रायपुर। भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में लाल गलियारा यानी नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब अपने इतिहास के सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। साल 2014 में जहां नक्सलवाद देश के 126 जिलों में अपनी जड़ें जमाए हुए था, वहीं साल 2026 की ताजा रिपोर्ट में यह आंकड़ा घटकर मात्र 2 जिलों पर सिमट गया है।

बीजापुर और पश्चिम सिंहभूम बने आखिरी गढ़

दरअसल, गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जिलों के पुनर्वर्गीकरण के बाद यह साफ हुआ है कि अब केवल छत्तीसगढ़ का बीजापुर और झारखंड का पश्चिम सिंहभूम ही नक्सल प्रभावित (LWE Affected) श्रेणी में बचे हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के ही कांकेर जिले को डिस्ट्रिक्ट ऑफ कन्सर्न यानी चिंताजनक जिले की श्रेणी में रखा गया है।

भाजपा छत्तीसगढ़ ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में पोस्ट कर लिखा है कि “वर्ष 2014 से 2026 के बीच, भारत ने सुरक्षा के मोर्चे पर एक अभूतपूर्व युगांतरकारी परिवर्तन देखा है। नक्सलवाद का प्रभाव, जो कभी देश के 126 जिलों में फैला था, वह आज सशक्त नेतृत्व, अदम्य साहस और केंद्र-राज्य के निर्बाध समन्वय के कारण, मात्र 2 जिलों में सिमट कर रह गया है। यह केवल एक आँकड़ा नहीं है, बल्कि इस बात का ठोस प्रमाण है कि जब देश एकजुट होकर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ता है, तो बड़े से बड़ा चुनौतीपूर्ण लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। वंदे मातरम् !”

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आंकड़ों की जुबानी, 12 साल की कहानी

सूत्रों और सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की रणनीति में बड़े बदलाव किए गए हैं जिसके कारण 2014 के मुकाबले प्रभावित जिलों की संख्या में लगभग 98% की कमी आई है। सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना के तहत फंड को तीन गुना तक बढ़ाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड संख्या में नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा की राह चुनी है।

बस्तर और अबूझमाड़ की बदली तस्वीर

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में, जिसे कभी नक्सलवाद का केंद्र माना जाता था, अब वहां के अधिकांश जिले लीगेसी जिलों की श्रेणी में डाल दिए गए हैं। इसका मतलब है कि वहां अब नक्सली हिंसा न के बराबर है और फोकस पूरी तरह से वहां स्कूल, सड़क और अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण पर शिफ्ट हो गया है।

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बता दें कि संसद में दिए गए ताजा बयानों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां अब उन अंतिम 2 जिलों में निर्णायक ऑपरेशन चला रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि जिस रफ्तार से रेड कॉरिडोर सिकुड़ा है, उससे आने वाले कुछ महीनों में देश को पूरी तरह से नक्सलवाद की समस्या से मुक्ति मिल सकती है।

नक्सली प्रभाव कम होने का सबसे बड़ा फायदा उन 124 जिलों की जनता को मिला है जो अब बिना किसी खौफ के सरकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं। रेल कनेक्टिविटी और मोबाइल नेटवर्क का विस्तार उन इलाकों में भी हो गया है जहां पहले जाना नामुमकिन था। व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों की आय में भी सुधार देखा जा रहा है।