टीआरपी डेस्क। लाल ग्रह यानी कि मंगल पर जीवन की खोज लंबे समय से जारी है। इस बीच, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पर्सिवरेंस रोवर ने ऐसा कुछ खोज निकाला है, जो वैज्ञानिकों के सपनों को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। जी हां, रोवर की ओर से इकट्ठे किए गए चट्टान के नमूने में प्राचीन सूक्ष्मजीवों के संभावित जीवाश्म या जैविक संकेत मिले हैं। जो अरबों साल पुराने जीवन की ओर इशारा करता है। खोज के सही साबित होने पर यह जरूर स्पष्ट हो जाएगा कि, पृथ्वी ही नहीं बल्कि मंगल पर भी कभी जीवन था। लेकिन, वैज्ञानिक इसकी स्पष्टता पर अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। एकत्रित नमूनों को पृथ्वी की प्रयोगशाला में गहन जांच के लिए भेजा गया है। जिसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि, क्या मंगल पर भी जीवन संभव है ?
जानकारी के मुताबिक, ये दावा नेचर में प्रकाशित एक शोध पत्र पर आधारित है। 10 सितंबर को इसकी खोज की वैज्ञानिकों ने घोषणा की है। वहीं, मंगल पर जीवन की तलाश में इसे सबसे मजबूत कड़ी माना जा रहा है। नासा की साइंस मिशन डायरेक्टोरेट की एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर निक्की फॉक्स के मुताबिक, “यह हमारे अविश्वसनीय पर्सिवरेंस रोवर की खोज है, जो मंगल पर प्राचीन जीवन की खोज के सबसे करीब पहुंच गई है।” ये रोवर साल 2021 से मंगल ग्रह पर घूम रहा है। पर सीधे तौर पर ये जीवन का पता नहीं लगा सकता है। यह रोवर चट्टानों और नालियों में छेट करने के लिए अपने साथ एक ड्रिल लेकर चलता है, जिससे अरबों साल पहले जीवन के सबसे जरूरी माने गए जगहों से एकत्र नमूनों को रखा जा सके। इन नमूनों को जल्द पृथ्वी पर वापस लाने का इंतजार है। नासा की यह योजना काफी महत्वाकांक्षी है। जो सस्ते और त्वरित विकल्पों की तलाश की वजह से रोक दी गई।
एसईटीआई संस्थान के दो वैज्ञानिकों जेनिस बिशप और मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय के मारियो पेरेंटे ने इसे “रोमांचक खोज” बताया है, और कहा कि, इसके लिए गैर-जैविक प्रक्रियाएं जिम्मेदार हो सकती हैं। स्टोनी ब्रुक विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता जोएल ह्यूरोविट्ज़ ने कहा, “यही कारण है कि हम यह नहीं कह सकते कि यह जीवन का सकारात्मक प्रमाण है।”
‘चेयावा फॉल्स’ चट्टान और उसके रहस्यमयी धब्बे
पर्सिवरेंस रोवर मंगल के जेरो क्रेटर में एक प्राचीन सूखी नदी घाटी की जानकारी एकत्रित कर था। क्रेटर मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्धा में स्थित है, जो काफी सालों पहले एक विशाल झील था, जहां पर नदियों का प्रवाह था। इसी दौरान रोवर ने यहां पर लाल रंग का चट्टान पाया। जिसका नाम ‘चेयावा फॉल्स’ रखा गया। सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि, चट्टान पर तेंदुए के धब्बे और छोटे-छोटे पॉपी सीड्स जैसे निशान दिखे। जिनका आकार मिलीमीटर के सामान था। रोवर के ऑनबोर्ड उपकरणों जिसमें SHERLOC और PIXL ने इन निशानों का गहनता से विश्लेषण किया। जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जीवन का मूलभूत ब्लॉक यानी कि चट्टान में आयरन फॉस्फेट और आयरन सल्फाइड से भरपूर खनिज पाए गए।
हालांकि, पृथ्वी पर इस रासायनिक यौगिक बनने की प्रक्रिया काफी अलग है। जो सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों को तोड़ते हैं। वैज्ञानिकों ने धब्बों के पीछे का कारण बताया, और इसका संबंध माइक्रोबियल गतिविधियों से जोड़ा गया। जिसका ये उप-उत्पाद हो सकता है। माना जा रहा है कि, अरबों साल पहले मंगल के गर्म और नरम वातावरण में फले-फूले रहेंगे। जब पृथ्वी पर ऐसी विशेषताओं को देखते है तो ये अक्सर सूक्ष्मजीवों के चयापचय का परिणाम होते हैं, जो जैविक पदार्थ का सेवन करते हैं। ये चट्टान मंगल पर जीवन की तलाश के लिए सबसे जरूरी उम्मीदवार है।
मंगल की सतह पर जीवन की तलाश
साल 2021 में पर्सिवरेंस रोवर जेरो क्रेटर में उतरा था। इसका उद्देश्य प्राचीन जीवन के संकेत ढूंढना और नमूने इकट्ठा करना है। अब तक रोवर ने 30 से ज्यादा नमूने एकत्र किए हैं। जो टाइटेनियम ट्यूबों में बंद हैं। जिसे पृथ्वी पर लौटाए जाने की तैयारी है। लेकिन नासा का सैंपल रिटर्न मिशन अभी अनिश्चित है। वाइट हाउस के बजट कटौती प्रस्ताव के कारण, एजेंसी सस्ते और तेज विकल्प तलाश रही है। रोवर ने जेरो क्रेटर की खोज में ‘ब्राइट एंजेल’ नामक संरचना का अध्ययन किया, जो नेरेटवा वैली की एक प्राचीन नदी घाटी है। यहां पानी की मौजूदगी के प्रमाण मिले, जो जीवन के लिए आदर्श वातावरण दर्शाते हैं। रोवर के उपकरणों ने मौसम की जानकारी भी एकत्र की है, जो भविष्य के मानव मिशनों के लिए उपयोगी होगी।
क्या मंगल पर कभी जीवन था?
इस खोज को मंगल के इतिहास से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले जीवन के संकेत पुरानी चट्टानों तक सीमित हैं, हालांकि नई खोज के मुताबिक, मंगल लंबे समय तक रहने लायक हो सकता है। अन्य रोवर्स की तुलना में जोेरो क्रेटर ज्यादा विश्वसनीय है। क्यों कि, ये रेडॉक्स प्रतिक्रियाओं के संकेत हैं, जो जीवन से जुड़ी रासायनिक प्रकियाएं है।


