रायपुर। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा शासकीय अस्पतालों में रोगियों के पैथोलॉजी जांच का कार्य केंद्र सरकार की सार्वजनिक उपक्रम इकाई हिंदुस्तान लाइफ केयर लिमिटेड (HLL) को दिए जाने का आदेश फरवरी माह में दिया गया है। कंपनी 14 अप्रैल से अपना काम जगदलपुर से शुरू करने जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया नियम विरुद्ध है।
डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि सामान्य वित्तीय नियमावली (GFR) 2017 और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के दिशा- निर्देशों के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार या विभाग द्वारा किसी PSU (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) को बिना निविदा (Tenderत) के सीधे काम सौंपना सामान्यतः प्रतिबंधित है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार के लिए किसी केंद्रीय या राज्य PSU को सीधे काम देना तब तक नियम विरुद्ध है जब तक कि ऊपर बताई गई विशेष परिस्थितियाँ और उनके लिखित कारण मौजूद न हों।
किसी भी प्रकार का तुलनात्मक अध्ययन नहीं
इस मामले को लेकर डॉ गुप्ता ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का गैप एनालिसिस नहीं किया गया है। यानी राज्य सरकार के अस्पतालों में वर्तमान उपलब्ध संसाधन और चाहे गए टेस्ट के बीच की दूरी पर किसी भी प्रकार का छत्तीसगढ़ राज्य शासन के पास तुलनात्मक अध्ययन नहीं है। पहले से उपलब्ध टेस्ट अब सस्ते हो रहें हैं या महंगे? राज्य सरकार के पास उपलब्ध प्रशिक्षित मानव संसाधन का भविष्य खतरे में है और ना ही इसके बारे में कोई लिखित कार्य आदेश जारी किया गया है। संबंधित कर्मचारियों के मन में भविष्य को लेकर शंकाएं हैं। सरकारी अस्पतालों में पहले से उपलब्ध जांच की मशीनों का क्या होगा? हिंदुस्तान लाइफ केयर लिमिटेड को HLLको क्या अनुबंध फीस दी जाएगी? क्योंकि हिंदुस्तान लाइव केयर लिमिटेड इस काम को स्वयं नहीं करता है अतः HLL ने यह काम किस प्राइवेट वेंडर को दिया है? इस तथ्य को राज्य सरकार क्यों छुपा रही है? नॉमिनेशन आधार पर बिना टेंडर प्रक्रिया किए केवल एचएलएल HLLको काम क्यों और कैसे मिला?
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि पूर्व में DKS सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की बिल्डिंग का सर्वे भी HLL को ही नॉमिनेशन बेसिस पर दिया गया था, ऐसी भरपूर आशंका है कि यह भी डीकेएस कल्याण योजना 2.0 साबित न हो जाए? राज्य सरकार स्वस्थ पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया से क्यों भाग रही है? जबकि ना ही महामारी की विपरीत स्थिति है, और बार-बार टेंडर भी असफल नहीं हुए हैं और ना ही HLLके पास कोई proprietary Certificate है। HLL द्वारा किए जाने वाले पैथोलॉजी जांच की लागत का कोई अता पता नहीं है, कोई पारदर्शिता नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने इस पर आपत्ति जताते हुए अनुबंध को समाप्त कर नए सिरे से नियमानुसार कार्य आबंटन की मांग की है।



