महासमुंद। स्वास्थ्य विभाग के अमले की एक और गड़बड़ी सामने आई है। सरकारी पैसे से गरीबों के इलाज के लिए खरीदी गई जीवन रक्षक दवाइयां, सिरप, टैबलेट इस बार भारी मात्रा में सड़क किनारे खुले में फेंकी मिलीं हैं। मामला बागबाहरा-खरियार रोड पर मौलीमुड़ा के पास जंगल का है।
सड़क किनारे बिखरी दवाइयों में शामिल हैं:
– ओआरएस घोल
– बच्चों के कफ सिरप
– एंटासिड, बायोमैथ्रिन, मेट्रोनिडाजॉल, प्रोमेथिडिन, आयोडीन
– आयरन की टैबलेट
गरीब लाइन में, दवाइयां कचरे में: दवाइयों की स्ट्रिप पर एक्सपायरी डेट 2027 दर्ज है। यानी दवाइयां अभी काम की थीं। इन्हें कचरे की तरह फेंक दिया गया। सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीज एक-एक गोली, सिरप के लिए घंटों लाइन में लगते हैं। ऐसे में इतनी मात्रा में दवाइयों का सड़क पर मिलना घोर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल के नियम की भी अनदेखी: इस घटना में बायो-मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल गाइडलाइंस की भी अनदेखी हुई है।
विभाग मुख्यालय ने दिखाई सक्रियता
डॉ. बी. एस. बढ़ाई, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बागबाहरा का कहना है कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। सड़क किनारे भारी मात्रा में दवाइयां पड़े होने की जानकारी मिली है। जिसके बाद टीम भेजकर सभी दवाओं को जब्त और संग्रहित कराया जा रहा है। मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई होगी।
बता दें कि इससे पहले सरायपाली क्षेत्र के एक तालाब में और महासमुंद तुमाडबरी मणिकंचन केंद्र में भारी तादात में मेडिकल कचरा फेंका गया था। जिस पर विभाग को नोटिस भी जारी की गई थी।


