टीआरपी डेस्क। ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह माना गया है। इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा पड़ता है। राहु भ्रम, आकस्मिक घटनाओं, छल, भय, नशा, राजनीति, तकनीक और अचानक उतार-चढ़ाव का कारक माना जाता है। जब कुंडली में राहु अशुभ स्थिति में होता है या राहु की महादशा–अंतरदशा चल रही होती है, तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, अस्थिरता, बदनामी, आर्थिक नुकसान और गलत निर्णयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में राहु को शांत करने के उपाय अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं।

राहु के अशुभ प्रभाव के लक्षण

राहु के अशांत होने पर व्यक्ति बार-बार भ्रम की स्थिति में रहता है। निर्णय क्षमता कमजोर हो जाती है। अचानक दुर्घटनाएं, कोर्ट-कचहरी के मामले, अपयश, भय, नींद की समस्या और नशे की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। सामाजिक छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

  1. राहु मंत्र का जाप
    प्रतिदिन या शनिवार को 108 बार मंत्र जपें:
    ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
  2. शनिवार को दान
    शनिवार के दिन काले तिल, कंबल, लोहे की वस्तु, सरसों का तेल या नीले वस्त्र का दान करें।
    भिखारी, मजदूर या जरूरतमंद को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।
  3. दुर्गा या भैरव पूजा
    राहु शांति के लिए मां दुर्गा या काल भैरव की आराधना करें।
    नवरात्रि में विशेष पूजा लाभकारी होती है।
  4. नारियल और काले तिल का उपाय
    नारियल पर काले तिल बांधकर शनिवार को बहते जल में प्रवाहित करें।
  5. राहु काल में विशेष सावधानी
    राहु काल में शुभ कार्य न करें और इस समय मंत्र जप या ध्यान करें।
  6. कुत्तों की सेवा
    काले कुत्ते को रोटी या दूध खिलाना राहु दोष को शांत करता है।
  7. सर्प या नाग देवता की पूजा
    नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा और दूध अर्पित करना लाभकारी माना जाता है।
  8. गलत संगति और नशे से दूरी
    राहु का प्रभाव बढ़ने पर व्यक्ति भ्रम, नशा और गलत संगति की ओर जाता है। इनसे दूर रहना सबसे बड़ा उपाय है।
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