धमतरी। देशभर में जहां दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी, वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सेमरा (सी) गांव में मंगलवार को ही दिवाली का त्योहार धूमधाम से मना लिया गया। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी बरकरार है और हर वर्ष गांव के लोग देशभर से एक सप्ताह पहले ही त्योहार मनाते हैं।

सेमरा (सी) गांव धमतरी से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां के लोग हर साल मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर दीप जलाते हैं और पटाखे फोड़कर दिवाली मनाते हैं। माना जाता है कि यदि गांव में यह परंपरा निभाई न जाए तो कोई अनहोनी हो सकती है।

गांव में न सिर्फ दिवाली, बल्कि सभी प्रमुख त्योहार जैसे होली, पोला और हरेली भी एक सप्ताह पहले मनाए जाते हैं। गांव में स्थित सिरदार देव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां पुरुष पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि महिलाओं को मंदिर के पास जाने की अनुमति नहीं है।

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गांव के बुजुर्गों के अनुसार, बहुत समय पहले एक राजा सिरदार यहां आकर बसे थे। वे प्रजा-हितैषी और चमत्कारी शक्तियों वाले राजा माने जाते थे। एक बार शिकार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। बाद में एक बैग जनजाति के व्यक्ति को सपना आया कि राजा का शव जंगल में पड़ा है। सपने की बात सही निकली और गांववालों ने राजा का अंतिम संस्कार कर उसी स्थान पर ‘सिरदार देव’ के नाम से मंदिर स्थापित कर दिया।

कहा जाता है कि राजा सिरदार ने अपने भक्तों के सपने में आकर कहा था कि गांव की सुख-शांति के लिए सभी प्रमुख त्योहार देशभर से एक सप्ताह पहले मनाए जाएं। तभी से यह परंपरा जारी है और आज भी सेमरा गांव की यह अनूठी परंपरा लोगों की आस्था और पहचान का प्रतीक बनी हुई है।