Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि सुबह 11:58 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9:42 बजे तक रहेगी।
कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस पर्व पर मां लक्ष्मी की पूजा, रात्रि जागरण और चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व है।
शरद पूर्णिमा 2026 की तिथि और समय
शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और मां लक्ष्मी की पूजा करने वाले श्रद्धालु तिथि और शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखते हैं।
- पर्व की तारीख: 25 अक्टूबर 2026, रविवार।
- पूर्णिमा तिथि आरंभ: 25 अक्टूबर को सुबह 11:58 बजे।
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर को सुबह 9:42 बजे।
- कोजागरी पूजा का बताया गया मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 12:30 बजे तक।
पूजा का समय अपने स्थानीय पंचांग से सत्यापित कर लें।
मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त
शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा और रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है। दी गई जानकारी के अनुसार, पूजा का मुख्य मुहूर्त रात 11:39 बजे से 12:30 बजे तक है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है। इसी वजह से कोजागरी पूर्णिमा पर रात्रि जागरण की परंपरा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, इस रात श्रद्धा से पूजा करने और मंत्र जाप करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। हालांकि, ये धार्मिक विश्वास हैं।
शरद पूर्णिमा पर खीर कब रखें?
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में रखी खीर विशेष मानी जाती है। इसके लिए दूध और चावल से खीर तैयार करें। उसे साफ बर्तन में रखकर ढंक दें और रात में खुले आसमान के नीचे ऐसी जगह रखें, जहां चंद्रमा की रोशनी पड़ सके। अगले दिन सुबह खीर को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटने की परंपरा है।
शरद पूर्णिमा की पूजा विधि
शरद पूर्णिमा पर पूजा करने के लिए इन चरणों का पालन किया जाता है।
- सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत तथा पूजा का संकल्प लें।
- घर के मंदिर की सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- पीले फूल, अक्षत, धूप, दीप, वस्त्र और नैवेद्य अर्पित करें।
- मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं।
- रात में ‘ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप करें और भजन-कीर्तन के साथ रात्रि जागरण करें।
- खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा निभाएं और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
शरद पूर्णिमा पर इन बातों का रखें ध्यान
शरद पूर्णिमा पर पूजा करने वाले श्रद्धालु तिथि और मुहूर्त की जानकारी पहले से रख सकते हैं। पूजा सामग्री तैयार रखें और घर के मंदिर की सफाई कर लें। खीर रखने के लिए साफ बर्तन और सुरक्षित स्थान चुनें। पूजा का सही समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग का सहारा लें, क्योंकि धार्मिक अनुष्ठानों का मुहूर्त स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।



