नई दिल्ली। दुनिया इस समय एक साथ कई बड़े संकटों से जूझ रही है। ऐसे में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में वैश्विक दक्षिण के सामने मौजूद एक बड़े खतरे को बयान दिया है। जिसे लेकर कांग्रेस अब पीएम मोदी और बीजेपी पर हमलावर हो रही है।
@INCIndia ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पीएम मोदी को घेरते हुए लिखा है कि…नरेंद्र मोदी के मंत्री ने बता दिया कि आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों का संकट आने वाला है।
देश पहले ही Energy Crisis से जूझ रहा है। खाद की भयंकर कमी है। अब खाने-पीने की चीजों पर भी संकट मंडरा रहा है।
अगर नरेंद्र मोदी ने वक्त रहते काम किया होता तो आज देश के सामने ये संकट ना होता, लेकिन उन्हें झाल बजाने से फुर्सत मिले, तब तो देश का सोचें।

जानें क्या है मामला
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘4F Crisis’ बताया, जिसमें Food यानी खाद्य, Fuel यानी ईंधन, Fertiliser यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त पर दूनियाभर के देशों का ध्यान खीचा था।
क्या है 4F Crisis?
जयशंकर के मुताबिक वैश्विक दक्षिण के सामने खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ा संकट एक साथ गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संघर्षों और आपूर्ति व्यवस्था में रुकावटों का असर एक-दूसरे से जुड़ रहा है। ऐसे में चारों क्षेत्रों में पैदा होने वाला दबाव विकासशील देशों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
पहला संकट- Food यानी खाने-पीने की चीजें
जयशंकर ने खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अनाज की आवाजाही में आ रही रुकावटें स्थिति को और मुश्किल बना रही हैं। खासतौर पर महत्वपूर्ण समुद्री और व्यापारिक मार्गों में व्यवधान का असर वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे उर्वरक की कमी और मौसम संबंधी जोखिमों के साथ जोड़कर देखा।
दूसरा संकट- Fuel यानी ईंधन
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों पर पड़ रहा है। जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा की उपलब्धता और उसकी कीमतों में अस्थिरता का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन, उद्योग, खेती और खाद्य कीमतों तक पहुंचता है।
तीसरा संकट- Fertiliser यानी खाद
खेती के लिए जरूरी उर्वरकों की आपूर्ति भी दबाव में है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन यानी FAO ने भी सितंबर 2026 में बताया कि मौजूदा संघर्षों के कारण उर्वरक बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। FAO के अनुसार खाड़ी क्षेत्र वैश्विक यूरिया आपूर्ति का करीब 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराता है और उर्वरक व्यापार में देरी हुई है।
इसका असर आगे की फसल पर पड़ सकता है, क्योंकि समय पर उर्वरक नहीं मिलने से किसानों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है। FAO ने मई 2026 में भी चेतावनी दी थी कि उर्वरक संकट का असर 2026 के दूसरे हिस्से और 2027 तक खाद्य आपूर्ति पर पड़ सकता है।
चौथा संकट- Finance यानी पैसा
चौथा ‘F’ वित्तीय दबाव से जुड़ा है। युद्ध, व्यापार में रुकावट, बाजारों में अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम का असर विकासशील देशों की वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है। जयशंकर ने कहा कि वित्त, बाजार तक पहुंच और आपूर्ति श्रृंखलाओं का इस्तेमाल दबाव बनाने के साधन के तौर पर किया जा रहा है।
Super El Niño ने बढ़ाई चिंता
जयशंकर ने ‘Super El Niño’ के संभावित प्रभाव को भी इस संकट से जोड़ते हुए कहा कि यदि मौसम संबंधी बड़ा झटका उर्वरक की कमी और अनाज की आवाजाही में रुकावट के साथ जुड़ता है, तो खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है। यानी समस्या केवल एक क्षेत्र की नहीं है, बल्कि कई वैश्विक कारक एक साथ असर डाल सकते हैं।
आखिर कितना बड़ा है खतरा?
‘4F Crisis’ का मतलब यह नहीं है कि दुनिया में तत्काल खाद्य या ईंधन खत्म होने वाला है। जयशंकर की चेतावनी का केंद्र यह है कि खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त पर एक साथ दबाव बढ़ने से विकासशील देशों के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसलिए आपूर्ति मार्गों को खुला रखना और वैश्विक व्यापार में स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
भारत के लिए भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि, ऊर्जा और वैश्विक व्यापार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उर्वरक की उपलब्धता खेती की लागत और उत्पादन को प्रभावित करती है, जबकि ऊर्जा की कीमतों का असर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक चलने वाला व्यवधान भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है। अब विदेश मंत्री के इसी बयान लेकर कांग्रेस पीएम मोदी सरकार के कामकाज को लेकर हमलावार हो रही है।



