Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही बड़ी गिरावट देखने को मिली। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलते ही 700 अंकों से ज्यादा टूट गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी 200 अंक से ज्यादा फिसल गया। कारोबार आगे बढ़ने के साथ दोनों इंडेक्स में गिरावट और बढ़ी।
दोपहर में सेंसेक्स 1,200 अंक से ज्यादा गिरकर 73,582 के स्तर पर आ गया था। निफ्टी भी 375 अंक टूटकर 23,048 तक पहुंच गया।
खुलते ही 700 अंक से ज्यादा टूटा सेंसेक्स
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,828 के मुकाबले गिरावट के साथ 74,272 पर खुला। इसके बाद बिकवाली बढ़ी और महज पांच मिनट के कारोबार में सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा गिरकर 74,120 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी भी 23,221 के स्तर पर खुला। इसका पिछला बंद 23,446 था। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 200 अंक से ज्यादा टूटकर 23,205 के स्तर तक आ गया। दोपहर के वक्त बाजार में गिरावट और बढ़ गई। सेंसेक्स 1.57 फीसदी की गिरावट के साथ 73,582 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 375 अंक गिरकर 23,048 पर पहुंच गया।
इन शेयरों में भी बड़ी गिरावट
शेयर बाजार में गिरावट के बीच रिलायंस और एचडीएफसी बैंक समेत कई बड़े शेयर दबाव में खुले। बीएसई लार्जकैप में बजाज फाइनेंस करीब 5 फीसदी, एक्सिस बैंक 3.70 फीसदी, बजाज फिनसर्व 3.50 फीसदी और कोटक बैंक 2 फीसदी तक गिरावट में कारोबार कर रहे थे। मिडकैप शेयरों में पॉलिसी बाजार करीब 10 फीसदी, एमएफएसएल 9.10 फीसदी, एयू बैंक 5 फीसदी, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 3.30 फीसदी और यस बैंक 2.60 फीसदी तक फिसल गए।
NSE IPO की लिस्टिंग पर भी नजर
शेयर बाजार में गिरावट के बीच गुरुवार को NSE के शेयरों की लिस्टिंग होनी थी। NSE IPO का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये था। यह इश्यू 17 से 21 सितंबर तक खुला था। लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में NSE IPO का GMP करीब 2 फीसदी के आसपास बताया जा रहा था। ऐसे में बाजार में गिरावट के बीच NSE के शेयरों की लिस्टिंग पर भी निवेशकों की नजर रही।
क्यों गिरा शेयर बाजार?
गुरुवार की गिरावट के पीछे अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी को एक वजह बताया गया। इससे घरेलू शेयर बाजार का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ। अमेरिकी बाजार में डाउ जोंस पिछले कारोबारी दिन करीब 250 अंक गिरा था। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड दो दशक के उच्च स्तर पर पहुंचने को इसकी प्रमुख वजहों में बताया गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा था। इसका असर भी बाजार की धारणा पर पड़ा।



