रायपुर/दुर्ग। हेमचंद विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता और महिला कर्मचारी के शोषण का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुद ही कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी है।
कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने दुर्ग IG अभिषेक शांडिल्य और SSP विजय अग्रवाल को पत्र लिखकर कहा है कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। इसलिए कुलसचिव के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकारी काम छोड़कर बंगले में काम कराने का आरोप
दरअसल शुभांगी मराठे, जो विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं, ने कुलपति को दिए आवेदन और शपथपत्र में आरोप लगाया था कि कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप ने उन्हें विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों के बजाय अपने सरकारी बंगले पर घरेलू कामों जैसे खाना बनाना और अन्य निजी कार्यों के लिए लगा रखा था।
महिला का आरोप है कि विश्वविद्यालय से मिलने वाला उसका पूरा वेतन भी उसे नहीं दिया जाता था। हर महीने करीब 11 हजार रुपए वेतन खाते में आने के बाद लगभग 2,200 रुपए ही उसके पास रहने दिए जाते थे, जबकि शेष राशि नौकरी से हटाने के डर और दबाव में कुलसचिव के बेटे उदय प्रताप कुलदीप के खाते में फोन पे के माध्यम से ट्रांसफर कराई जाती थी। महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे दबाव डालकर रकम ट्रांसफर कराए जाते थे। बता दें कि कुलसचिव का बेटा उदय प्रताप कुलदीप डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच: 17 महीने का पूरा हिसाब मिला
शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने 29 जुलाई 2026 को 3 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की। कमेटी ने महिला के आवेदन, शपथपत्र, बैंक पासबुक और फोन पे के पूरे रिकॉर्ड को खंगाला।
जांच में जो सामने आया उसका विस्तार
कमेटी ने पाया कि फरवरी 2025 से जुलाई 2026 तक 17 महीने की अवधि में विश्वविद्यालय ने शुभांगी मराठे के खाते में कुल 1 लाख 77 हजार रुपये का भुगतान किया था। इस पूरी राशि में से 1 लाख 49 हजार रुपये की राशि सीधे उदय प्रताप कुलदीप के खाते में ट्रांसफर की गई। यानी कुल वेतन का 84.3 प्रतिशत हिस्सा दूसरे व्यक्ति के खाते में चला गया।
84% रकम कटने के बाद शुभांगी के पास हर महीने औसतन सिर्फ 1,632 रुपये ही बचते थे। कमेटी ने इसे आर्थिक शोषण की श्रेणी में रखा।
ट्रांसफर का पैटर्न: सुनियोजित प्रक्रिया
जांच में यह भी पाया गया कि वेतन खाते में जमा होने के बाद 1 से 3 दिन के भीतर नियमित रूप से रकम ट्रांसफर कर दी जाती थी। यह पैटर्न 17 में से 17 महीने तक लगातार दोहराया गया। कमेटी ने इसे *lपूर्व-नियोजित और सुनियोजित प्रक्रिया करार दिया।
सबूतों का मिलान
कमेटी ने बैंक स्टेटमेंट और फोन पे के ट्रांजेक्शन डिटेल का मिलान किया। सभी 17 ट्रांजेक्शन पूरी तरह सत्यापित पाए गए। हर ट्रांजेक्शन में रिसीवर के रूप में उदय प्रताप कुलदीप का नाम आया।
विवि ने पुलिस से की FIR की मांग
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने IG और SSP को आधिकारिक पत्र भेजा। पत्र में लिखा गया कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने आरोपों को सही पाया है। यह मामला महिला के शोषण, सरकारी वेतन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। इसलिए कुलसचिव के खिलाफ उचित धाराओं में FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
पुलिस को साथ में ये दस्तावेज भी दिए गए हैं: महिला का आवेदन, शपथपत्र, कमेटी रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, फोन पे ट्रांजेक्शन शीट और उदय प्रताप के खाते की डिटेल। अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच के बाद तय होगी।
Follow Up: पुलिस ने प्रभारी सचिव से मांगी जानकारी
मोहन नगर थाना प्रभारी ने दुर्ग विवि के प्रभारी कुलसचिव को पत्र भेजकर कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के खिलाफ की गई शिकायत पर कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इनमें श्री कुलदीप का जवाब, शिकायतकर्ता शुभांगी मराठे का विस्तृत कथन, आरोपों का पूर्ण विवरण। यह सब कुछ कुलपति के हस्ताक्षर से भेजने कहा है। थाना प्रभारी ने कहा है कि इसके बाद ही एफआईआर दर्ज की जा सकेगी।
इस बीच कुलसचिव और परिजन कल शाम 5 घंटे तक शुभांगी मराठे के घर पर ही बैठे रहे। और उस पर शिकायत वापस लेने और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ बयान देने के लिए दबाव बनाते रहे । इस दौरान शुभांगी मराठे कुछ भी लिख कर नहीं देने की बात कहती रही।
अब इस मामले में पुलिस की भूमिका संदेहास्पद कही जा रही है। कुलसचिव को पर्याप्त समय और मौका दिया ताकि शिकायत कर्ता पर दबाव डालकर बयान बदलवा देने का अवसर दे रही है। जबकि इस मामले के डिजिटल साक्ष्य मौजूद है।

FAQ: दुर्ग विवि कुलसचिव मामला
सवाल 1. किसके खिलाफ शिकायत है ?
दुर्ग विवि के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के खिलाफ। शिकायत कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने की है।
सवाल 2. आरोप क्या हैं ?
दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी से सरकारी बंगले पर घरेलू काम कराना, नौकरी का डर दिखाकर वेतन का 84% बेटे के खाते में ट्रांसफर कराना।
सवाल 3. कितनी रकम का मामला है ?
17 महीने में 1.77 लाख में से 1.49 लाख बेटे के खाते में ट्रांसफर हुए।
सवाल 4. जांच में क्या सबूत मिले ?
बैंक स्टेटमेंट, फोन पे ट्रांजेक्शन और वेतन आने के 1-3 दिन में ट्रांसफर का लगातार पैटर्न।
सवाल 5. अब आगे क्या होगा ?
पुलिस जांच के बाद FIR दर्ज होगी। दोषी पाए जाने पर आपराधिक मुकदमा + विभागीय कार्रवाई दोनों हो सकती हैं।


