रायपुर। बलौदाबाजार में धरना प्रदर्शन के दौरान उग्र हुई भीड़ ने कलेक्टर-एसपी दफ्तर सहित पूरे कैंपस में करीब डेढ़ सौ गाड़ियों में आग लगा दी। तहसील दफ्तर भी नहीं छोड़ा। अब इस घटना के बाद प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन की तरफ से धरना प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी और सोशल मीडिया में इस प्रदर्शन में ज्यादा से ज्यादा लोगों के पहुंचने की अपील भी की जा रही थी, तो भी प्रशासन ने तैयारी क्यों नहीं की? प्रदर्शन की अपील को लेकर जब TRP ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि भीम सेना और प्रगतिशील सतनामी समाज की तरफ से धरना प्रदर्शन की अनुमति ली गई थी। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लगातार समाज के नेता अपील कर रहे थे। अपील का असर ऐसा था कि सोमवार को लोगों ने अपने दफ्तरों से छुट्‌टी ले रखी थी। कई निजी कंपनियों और फर्मों में काम करने वालों से जब पूछा गया कि रविवार को छुट्‌टी होने के बाद भी सोमवार को आप छुट्‌टी क्यों मांग रहे हैं तो कर्मियों ने बताया कि उन्हें बलौदाबाजार के धरना प्रदर्शन में शामिल होना है। छुट्टी के लिए जब इंकार किया गया तो नौकरी छोड़ने तक को लोग तैयार थे।

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रायपुर के एक फर्म के संचालक ने बताया कि उनके स्टाफ ने छुट्टी मांगी थी। उन्होंने छुट्‌टी देने से मना किया तो स्टाफ ने नौकरी छोड़ देने तक की बात कही थी। स्टाफ ने यहां तक कहा कि समाज के लिए नौकरी क्या जान तक दे सकते हैं। इसके बाद उस संचालक ने छुट़्टी दे दी। तब उन्हें पता नहीं था कि इतनी बड़ी घटना हो जाएगी। शाम को जब उन्हें पता चला तो उन्होंने अपने स्टाफ से बात करने की कोशिश की, लेकिन उसका फोन बंद आया। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक मामला नहीं बल्कि इस तरह से करीब दर्जनभर से ज्यादा स्टाफ ने छुट्‌टी ली है।

जानकारी के अनुसार पांच दिन से सोशल मीडिया में सोमवार के प्रदर्शन को लेकर काफी चर्चा चल रही थी। सोशल मीडिया में ही अपील भी की गई थी। रविवार को जब गृह मंत्री विजय शर्मा ने न्यायिक जांच का आश्वासन दिया तो प्रदर्शनकारियों के इस जांच को लेकर नाराजगी जताई थी। इस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बयान को लेकर भी सोशल मीडिया में माहौल गर्म था। इन सब पर नजर रखने का काम इंटेलिजेंस का होता है, लेकिन इंटेलिजेंस को इसकी भनक तक नहीं लगी।

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एक आईएएस और तीन आईपीएस की नाकामी

बलौदाबाजार की इस घटना के बाद प्रशासन के लॉ एंड ऑर्डर पर किसी तरह का कंट्रोल नहीं होने से लेकर इंटेलिजेंस फेल के दावे किए जा रहे हैं। बलौदाबाजार की डीएसबी, एलआईबी के साथ राज्य इंटेलिजेंस को भी इस प्रदर्शन के इतने भयानक रूप लेने की भनक नहीं लगी। इस पूरी घटना के लिए एक आईएएस और तीन आईपीएस को जिम्मेदार माना जा रहा है। बलौदाबाजार कलेक्टर केएल चौहान, एसएसपी सदानंद कुमार, रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा और आईजी इंटेलिजेंस अमित कुमार का पूरा सिस्टम फेल रहा है।