टीआरपी। Demand to stop the misuse of Lord Bahubali’s name : जैन धर्म के आराध्य भगवान बाहुबली के पवित्र नाम के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की गई है। छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि भगवान बाहुबली अहिंसा, तप, त्याग और आत्मसंयम के सर्वाेच्च प्रतीक हैं। वे न केवल जैन समाज, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति में उच्च नैतिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पत्र में चिंता जताई गई है कि वर्तमान समय में “बाहुबली” जैसे पवित्र नाम का उपयोग अपराधी, गैंगस्टर और माफिया तत्वों के लिए मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और यहां तक कि कुछ प्रशासनिक दस्तावेजों में भी किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि इससे भगवान बाहुबली के सम्मान को ठेस पहुंचती है और जैन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।

सोसायटी का कहना है कि इस तरह के शब्द का उपयोग समाज में नकारात्मक मानसिकता को बढ़ावा देते हैं और धार्मिक प्रतीकों का अनादर करते हैं।

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छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने पत्र में आग्रह किया है कि सरकार इस गंभीर विषय पर संज्ञान ले और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। इन निर्देशों के माध्यम से सार्वजनिक भाषा, मीडिया, ओटीटी, सोशल मीडिया, राजनीति और प्रशासनिक संवाद में भगवान बाहुबली एवं अन्य धार्मिक आराध्यों के नामों के आपत्तिजनक दुरुपयोग को दंडनीय अपराध घोषित किया जाए।

सोसायटी का मानना है कि इस प्रकार के ठोस कदम से सामाजिक सौहार्द, धार्मिक सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक गरिमा की रक्षा संभव हो सकेगी। पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजी गई है। डॉ. सोलंकी ने विश्वास जताया है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस संवेदनशील विषय पर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेगी।