Mix Farming Benefits: देश के विभिन्न राज्यों में अनियमित मानसून और कम बारिश के चलते फसलों की बुवाई को लेकर किसान चिंतित हैं। इस गंभीर स्थिति से निपटने और किसानों को नुकसान से बचाने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने कम पानी में बंपर पैदावार देने वाली फसलों के चयन और ‘मिक्स फार्मिंग’ (अंतरवर्तीय खेती) मॉडल अपनाने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ अधिक पानी वाली पारंपरिक फसलों के भरोसे रहने के बजाय किसान बाजरा, ज्वार, मूंग, उड़द और अरहर जैसी कम सिंचाई वाली फसलों को चुनकर कम लागत में भी बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
कम पानी में बंपर पैदावार देने वाली टॉप 5 फसलें
कृषि वैज्ञानिकों ने सूखा सहन करने और कम सिंचाई में भी बेहतर उत्पादन देने वाली 5 प्रमुख फसलों को चिन्हित किया है:
- बाजरा (Millet): यह कम बारिश वाले इलाकों की सबसे मजबूत और टिकाऊ फसल मानी जाती है, जो सूखे को आसानी से बर्दाश्त कर लेती है।
- ज्वार (Sorghum): यह मोटा अनाज कम पानी में भी तेजी से बढ़ता है और खाद्यान्न के साथ-साथ पशु चारे की मांग को पूरा करता है।
- मूंग (Green Gram): यह कम अवधि में पककर तैयार होने वाली दलहनी फसल है, जो कम सिंचाई के साथ-साथ मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता भी बढ़ाती है।
- उड़द (Black Gram): कम समय और बेहद कम लागत में तैयार होने के कारण यह दलहन फसल किसानों के लिए बेहद फायदे का सौदा साबित होती है। green-gram-black-gram-pigeon-pea
- अरहर (Pigeon Pea): अरहर की जड़ें जमीन में काफी गहराई तक जाती हैं, जिससे यह भूमि की गहरी नमी सोखकर लंबे समय तक हरी-भरी रहती है।
जोखिम कम, कमाई ज्यादा
मौसम के बदलते पैटर्न को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक अंतरवर्तीय खेती यानी ‘इंटरक्रॉपिंग’ को किसानों के लिए सबसे सुरक्षित सुरक्षा कवच मान रहे हैं। इस विधि में एक ही खेत में कतारों में दो या अधिक फसलें एक साथ बोई जाती हैं। उदाहरण के लिए, बाजरे के साथ मूंग या अरहर के साथ सोयाबीन की खेती की जा सकती है। यदि अत्यधिक गर्मी या पानी की कमी से एक फसल खराब भी होती है, तो दूसरी फसल से किसानों की लागत निकल आती है और आय सुरक्षित रहती है।
क्या कहता है ICAR रिपोर्ट ?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की रिपोर्टों के अनुसार, बाजरा और मूंग की सहफसली खेती बेहद सफल सिद्ध हुई है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बाजरे की 4 कतारों के साथ मूंग की 2 कतारों (4:2 अनुपात) का तालमेल प्रति हेक्टेयर उपज को काफी बढ़ा देता है। विशेषज्ञों की राय है कि किसानों को मानसून की पहली हल्की बारिश में बुवाई की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। जब तक खेत में कम से कम 75 से 100 मिलीमीटर बारिश न हो जाए और पर्याप्त नमी न बन जाए, तब तक बीज बोने से बचना चाहिए, ताकि दोबारा बुवाई का अतिरिक्त खर्च न उठाना पड़े।
किसानों की अर्थव्यवस्था और मिट्टी की सेहत पर असर
कम पानी की फसलों और सहफसली खेती को बड़े पैमाने पर अपनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा। दलहनी फसलें हवा से नाइट्रोजन सोखकर मिट्टी में जमा करती हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता और खर्च दोनों कम होते हैं। इस मॉडल से न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि भूजल स्तर गिरने की समस्या से जूझ रहे इलाकों में खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिलेगी।
बाजरा और मूंग की मिक्स फार्मिंग कैसे करें?
सही अनुपात चुनें: ICAR के अनुसार 4:2 या 2:1 के अनुपात में बाजरा और मूंग की बुवाई करें।
कतारों की दूरी: बाजरे की कतारों के बीच 45 से 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें ताकि मूंग की बढ़त प्रभावित न हो।
संतुलित खाद प्रबंधन: अधिक नाइट्रोजन का इस्तेमाल न करें, फास्फोरस और नाइट्रोजन का संतुलित मिश्रण ही इस्तेमाल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: कम पानी में सबसे अच्छी पैदावार देने वाली मुख्य फसलें कौन-सी हैं?
उत्तर: कम पानी में बाजरा, ज्वार, मूंग, उड़द और अरहर जैसी फसलें सबसे बेहतरीन पैदावार और मुनाफा देती हैं।
Q2: मिक्स फार्मिंग या अंतरवर्तीय खेती क्या होती है?
उत्तर: एक ही खेत में दो या अधिक फसलों को निश्चित कतारों में एक साथ उगाने की तकनीक को मिक्स फार्मिंग या इंटरक्रॉपिंग कहते हैं।
Q3: कम बारिश के मौसम में किसानों को बुवाई कब शुरू करनी चाहिए?
उत्तर: जब क्षेत्र में कम से कम 75 से 100 मिमी वर्षा हो जाए और मिट्टी में अच्छी नमी बन जाए, तभी बुवाई करनी चाहिए।
Q4: अरहर की फसल सूखे में भी कैसे बची रहती है?
उत्तर: अरहर की जड़ें जमीन में काफी गहराई तक जाती हैं, जिससे वह मिट्टी के निचले हिस्से में मौजूद नमी का उपयोग करके बची रहती है।
Q5: बाजरा और मूंग की मिश्रित खेती से क्या फायदा होता है?
उत्तर: बाजरा सूखे से बचाव की बीमा फसल की तरह काम करता है और मूंग कम समय में तैयार होकर मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाती है।


