कवर्धा। साधराम हत्याकांड को लेकर कवर्धा में व्याप्त तनाव के बीच पुलिस ने मामले में गिरफ्तार 6 आरोपियों के खिलाफ UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी अयाज खान से जब्त मोबाइल व लेपटॉप में उसके आंतकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के अहम सबूत मिले हैं।

एसपी अभिषेक पल्लव ने किया खुलासा

इस मामले की पुष्टि एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने की। कवर्धा में 24 जनवरी को आरोपियों ने साधराम हत्याकांड की वारदात को अंजाम दिया था। साधराम हत्याकांड में गिरफ्तार 1 नाबालिग सहित 6 आरोपियों पर धारा 16 UAPA का मामला दर्ज किया गया है।

जानिए क्या था मामला?

दिल दहला देने वाली यह वारदात सिटी कोतवाली थाना के लालपुर नर्सरी की है। मृतक साधराम यादव गौठान में चरवाहे का काम करता था। रोज की तरह 20 जनवरी शनिवार को भी साधराम काम पर गया हुआ था, लेकिन देर रात तक घर नहीं पहुंचा। सुबह परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान गांव के लोगों ने बताया कि सड़क किनारे साधराम का शव पड़ा है।

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इस सूचना के बाद परिजन और पुलिस मौके पर पहुंची। आरोपियों ने युवक की हत्या गला रेतकर हत्या की थी। पुलिस ने घटना के कुछ ही समय में हत्या के आरोपी सुफियान, इदरीश खान, अयस खान, अयाज खान, महताब, शेख रफीक उर्फ रिंकू सहित एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले को लेकर विहिप, बजरंग दल और सर्व हिंदू समाज के लोगों ने पूरा जिला बंद कराकर विरोध प्रदर्शन किया। कातिलों को फांसी की सजा देने और एक करोड़ का मुआवजा, मृतक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई।

क्या है UAPA कानून..?

UAPA का फुल फॉर्म Unlawful Activities Prevention Act यानी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य आतंकी गतिविधियों पर रोकथाम लगाना है। पुलिस और जांच एजेंसियां इस कानून के तहत ऐसे आतंकियों, अपराधियों और संदिग्धों को चिन्हित करती है, जो आतंकी गतिविधियों में शामिल होते हैं। बता दें कि UAPA कानून को साल 1967 में लाया गया था। तब से लेकर अब तक इसमें चार बार संशोधन किए जा चुके हैं। 2004, 2008, 2012 और 2019 में इस कानून में बदलाव किए गए।

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इस कानून के तहत कम से कम 5 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अगर आतंकी घटना में किसी की जान चली जाती है तो दोषी व्यक्ति को सजा-ए-मौत या फिर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।