रायपुर/ कोंडागांव। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों ने अपनी मूलभूत मांगों को लेकर हड़ताल क्या किया, अब उन्हें वेतन के लाले पड़ गए हैं। सरकार से बातचीत के बाद इनका आंदोलन ख़त्म हो गया है, मगर 3 महीने बीतने के बाद भी कई जिलों में कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। अब कर्मचारी वेतन का इंतजार कर रहे हैं और फिर से विरोध प्रदर्शन में जुट गए हैं।

सपरिवार कलेक्ट्रेट पहुंचकर किया प्रदर्शन

इसी कड़ी में कोंडागांव जिले के नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के करीब 500 कर्मचारियों ने तीन महीने से सैलरी न मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान, एक महिला NHM कर्मचारी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि लगातार सैलरी न मिलने से मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ गया है, जिससे उन्हें कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। ये कर्मचारी अपने बच्चों के साथ कलेक्टर ऑफिस पहुंचे और अपनी समस्याएं बताईं।

इन कर्मचारियों को जिले के दूरदराज और शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना जाता है, जो 3 महीने से सैलरी न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं की जानकारी देने के लिए कलेक्टर से मुलाकात की और बकाया सैलरी का जल्द भुगतान करने की मांग की। कलेक्टर ने उनकी बातें गंभीरता से सुनीं और जल्द भुगतान का आश्वासन दिया।

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कलेक्टर के आश्वासन के बावजूद, कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब राज्य के दूसरे जिलों में NHM कर्मियों को समय पर सैलरी मिल रही है, तो कोंडागांव जिले में ही भुगतान में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही या गंभीर गलती बताया।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सैलरी का भुगतान नहीं किया गया, तो वे काम बंद करने और आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

कई जिलों में महीनों से नहीं मिला वेतन

NHM कर्मचारी संगठन के नेता हेमंत कुमार ने बताया कि लगभग 15 जिले ऐसे हैं जहां कार्यरत NHM कर्मियों को बीते कुछ महीनों से वेतन नहीं मिल सका है। इसकी वजह प्रशासनिक और तकनीकी फैलियर को बताया जा रहा है।

बहाली का इंतजार कर रहे हैं कर्मचारी नेता

हेमंत कुमार ने बताया कि हड़ताल के दौरान उनके अलावा कुल 25 कर्मचारी नेतओं को सरकार ने निलंबित कर दिया था। इसी महीने हुई स्वास्थ्य विभाग की बैठक में इस संबंध में फैसला भी हो चूका है, मगर अब तक उन्हें बहाल नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।

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