CG Job Fraud: जांजगीर जिला अस्पताल की जीवनदीप समिति भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला अब तूल पकड़ चुका है। क्षेत्रीय विधायक ब्यास कश्यप द्वारा विधानसभा में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद 5 सदस्यीय राज्य स्तरीय जांच टीम 27 जुलाई याने आज जांच के लिए पहुंचेगी। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेतों की भर्ती की गई और 8 लाख 80 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि में भी धांधली की गई। सबसे बड़ा आरोप यह है कि भर्ती से संबंधित दस्तावेज आग के हवाले कर दिए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जिला अस्पताल के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल पर आरोप है कि स्थानांतरण से ठीक पहले उन्होंने जीवनदीप समिति में कलेक्टर दर पर 6 लोगों की नियुक्ति कर दी। 

विधायक ब्यास कश्यप का आरोप है:

1.  नियमों की अनदेखी: न विज्ञापन निकला, न मेरिट लिस्ट। कुशल-अकुशल का मापदंड भी नहीं देखा गया। अपने चहेतों और बाहर के लोगों को भर्ती किया गया।

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2.  दस्तावेज जलाए: जब जांच की बात हुई तो अस्पताल से महत्वपूर्ण दस्तावेजों में आग लगा दी गई।

3.  8.80 लाख की धांधली: जिला अस्पताल की 8 लाख 80 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि गलत तरीके से आहरित कर वेंडर के खाते में डलवा दी गई। मामला विधानसभा में उठने के बाद राशि वापस जीवनदीप समिति के खाते में डाली गई।

भर्ती कैसे हुई – बिना प्रक्रिया के

सूत्रों के अनुसार भर्ती के लिए 5 महीने पहले फाइल चली थी और कलेक्टर का अनुमोदन भी ले लिया गया था। लेकिन चुनाव के कारण रोक दी गई थी। आरोप है कि सीएस के ट्रांसफर से एक दिन पहले अचानक लिस्ट जारी कर 6 लोगों की भर्ती कर ली गई।

सबसे बड़ा सवाल: लिस्ट सार्वजनिक नहीं की गई। जब लिस्ट मांगी गई तो जिम्मेदारों ने देने से इनकार कर दिया। इससे पारदर्शिता पर सीधा सवाल उठता है।

अस्पताल प्रबंधक की भूमिका संदिग्ध

इस पूरी भर्ती में अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि भर्ती में उनके अपनों को जगह दी गई और लेन-देन भी हुआ। हालांकि प्रबंधक अंकित ताम्रकार का कहना है कि “6 लोगों की भर्ती हुई है। अनुमोदन जनवरी में हो गया था। चुनाव की वजह से देरी हुई। पूर्व सीएस के निर्देशन में भर्ती की गई। नियमों का पालन किया गया है।”

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क्या है जीवनदीप समिति का नियम?

जीवनदीप समिति में पैसा मरीजों से ली जाने वाली फीस से आता है। समिति में कलेक्टर अध्यक्ष सहित 10 सदस्य होते हैं। बिना उनकी अनुमति के राशि का उपयोग नहीं किया जा सकता। सवाल ये है कि क्या भर्ती और राशि खर्च करने से पहले सभी सदस्यों से राय ली गई थी? विधायक ब्यास कश्यप ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

FAQ: जांजगीर जिला अस्पताल भर्ती घोटाला

सवाल 1. मामला क्या है?

जांजगीर जिला अस्पताल की जीवनदीप समिति में बिना विज्ञापन और नियमों के 6 लोगों की भर्ती और 8.80 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि में गड़बड़ी का आरोप है।

सवाल 2. किस पर आरोप है?

त्कालीन सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल और अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार पर मिलीभगत और चहेतों को भर्ती करने का आरोप है।

सवाल 3. जांच कौन करेगा और कब?

विधायक ब्यास कश्यप द्वारा विधानसभा में मुद्दा उठाने के बाद 5 सदस्यीय राज्य स्तरीय टीम बनाई गई है। टीम 27 जुलाई को जिला अस्पताल पहुंचकर जांच करेगी।

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सवाल 4. 8.80 लाख रुपये का क्या हुआ?

आरोप है कि राशि को गलत तरीके से वेंडर के खाते में डाल दिया गया था। विधानसभा में मामला उठने के बाद पैसा वापस समिति के खाते में जमा किया गया।

सवाल 5. अस्पताल प्रबंधन का क्या कहना है?

अस्पताल प्रबंधक का कहना है कि कलेक्टर का अनुमोदन जनवरी में ही मिल गया था और भर्ती नियमों के अनुसार हुई है।