रायपुर/नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को ‘कर्मफल दाता’ और ‘न्यायाधीश’ माना गया है। यानी जो जैसा कर्म करेगा, शनि उसे वैसा ही फल देंगे। साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है और ग्रहों की चाल इशारा कर रही है कि इस पूरे साल शनि देव मीन राशि में ही डेरा जमाए रखेंगे। ज्योतिषियों की मानें तो यह साल कुछ राशियों के लिए बड़ी चुनौतियां लेकर आने वाला है, तो कुछ को लंबे समय के कष्टों से आजादी मिलने वाली है।

कुंभ, मीन और मेष वालों की बढ़ी धड़कनें: जानें साढ़ेसाती का गणित

बता दें कि शनि की साढ़ेसाती साढ़े सात साल तक चलती है और यह इंसान को मानसिक रूप से मजबूत बनाने का समय होता है। साल 2026 में तीन राशियां इसके घेरे में हैं:

  • मेष राशि: आप पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। यह दौर मई 2032 तक चलेगा, इसलिए निवेश और फैसलों में जल्दबाजी न करें।
  • मीन राशि: आप सबसे कठिन दूसरे चरण से गुजर रहे हैं। मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है, लेकिन धैर्य बनाए रखें।
  • कुंभ राशि: आपके लिए खुशखबरी है! आप पर आखिरी चरण चल रहा है जो 3 जून 2027 को पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यानी राहत के दिन करीब हैं।
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इन 2 राशियों पर ढैय्या की टेढ़ी नजर

दरअसल, जब शनि किसी राशि से चौथे या आठवें स्थान पर होते हैं, तो ढाई साल की ढैय्या लगती है। 2026 में सिंह और धनु राशि के जातकों पर ढैय्या का प्रभाव रहेगा। गौरतलब है कि ढैय्या के दौरान कामों में देरी, बेवजह के खर्च और मानसिक तनाव की स्थिति बन सकती है। इस दौरान शनिवार को पीपल के पेड़ के पास दीप जलाना शुभ फल दे सकता है।

शनि का 2027 वाला महा-परिवर्तन

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि देव 3 जून 2027 को अपनी चाल बदलेंगे और मीन को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। तब तक यानी पूरे 2026 में शनि मीन राशि में रहकर ही जातकों के धैर्य और अनुशासन की परीक्षा लेंगे।

क्या करें और क्या न करें?

दरअसल, शनि का प्रभाव हमेशा बुरा नहीं होता। जो लोग ईमानदारी से अपना काम करते हैं और गरीबों की मदद करते हैं, शनि उन्हें फर्श से अर्श पर पहुंचा देते हैं।

  1. ईमानदारी बरतें: कार्यक्षेत्र में शॉर्टकट न अपनाएं।
  2. धैर्य रखें: शनि की चाल धीमी है, इसलिए फल मिलने में देरी हो सकती है।
  3. अनुशासन: अपनी सेहत और रिश्तों पर खास ध्यान दें।
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