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Jio IPO: 1977 में धीरूभाई अंबानी लाए थे रिलायंस टेक्सटाइल का आईपीओ, फुटबॉल मैदान में होती थी AGM, तब से अब तक क्या-क्या बदला?

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में इस समय इतिहास लिखा जा रहा है। Jio Platforms का 30,213 करोड़ रुपये का मेगा IPO बाजार में आते ही नए रिकॉर्ड बना रहा है। देश का यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को खुला और लॉन्च होने के महज दो घंटे के भीतर ही पूरी […]

Jio IPO: 1977 में धीरूभाई अंबानी लाए थे रिलायंस टेक्सटाइल का आईपीओ, फुटबॉल मैदान में होती थी AGM, तब से अब तक क्या-क्या बदला?
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में इस समय इतिहास लिखा जा रहा है। Jio Platforms का 30,213 करोड़ रुपये का मेगा IPO बाजार में आते ही नए रिकॉर्ड बना रहा है। देश का यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को खुला और लॉन्च होने के महज दो घंटे के भीतर ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। शाम तक यह कुल 3.01 गुना सब्सक्राइब हो चुका था, जिसमें संस्थागत निवेशकों (QIBs) का भारी उत्साह देखने को मिला।

आकाश अंबानी के नेतृत्व में आ रहा यह आईपीओ देश के कॉरपोरेट इतिहास के उस पुराने पन्ने की याद दिलाता है, जब करीब पांच दशक पहले रिलायंस ने आम भारतीयों को शेयर बाजार से जोड़ा था।

जब 10 रुपये के शेयर ने बदल दी थी भारत की सोच

आज से करीब 49 साल पहले, यानी साल 1977 में धीरूभाई अंबानी ने ‘रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज’ का आईपीओ बाजार में उतारा था। उस दौर में ज्यादातर भारतीयों के लिए निवेश का मतलब केवल बैंक में पैसे रखना, सोना खरीदना या जमीन लेना होता था। शेयर बाजार आम लोगों की पहुंच से दूर था।

ऐसे समय में धीरूभाई अंबानी ने पारंपारिक बैंकों पर निर्भर रहने के बजाय आम जनता से पूंजी जुटाने का जोखिम भरा और क्रांतिकारी फैसला लिया। कंपनी ने 10 रुपये की कीमत पर शेयर जारी किए, जिन्हें करीब सात गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। उस वक्त लगभग 58,000 छोटे शेयरधारक रिलायंस के साथ जुड़े थे।

फुटबॉल के मैदान में होती थी शेयरधारकों की बैठक

1980 के दशक के शुरुआती सालों में रिलायंस की सालाना आम बैठकें (AGM) किसी आम कॉर्पोरेट मीटिंग की तरह बंद कमरों में नहीं होती थीं। निवेशकों की संख्या इतनी विशाल थी कि इन बैठकों को आयोजित करने के लिए मुंबई के फुटबॉल के मैदानों का इस्तेमाल करना पड़ता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1980 से 1985 के बीच देश में जितने खुदरा निवेशक थे, उनमें से लगभग हर 4 में से 1 निवेशक के पास रिलायंस के शेयर हुआ करते थे।

अब आकाश अंबानी के हाथों में विरासत

रिलायंस ने तब निवेशकों को सिर्फ अपने कारोबार में हिस्सेदार नहीं बनाया, बल्कि देश में एक नई इक्विटी कल्चर की नींव रखी थी। आज उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए Jio Platforms का यह रिकॉर्डतोड़ आईपीओ डिजिटल इंडिया के नए दौर की गवाही दे रहा है।

हालांकि, मौजूदा आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की भारी दिलचस्पी के मुकाबले Retail Investors का शुरुआती रुझान अभी सीमित नजर आ रहा है, लेकिन बाजार की निगाहें इस ऐतिहासिक इश्यू पर टिकी हुई हैं।

The Rural Press ब्यूरो
लेखक / पत्रकार:

The Rural Press ब्यूरो

सम्पादकीय डेस्क (The Rural Press Editorial Team)

द रूरल प्रेस केंद्रीय सम्पादकीय मंडल एवं राज्य ब्यूरो नेटवर्क

The Rural Press की विशेष सम्पादकीय एवं ग्रामीण खोजी पत्रकारिता टीम। जमीनी मुद्दों, कृषि संकट और निष्पक्ष जनसरोकार की विश्वसनीय रिपोर्टिंग।

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