता ने कहा कि पहले जहां ‘क्वाड्रेंट-3’ में पंजीकृत कंपनियां भी इस प्रक्रिया में भाग लेने की पात्रता रखती थीं, वहां इस साल जानबूझकर बदलाव किए गए ताकि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा खत्म हो सके।
चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार अपने कुछ खास और पसंदीदा सप्लायरों को भारी मुनाफा कमाने का मौका देने के लिए ही नियमों में यह हेरफेर कर रही है। जब सप्लायरों की संख्या सीमित हो गई है, तो बच्चों तक समय पर चश्मा पहुंचाना असंभव साबित हो रहा है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार की यह बदनियति पूरी तरह उजागर हो चुकी है और इसके कारण सरकारी स्कूल के बच्चे भुगत रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है सीधा असर
सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि आंखों की कमजोरी से जूझ रहे बच्चों को ब्लैकबोर्ड देखने और किताबों के अक्षर पढ़ने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जो बच्चे ब्लैकबोर्ड के अक्षर साफ नहीं देख पाते, उन्हें कक्षा में ध्यान लगाने में भारी परेशानी हो रही है। इस प्रशासनिक लापरवाही का सीधा नकारात्मक असर बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन और उनकी वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी पर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य और भविष्य के बजाय मुनाफे की चिंता
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्राथमिक तौर पर राज्य सरकार का काम बच्चों की सेहत और उनके उज्ज्वल भविष्य की चिंता करना होना चाहिए था। लेकिन साय सरकार अपने करीबियों को वित्तीय लाभ पहुंचाने के लिए इस बेहद संवेदनशील योजना को लगातार टाल रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सत्र का आधा समय बीत जाने के बाद भी बच्चों को मूलभूत सुविधा न मिलना सरकार की प्राथमिकताओं की पोल खोलता है।
स्थानीय व्यापारियों को मौका देने की मांग
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकार से मांग की है कि टेंडर की अनुचित और पक्षपातपूर्ण शर्तों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। टेंडर में ऐसी पारदर्शी शर्तें शामिल की जाएं, जिससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय चश्मा सप्लायरों और व्यापारियों को भी इस प्रक्रिया में समान अवसर मिल सके। इससे स्थानीय स्तर पर आपूर्ति तेज होगी और बच्चों को बिना किसी अतिरिक्त देरी के चश्मा मिल सकेगा।
कांग्रेस की चेतावनी: जल्द चश्मा न मिला तो होगा विरोध
कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द प्रक्रिया में सुधार करके जरूरतमंद 5 लाख बच्चों को चश्मा उपलब्ध नहीं कराया गया, तो पार्टी इसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेगी। प्रवक्ता सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि बच्चों के अधिकारों और उनके स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज बुलंद करेगी, ताकि किसी भी मासूम की पढ़ाई सिर्फ इसलिए न रुक जाए कि उसे वक्त पर चश्मा नहीं मिला।
सरकार से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
अंत में कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व नीति निर्माताओं की जवाबदेही तय की जाए। सरकार को बिना किसी देरी के नई निष्पक्ष टेंडर प्रक्रिया शुरू कर राज्य के 5 लाख विद्यार्थियों को तुरंत राहत प्रदान करनी चाहिए, ताकि उनका शैक्षणिक सत्र और भविष्य खराब होने से बच सके।



