HDFC Bank Penalty: देश के निजी और सरकारी बैंकों द्वारा ग्राहकों से न्यूनतम बैलेंस के नाम पर वसूलए जाने वाले शुल्कों को लेकर बड़े आंकड़े सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2026 के दौरान HDFC Bank Penalty के मामले में सबसे आगे रहा है, जिसने अकेले करोड़ों रुपये की पेनल्टी वसूली है।
इस रिपोर्ट में सामने आया है कि कैसे आम खाताधारकों को मिनिमम बैलेंस न रख पाने की स्थिति में भारी भरकम चार्ज चुकाना पड़ रहा है, जबकि सरकार और रिजर्व बैंक के नियम इस मामले में क्या कहते हैं, इसकी पूरी जानकारी भी सामने आ गई है।
HDFC और Axis Bank सबसे आगे
आंकड़ों के मुताबिक, निजी क्षेत्र के बैंकों में एचडीएफसी बैंक ने सबसे ज्यादा 1,798.14 करोड़ रुपये की पेनाल्टी वसूली है। इसके बाद एक्सिस बैंक का नाम आता है, जिसने 1,081.33 करोड़ रुपये वसूले। इन दोनों बड़े बैंकों ने मिलकर निजी बैंकों की कुल पेनाल्टी का करीब 58 प्रतिशत हिस्सा अकेले वसूला है। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक ने 353.50 करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक ने 290.65 करोड़ रुपये, यस बैंक ने 195.05 करोड़ रुपये और आईडीबीआई बैंक ने 175.15 करोड़ रुपये की पेनाल्टी ग्राहकों से ली है।
सरकारी बैंकों में SBI की स्थिति
वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 477.27 करोड़ रुपये की सबसे ज्यादा पेनाल्टी दर्ज की है, हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राशि मुख्य रूप से करंट अकाउंट्स से जुड़ी है क्योंकि एसबीआई ने साल 2020 से सेविंग अकाउंट पर यह चार्ज लेना बंद कर दिया है।
जुर्माने से पूरी तरह छूट
इस पूरे मामले में न्यूनतम बैलेंस के नाम पर वसूले जाने वाले चार्ज हमेशा से बहस का मुद्दा रहे हैं। ग्राहकों की शिकायतों और आर्थिक दबाव को देखते हुए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करते रहे हैं। राहत की बात यह है कि देश के 12 सरकारी बैंकों में से 10 बैंकों ने सेविंग अकाउंट पर मिनिमम बैलेंस न रखने का चार्ज पूरी तरह खत्म कर दिया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जनधन योजना और बुनियादी बचत खाता धारकों को भी इस तरह के किसी भी जुर्माने से पूरी तरह छूट दी गई है, जिनकी संख्या देश में करीब 73 करोड़ है।
न्यूनतम राशि कम होने पर बैंक की जिम्मेदारी
इस मामले में वित्तीय विशेषज्ञों और संबंधित बैंकिंग संस्थाओं के नियमों के अनुसार, बैंकों को अपने बोर्ड की मंजूरी से ही ऐसे चार्ज लगाने का अधिकार है। रिजर्व बैंक के स्पष्ट निर्देश हैं कि बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क पूरी तरह पारदर्शी और उचित होने चाहिए। साथ ही, खाते में न्यूनतम राशि कम होने पर बैंक की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह ग्राहक को एसएमएस या ईमेल के जरिए पहले सूचना दे और समय दे, ताकि वे खाते में राशि मेंटेन कर सकें। मनमाने तरीके से चार्ज वसूलने पर सख्त पाबंदी का प्रावधान किया गया है।
आम आदमी के बजट पर पड़ रहा है असर
आने वाले समय में इन पेनल्टी शुल्कों का सीधा असर आम आदमी के बजट पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ रहे बैंकिंग चार्जेस के कारण छोटे खाताधारकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, जनधन और जीरो बैलेंस खातों की सुरक्षा के कारण करोड़ों गरीबों को बड़ी राहत मिली है। यदि बैंक नियमों का पालन करते हुए पूरी पारदर्शिता नहीं बरतते हैं, तो आने वाले दिनों में नियामक संस्थाओं द्वारा इन पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिससे ग्राहकों को वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है।
FAQs
Q1. HDFC Bank ने न्यूनतम बैलेंस पर कितनी पेनल्टी वसूली है?
वित्त वर्ष के दौरान एचडीएफसी बैंक ने सबसे ज्यादा 1,798.14 करोड़ रुपये की पेनल्टी वसूली है।
Q2. क्या सभी बैंक सेविंग अकाउंट पर मिनिमम बैलेंस का चार्ज लेते हैं?
नहीं, देश के 12 में से 10 सरकारी बैंकों ने सेविंग अकाउंट पर यह चार्ज पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
Q3. किन खातों पर न्यूनतम बैलेंस न रखने पर कोई जुर्माना नहीं लगता?
प्रधानमंत्री जनधन योजना और बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट पर कोई पेनल्टी नहीं लगती है।
Q4. बैंक चार्ज लगाने से पहले ग्राहकों को कैसे सूचित करते हैं?
नियमों के अनुसार बैंकों को पेनल्टी लगाने से पहले एसएमएस या ईमेल के माध्यम से ग्राहकों को सूचना देनी होती है।
Q5. एसबीआई द्वारा वसूली गई पेनल्टी किस खाते से संबंधित है?
एसबीआई द्वारा वसूली गई अधिकांश राशि करंट अकाउंट्स से संबंधित है, क्योंकि सेविंग अकाउंट पर यह चार्ज पहले ही बंद हो चुका है।


